25 हजार से अधिक शिकायती आवेदन लंबित, समस्याओं का निराकरण कराने भटक रहे लोग

6 हजार सीएम हेल्पलाइन, 18 हजार जनसुनवाई तथा 1500 अधिक शिकायतें आपकी सरकार आपके द्वार कार्यक्रम की लंबित, लगातार बढ़ती जा रही शिकायतें, नहीं हो पा रहा निराकरण

सीधी। लोगों की समस्याओं को सुनने व निराकरण के लिए भले ही शासन स्तर से विभिन्न प्रकार की योजनाएं संचालित की गई हैं, लेकिन ये योजनाएं महज दिखावा सावित हो रही हैं। लोग यहां अपनी शिकायते लेकर इस उम्मीद के साथ पहुंचते हैं कि अधिकारी उनकी समस्याओं को संजीदगी से सुनकर समयावधि में उसका निराकरण कर देंगे, लेकिन लगातार चक्कर लगाने के बाद भी लोगों की समस्याओं का समय पर निराकरण नहीं हो पा रहा है। जिसका परिणाम यह है कि सीएम हेल्प लाइन, जनसुनवाई व आपकी सरकार आपके द्वार कार्यक्रम को मिलाकर करीब 25 हजार से अधिक शिकायती आवेदन लंबित पड़े हुए हैं। ये लंबित शिकायतें यह बयां करती हैं कि लोगों की जनसमस्याओं के निराकरण को लेकर जिले के जिम्मेदार अधिकारी कितनी संजीदगी बरत रहे हैं।
प्रदेश सरकार भले ही मुख्यालय से दूर कोने-कोने में बसे गांव के रहवासी की समस्या के निराकरण करने के लिए प्रदेश भर में सीएम हेल्प्लाइन जनसुनवाई व आपकी सरकार आपके द्वार के जरिए उनकी शिकयत संबंधित विभागीय अधिकारी के द्वारा समय सीमा के अंदर निराकरण करने की व्यस्था बना रखी है, लेकिन जब आम जनों की समस्याओं के निराकरण करने वाले अधिकारी ही लापरवाह हो जाएं तो भला अब समस्याओं का निराकरण कैसे होगा।
समय और पैसों की बर्वादी-
विभिन्न प्रकार की समस्याओं से जूझ रहे लोग इस उम्मीद के साथ समय व किराया लगाकर प्रत्येक मंगलवार को जिला मुख्यालय के जिला पंचायत सभागार में आयोजित होने वाली कलेक्टर जनसुनवाई के साथ ही सरकार आपके द्वार कार्यक्रम में शिकायती आवेदन लेकर पहुंचते हैं कि उनकी समस्याओं का समय पर निराकरण हो जाएगा। लेकिन यहां तो स्थिति हो गई है कि समस्या के निराकरण के लिए लोग कई बार जनसुनवाई में चक्कर लगाते रहते हैं और उनकी समस्या का निराकरण नहीं होता।
शिकायतों की स्थिति-
योजना -लंबित शिकायतें
सीएम हेल्प लाइन- 6 हजार
जनसुनवाई- 18 हजार
सरकार आपके द्वार- 1500
राजस्व मामलों की शिकायतें सर्वाधिक-
कलेक्टर जनसुनवाई, सीएम हेल्पलाइन तथा आपकी सरकार आपके द्वार कार्यक्रम में प्राप्त होने वाले शिकायती आवेदनों की बात करें तो सर्वाधिक शिकायतें राजस्व संबंधी मामलों की आ रही हैं, और इन्हीं शिकायतों का निराकरण नहीं हो पा रहा है। जिसमें मुख्य रूप से शासकीय भूमि पर अतिक्रमण, आम रास्तों में अतिक्रमण, भूमि सीमा संबंधी विवाद आदि शामिल हैं। इसके अलावा स्वास्थ, पुलिस, ऊर्जा, वित्त, लोक शिक्षण और पंचायती राज विभाग की हैं।
...........शिकायतें की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, लोग एक शिकायत को ही कई बार कर देंते हैं जिससे शिकायतों की संख्या बढ़ जाती है, समय पर शिकायतों का निराकरण न करने पर संबंधितों पर कार्रवाई भी की जाती है। शीघ्र ही लंबित शिकायतों का निराकरण किया जाएगा।
डीपी वर्मन, अपर कलेक्टर सीधी

Manoj Pandey
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