२५ करोड़ के घाटे मे किसानों का बैंक

२५ करोड़ के घाटे मे किसानों का बैंक, १२० करोड़ अकृषि ऋण वितरण के बाद बैंक नहीं कर पाया वसूली, नियम विरूद्ध तरीके से जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के द्वारा वितरित किया गया ऋण

By: op pathak

Updated: 27 Mar 2020, 09:04 PM IST

सीधी। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक सीधी की आर्थिक हालत बद से बदतर हो गई है, जो दिवालिया होने की कगार पर पहुंच गया हैं। राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक नाबार्ड भी बैंक को फाइनेंस नहीं कर रहा है। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक सीधी बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट की धारा 11 (१) का पालन करने में असमर्थ हैं। इस धारा के अनुसार सहकारी बैंकों की चुकता अंशपूजी यदि एक लाख रुपए से कम हो जाए, तो वे बैंकिंग करने में समर्थ नहीं होंगे। इसका अर्थ यह कि इन बैंकों की नेटवर्थ एक लाख रुपए से भी कम हो गई है। यदि अभी उनकी हालत नहीं सुधरी तो भविष्य में वे ग्राहकों को उनकी मांग के अनुसार भुगतान नहीं कर पाएंगे। जिला सहकारी बैंकों का औसत एनपीए करीब 25 प्रतिशत है। नाबार्ड भी इन्हें एग्रीकल्चर रिफाइनेंस नहीं कर रहा, क्योंकि बैंक पात्रता खो चुके हैं।
१२० करोड़ रुपए का वितरित कर दिया गया ऋण-
वित्तीय वर्ष २०१३-१४ से पूर्व बैंक के द्वारा अपनी क्षमता से ज्यादा अकृषि ऋण का वितरण कर दिया गया, वहीं वितरण मापदंडो की अनदेखी कर की गई, ऋण न चुकाने वाले ऋणदाताओं से वसूली के लिए कोई दस्तावेज बैंक के पास नहीं है। बैंक के मुख्य कार्यपालन अधिकारी विशेष श्रीवास्तव ने बताया कि जब से कलेक्टर प्रशासक बने हैं तब से ऋण का वितरण बंद कर दिया गया है, इससे पूर्व में १२० करोड़ रुपए का ऋण बैंक के द्वारा वितरित कर दिया गया, जिसकी वसूली नहीं हो पा रही है।
२५ करोड़ के घाटे मे बैंक-
नवनियुक्त बैंक प्रशासक कांग्रेस नेता राजेंद्र सिंह भदौरिया के द्वारा बताया गया कि पूर्व मे की गई गलती के कारण बैंक २५ करोड़ रुपए के घाटे मे चल रहा है। इस घाटे को कम करने के लिए शनिवार को शाखा व समिति प्रबंधको की बैठक बुलाई गई थी, जहां उन्हें आवश्यक निर्देश दिए गए हैं, ३१ मार्च तक इसका असर दिखने लगेगा, उन्होनें बैंक को घाटे से फायदे मे लाने का दावा किया गया।

op pathak Reporting
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