नेपाली शराब से यूपी के सीमाई इलाकों में छलक रहे जाम

नेपाली शराब से यूपी के सीमाई इलाकों में छलक रहे जाम
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सीमाई इलाके के भारतीय घरों में बिक रही नेपाली शराब, भारतीय शराब से तीन गुना सस्ती है शराब

सिद्धार्थनगर. रोटी बेटी के रिश्तों के लिए जाना जाने वाले भारत नेपाल के रिश्ते अब जाम के सहारे मजबूत बनाए जा रहे हैं। भारत में शराब के महंगा होने के बाद सीमाई इलाकों में नेपाली शराब की मांग बढ़ गई। नेपाल की शराब की बोतल सस्ती होने के कारण नेपाली शराब की मांग भारत के सीमाई इलाकों में सबसे अधिक है। जो कि भारत में प्रतिबंधित है। लेकिन खुली सीमा के रास्ते नेपाली शराब की बोतलों की तस्करी कर भारत में उसकी खुलेआम बिक्री की जा रही है।

भारतीय क्षेत्र में सस्ती मिलने वाली कच्ची के बिक्री पर विभाग की सख्ती व भारत में देशी शराब के महंगी हेाने के बाद सीमाई इलाकों में सीमाई इलाकों में कच्ची का करोबार मंदा हुआ तो नेपाली शराब की तस्करी ने जोर पकड़ लिया।

आलम यह है कि सीमाई इलाकों के कई स्थानों पर नेपाली शराब को डम्प करने का अड्डा बनाया गया है। जहां से भारतीय क्षेत्र में जरूरत के अनुसार नेपाली शराब पहुंचाई जाती है। इसका अन्दाजा इसी बात से ही लगाया जा सकता है कि कच्ची शराब की बिक्री रोकने को धरपकड़ कर रही पुलिस व आबकारी विभाग की टीम को कच्ची के करोबार वाले स्थान पर अब नेपाली शराब की खेप मिल रही है।


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पिछले एक पखवारे में पुलिस व आबकारी विभाग की टीम के संयुक्त अभियान के दौरान 28 हजार से अधिक नेपाली शराब की बोतलें बरामद हुई। सीमाई इलाका ही नहीं जिले के विभिन्न क्षेत्रों में भी नेपाली शराब बरामद हुई। त्रिलोपुर थाने की पुलिस ने भी अपने क्षेत्र में नेपाली शराब की खेप बरामद की। भारत नेपाल के सीमाई इलाकों में नेपाली शराब की बिक्री भी धडल्ले से की जा रही है। जिस पर पुलिस व आबकारी विभाग देानों की नजर है। इसके लिए तो आबकारी विभाग टीम बनाकर जगह जगह छापेमारी भी कर रही है। जहां पर उसे सफलता भी मिल रही है।

भारतीय शराब से तीन गुना सस्ती है नेपाली शराब
नेपाल में 200 एमएल में मिलने वाली नेपाली शराब भारत के देशी शराब से काफी सस्ती है। भारत में 200 एमएल की जो शीशी 35 से 50 रूपए में मिलती है नेपाल में मिलने वाला 200 एमएल की शीशी का दाम भारतीय रूपए में महज 12 से 15 रूपए है। इस शराब का इस्तेमाल ज्यादातर मजदूर तबके के लोग ही करते है जिनको इससे होने वाले नुकसान के बारे में जानकारी नहीं होती है। उन्हें तो शराब से सिर्फ अपनी पूरे दिन की थकान उतारने के लिए नशा की जरूरत पूरी करनी होती है। जिससे वह शराब से होने वाले नुकसान के बारे में जानकारी लेने के बजाय वह कितनी सस्ती है इस पर ध्यान देतें है। इससे भारतीय क्षेत्रों में नेपाली शराब की मांग सबसे अधिक रहती है।

बिक्री के लिए घरों में स्टोर करते है नेपाली शराब
नेपाली शराब की तस्करी में जुटे तस्कर सीमाई इलाकों के गांवों में स्थित घरों को अपना स्टोर बनाया है। जहां पर नेपाल से तस्करी कर लाई जाने वाली शराब की बोतलोंं को घरों में स्टोर किया जाता है और वहां से अपनी सुविधा के अनुसार लोगों केा विक्री के लिए दिया जाता है। कई जगहों पर तो महिलाएं तस्करी के नेपाली शराब को बेंच रहीं है। जिसका खुलासा तीन दिन पहले आबकारी निरीक्षक राकेश त्रिपाठी द्वारा तुलसियापुर गांव में छापेमारी के दौरान किया गया। जहां पर महिला नेपाली शराब की बिक्री करते हुए पाई।
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