scriptAnother river of Madhya Pradesh on the verge of breaking its breath | नदियों पर संकट: टूट रही सोन की 'सांस', संकट में घडिय़ाल | Patrika News

नदियों पर संकट: टूट रही सोन की 'सांस', संकट में घडिय़ाल

जिले की जीवनदायिनी सोन नदी में नहीं बचा पानी

सीधी

Published: May 02, 2022 09:03:18 am

सीधी। मध्यप्रदेश में बीते कुछ सालों में करीब 300 छोटी नदियों का अस्तित्व समाप्त होने के कगार पर पहुंच गया है। इन नदियों में पानी बहुत कम समय ही नजर आता है। वहीं कुछ नदियां ऐसी भी हैं, जिनकी सांस धीरे धीरे टूटने के कगार पर आ रही है। इन्हीं नदियों में से एक है मध्यप्रदेश की सोन नदी।

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दरअसल सीधी में जिले की जीवनदायिनी सोन नदी की सांस टूटने की स्थिति में पहुंच रही है। दरअसल यहां नदी का जलस्तर लगातार घटने से जलीय जंतुओं का जीवन खतरे में आ गया है। वो भी खासकर सोन अभयारण्य में रहने वाले घडिय़ाल, मगर व कछुओं का। वैसे भी पिछले पांच वर्ष से सोन घडिय़ाल अभयारण्य में घडिय़ालों की वंशवृद्धि थमी हुई है। इसका मुख्य कारण नर घडिय़ाल का न होना बताया जाता है।

वहीं इस वर्ष विभाग द्वारा चंबल अभयारण्य से एक नर घडिय़ाल लाकर दिसंबर में छोड़ा गया था। प्रजनन के बाद तीन मादा घडिय़ालों ने अंडे भी दिए हैं, लेकिन जिस तरह से सोन का जलस्तर लगातार घट रहा है और बाणसागर बांध से पानी नहीं छोड़ा जा रहा, उससे घडिय़ालों का जीवन खतरे में आ गया है। वर्तमान में सोन घडिय़ाल अभ्यारण्य में 29 मादा व 1 नर घडिय़ाल हैं।

घडिय़ाल अभयारण्य का दायरा
बताते हैं कि घडिय़ाल अभयारण्य का क्षेत्रफल 209 किमी का है। इसमें 161 किमी लंबी सोन नदी, 23 किमी बनास नदी व 26 किमी गोपद नदी का क्षेत्र शामिल है। सोन नदी में बाणसागर बांध बनने के बाद प्रति वर्ष गर्मी के मौसम में नदी का जलस्तर कम हो जाता है, जो घडिय़ालों के लिए संकट माना जाता है।

इस वर्ष अप्रेल के शुरुआती दौर से ही भीषण गर्मी पडऩे व तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के आस-पास रहने से सोन नदी के साथ ही उसकी मुख्य सहायक नदी गोपद, महान व बनास का भी जल स्तर काफी कम हो गया है और धार टूटने लगी है।

घडिय़ाल अभयारण्य द्वारा सोन नदी के जल स्तर पर सतत निगरानी रखी जाती है और जलस्तर कम होते ही बाण सागर बांध प्रबंधन से नदी में पानी छुड़वाने की मांग की जाती है।

सहायक नदियों की भी टूटी धार
सोन की सहायक नदियों में बनास, महान व गोपद शामिल हैं। इस गर्मी के मौसम में सोन के साथ ही इनकी भी धार टूटने लगी है। इससे जिले का जलस्तर भी प्रभावित हो रहा है।

मांगी गई है रिपोर्ट
गर्मी के मौसम में सोन नदी का जलस्तर कम हुआ है। इसको लेकर प्रतिवेदन मांगा गया है। यदि घडिय़ालों के दृष्टिकोण से जलस्तर कम पाया गया तो बाण सागर बांध प्रबंधन को पानी छोडऩे के लिए पत्राचार किया जाएगा।
- वायपी सिंह, क्षेत्र संचालक संजय टाईगर रिजर्व सीधी

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