पंचायतों को आवंटित रेत खदानों में रोक के बाद अब सोन नदी से शुरू हुई अंधाधुंध रेत निकासी

अवैध रेत निकासी के कारण हुई मौत के बाद भी नहीं जागा प्रशासन, पुलिस की भूमिका पर उठ रहे सवाल, प्रशासन भी बना मूकदर्शक

By: Manoj Pandey

Published: 19 Mar 2020, 09:02 PM IST

सीधी। जिले में ग्राम पंचायतों को आवंटित रेत खदानों में रेत उत्खन एवं परिवहन शासन स्तर से प्रतिबंधित कर दिए जाने के बाद अब जिले से प्रवाहित होने वाली सोन नदी से रेत का अवैध उत्खनन तेजी के साथ शुरू हो गया है। सोन नदी के विभिन्न घाटों से रेत निकासी के लिए कारोबारियों की सक्रियता काफी तेजी के साथ बढ़ गई है, और पूरी रात रेत की अंधाधुंध निकासी हो रही है। लगातार जारी रेत की अवैध निकासी से सोन नदी का सीना छलनी होता जा रहा है और जलीय जंतुओं पर भी खतरा मंडरा रहा है। सोन के विभिन्न घाटों से हो रही रेत की अवैध निकासी को लेकर स्थानीय थाना क्षेत्र के पुलिस की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है।
उल्लेखनीय है कि जिले से प्रवाहित होने वाली सोन नदी में घडिय़ाल अभ्यारण्य के कारण रेत सहित किसी भी प्रकार के उत्खनन एवं परिवहन पूरी तरह से प्रतिबंधित किया गया है। इसके बावजूद सोन नदी से रेत का अवैध उत्खनन एवं परिवहन बंद नहीं हो पा रहा है। हलांकि इस पर प्रतिबंध लगाने के लिए टास्क फोर्स गठित की गई है, लेकिन यह टास्क फोर्स महज औपचारिता तक ही सीमित है।
इन घाटों से हो रही अंधाधुंध रेत निकासी-
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार रामपुर नैकिन थाना क्षेत्र अंतर्गत भंवरसेन, चंदरेह, सजहा, खैरा, पोस्ता, डिठौरा, कंधवार, भितरी, कलचा, बेलचा, दुरासिन, चुरहट थानांतर्गत अकौरी, तरिहा, हनुमानगढ़, चौहानी, कोलदह, दुअरा, मिसिरगवां, बरहई, भितरी, जमोड़ी थाना क्षेत्रांतर्गत बरिगवां, कुर्रवाह, डेम्हा, अमरवाह, सिटी कोतवाली अंतर्गत गऊघाट, पिपरोहर, भमरहिया, कमर्जी थानांतर्गत लकोड़ा, चिलरीकला, बहरी थानांतर्गत खेतौंही, पुलिस चौकी सिहावल अंतर्गत बघोर, गेरूआ, केतकिन, रामपुर, बमुरी, लिलवार, अमिलिया थाना क्षेत्र के पमरिया, खड़बड़ा सहित अन्य घाटों से अवैध रेत की निकासी धड़ल्ले से जारी है।
मौत के बाद भी नहीं जाग रहे जिम्मेदार-
गत माह सोन नदी के डेम्हा घाट से रात्रि में अवैध रेत की निकासी कर सीधी की ओर आ रहे मिनी ट्रक चालक ने तेज गति से वाहन चलाते हुए मधुरी गांव में वाहन को एक घर में घुसेड़ दिया था, जिससे घर के अंदर सो रही महिला की मौत की घटना स्थल पर ही दर्दनाक मौत हो गई थी, वहीं दो बच्चियां घायल हो गई थी। घटना के बाद ग्रामीणों द्वारा चक्काजाम भी किया गया था, और सोन नदी से अवैध रेत निकासी कर फर्राटे मारने वाले वाहनों पर अंकुश लगाने की मांग की गई थी, लेकिन फिर से रेत का अवैध कारोबार शुरू हो गया।
रात 9 बजे से सुबह 5 बजे तक चलता है खेल-
सोन नदी के विभिन्न घाटों से रेत निकासी का खेल रात के अंधेरे में चलता है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रात 9 बजे से सुबह 5 बजे तक ताबड़तोड़ रेत की निकासी की जा रही है। इस दौरान जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा किसी प्रकार की जांच कार्रवाई भी नहीं की जा रही है। सोन नदी से रेत निकासी के बाद वाहन संचालक ग्रामीण अंचलों की सड़कों में इतनी तेज रफ्तार में चलते हैं कि वह अक्सर दुर्घटना कारित कर देते हैं।
चार विभाग, फिर भी नहीं लगा पा रहे अंकुश-
अवैध रेत निकासी पर अंकुश लगाने के लिए चार विभागों के पास जिम्मेदारी है, जिसमें सोन घडिय़ाल अभ्यारण्य, राजस्व विभाग, खनिज विभाग तथा पुलिस विभाग शामिल है। जिला प्रशासन द्वारा गठित टास्क फोर्स में भी इन चारो विभागों के अधिकारियों को शामिल किया गया है, फिर भी तीन विभाग तो मामले में चुप्पी साधकर बैठे हुए हैं जबकि पुलिस विभाग की रेत निकासी में संलिप्तता की बाते सुर्खियों में बनी हुई हैं।

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