कोरोना संक्रमण के दौर में MP में बढ़ा अपराध का ग्राफ, घर लौट रहे मजदूरों से हो रही वसूली

-पीड़ित की शिकायत पर हवलदार बन कर वसूली करने वाले गिरफ्तार

By: Ajay Chaturvedi

Published: 05 May 2020, 01:35 PM IST

सीधी. कोरोना संक्रमण के फैलाव को रोकने के लिए लागू लॉकडाउन में युवाओं में आपराधिक प्रवृत्ति तेजी से बढ रही है। इनके निशाने पर वो मजदूर है जो दूर दराज से पैदल ही अपने घरों की ओर चल पड़े हैं। ये युवा इन मजदूरों से जबरन वसूली कर रहे हैं। इसमें कई खुद को पुलिसवाला बता कर अपने अभियान में जुट गए हैं। ऐसा ही एक एक मध्य प्रदेश के सीधी, बहरी में आया है।

जानकारी के मुताबिक साकिन निगाह पनरी, थाना ओबरा, जिला सोनभद्र निवासी राहगीर राम सागर गोंड का आरोप है कि वह दीप नारायण, सौरभ केवट, नन्हें लाल केवट, बबलू केटव सहित कुल 6 लोग आंध्र प्रदेश से वापस लौट रहे थे। रीवां जिला के हनुमना में कोरोना का परीक्षण कराने के बाद चेकअप पर्ची लेकर अपने गांव पनारी, सोनभद्र उत्तर प्रदेश जा रहे थे। आरोपी रवि सिंह चंदेल सकिन देवगांव थाना बहरी ने इन सबको रोका और खुद को बहरी थाने का हवलदार बताते हुए, थाने चलने को कहने लगा। एक पर्ची भी मांगी। वह दारू पीने के लिए इनसे पैसा मांग रहा था। उसने इन सभी राहगीरों की पर्ची भी ले लिया। इसके बाद भी पैसा न देने पर 3 लोगों को अपनी बाइक पर बिठा कर पैसा देने के लिए दबाव बनाने लगा। इन्हें दूसरी जगह भी ले गया। वह मुंह पर मास्क भी नहीं लगाए था।

किसी तरह इस हवलदार बताने वाले से भाग कर राहगीरों ने इसकी सूचना बहरी पुलिस को दी। इस पर थाना प्रभारी राम सिंह ने अपने वरिष्ठ अफसरों को मामले से अवगत कराया। फिर पुलिस अधीक्षक आरएस बेलवंशी के निर्देशन व अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अंजुलता पटेल के मार्गदर्शन में बहरी थाना प्रभारी राम सिंह ने फौरन पुलिस टीम गठित कर घटनास्थल पर पहुंच कर घेरेबंदी कर आरोपी की तलाश शुरू की। पुलिस के मुताबिक कुछ ही घंटों की छानबीन में आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने आरोपी पर भादवि की विभिन्न धाराओं के साथ आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 की धारा 51, महामारी अधिनियम 1897 की धारा 3,4, मध्य प्रदेश पब्लिक हेल्थ एक्ट 1949 की धारा 71 (1) (ए), मोटर अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया। साथ ही उसे न्यायालय में प्रस्तुत किया जहां से उसे जेल भेज दिया गया।

इसके बाद सभी पीड़ित राहगीरों को थाना बहरी में खाना खिला कर उके पैतृक गांव की ओर रवाना कर दिया गया।

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