एक दिन रोक के बाद फिर शुरू हुआ अवैध रेत का कारोबार

एक दिन रोक के बाद फिर शुरू हुआ अवैध रेत का कारोबार, सोन नदी से रेत की निकासी कर सड़क के किनारे किया जा रहा डंप, बुधवार की रात्रि से शुरू होकर गुरूवार सुबह १० बजे तक चला रेत चोरी का कारोबार

सीधी। सिहावल अंचल मे अवैध रेत की चोरी का क्रम थमने का नाम नहीं ले रहा है। पत्रिका के द्वारा समाचार का प्रकाशन कर मामला वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान मे लाया गया, तब सिर्फ एक रात्रि रेत चोरी पर रोक लगाई गई, किंतु अगली रात्रि से फिर से अवैध रेत उत्खनन का काला कारोबार चल पड़ा। अवैध रेत कारोबारियों के द्वारा बिना किसी की परवाह किए ही प्रशासन के नाक के नीचे मिनी ट्रकों से अवैध रेत लोड़कर फर्राटे भरते देखे गए किंतु इस अवैध करोबार को रोकने टोकने की हिम्मत पुलिस या अन्य प्रशासनिक अमला नहीं जुटा पाया।
उल्लेखनीय है कि कोरोना वायरस के प्रकोप को देखते हुए लॉक डाउन घोषित किया गया है, जहां भीड़ को एकत्रित नहीं होने दिया जा रहा है। क्योंकि भीड़ मे कोरोना वायरस फैलने का सबसे ज्यादा खतरा रहता है। किंतु सिहावल चौकी अंतर्गत सोन नदी आधा दर्जन से ज्यादा घाटों पर सैकड़ो श्रमिकों की भीड़ जुटती है जो हांथ मे तगाड़ी व फावड़ा थामे मिनी ट्रक व ट्रेक्टर मे रेत की लोडिग़ करते हैं। एक तरफ सिहावल पुलिस दिन मे बाजार आने जाने वाले लोगों की भीड़ को रोकने के लिए लाठियां भांजती देखी जाती है किंतु सूरज के छिपते ही कोरोना वायरस को लेकर पुलिस की सिस्टम बदल जाता है, सोन नदी के घाटों पर श्रमिकों के जमावड़ा कोरोना वायरस को लेकर खतरनाक साबित हो सकता है। जिस पर पुलिस विभाग के आला अधिकारी जान बूझकर अनजान बने हुए हैं।
र्जन भर जिम्मेदार विभाग, भारी पड़ रही चुप्पी-
सिहावल पुलिस चौकी होने के साथ ही दर्जन भर कार्यालय संचालित हैं, जिनकी जिम्मेदारी अवैध रेत उत्खनन रोकने की है, किंतु सभी मूकदर्शक बने हुए हैं। पुलिस के साथ वन विभाग, सोन घडिय़ाल, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, उपखंड अधिकारी, अमिलिया पुलिस सहित अन्य विभाग की जिम्मेदारी अवैध रेत उत्खनन पर रोक लगाने की है, किंतु इस ओर कोई आगे नहीं आ रहा है।
इस वर्ष भी एक भी घडिय़ालों ने नहीं दिए अंडे-
सोन नदी में जहां से रेत की चोरी की जा रही है वह घडिय़ालों के लिए आरक्षित है। जहां रेत का उत्खनन पूरी तरह से प्रतिवंधित है, क्योंकि रेत की चोरी होने या वाहनों के प्रवेश होने से घडिय़ालों के अस्तित्व पर संकट आ जाता है। किंतु रेत की चोरी के कारण संरक्षित क्षेत्र मे घडिय़ालों का प्रजनन रुक चुका है। यह मौसम घडिय़ालों के प्रजनन का काल चल रहा है। इसी माह मे मादा घडिय़ाल रेत मे गड्ढे बनाकर उसमें अंडे देते हैं, किंतु रेत चोरी के कारण सोन नदी मे घडिय़ालों का प्रजनन रुक चुका है, बिगत तीन वर्ष से मादा घडिय़ालों के द्वारा एक भी अंडे नहीं दिए हैं, इस ओर भी पुलिस व अन्य प्रशासन बेखबर बना हुआ है।

op pathak Reporting
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