MP Assembly Election 2018: धौहनी में किसको मिलेगा टिकट, किसका दावा, क्यों मजबूत.. पढ़िए लेटेस्ट रिपोर्ट

MP Assembly Election 2018: धौहनी में किसको मिलेगा टिकट, किसका दावा, क्यों मजबूत.. पढ़िए लेटेस्ट रिपोर्ट

Suresh Kumar Mishra | Publish: Sep, 07 2018 06:57:29 PM (IST) Sidhi, Madhya Pradesh, India

MP Assembly Election 2018: धौहनी में किसको मिलेगा टिकट, किसका दावा, क्यों मजबूत.. पढ़िए लेटेस्ट रिपोर्ट

सीधी। मध्यप्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव-2018 के लिए राजनीतिक दलों ने सक्रियता बढ़ा दी है। इस बार धौहनी विधानसभा में भाजपा को अपना-गढ़ बचाने की चुनौती है। धौहनी सीट में कांगे्रस वापसी के लिए बेताब दिख रही है। इसके लिए पार्टी के कई नेताओं ने तैयारी शुरू कर दी है। वहीं भाजपा भी दमखम के साथ मैदानी तैयारी में है। बड़े नेताओं का भी इसी सीट पर फोकस है। इसके लिए चुनावी बिसात बिछाने की कावायद शुरू कर दी है। जबकि भाजपा यह सीट अपने लिए सुरक्षित मानती है।

धौहनी: कांग्रेस को मजबूत विकल्प की तलाश
धौहनी विधानसभा सीट आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित है। वर्ष 1985 तक यह सीट कांग्रेस के कब्जे में थी। उसके बाद कभी भाजपा तो कांग्रेस जीतती रही। दो पंचवर्षीय से भाजपा के कुंवर सिंह टेकाम विधायक हैं। वापसी को बेताब कांग्रेस इस बार मजबूत विकल्प तलाश रही है। वहीं भाजपा भी कोई कसर नहीं छोडऩा चाह रही।

विधानसभा चुनाव 2013 के वोट
- भाजपा कुंवर सिंह टेकाम 60,130
- कांग्रेस तिलकराज सिंह 41,129

- ये हैं चार मुद्दे
- भू-अर्जन नीति, विस्थापन व पुनर्वास, कंपनी में स्थानीय युवाओं को रोजगार।

भाजपा मजबूत दावेदार
- कुंवर सिंह टेकाम- दो बार से विधायक हैं, क्षेत्र व पार्टी में मजबूत पकड़।
- घनश्याम सिंह - सरपंच

मजबूत दावेदार
- तिलकराज सिंह, पूर्व सांसद
- श्यामवती सिंह, पूर्व जिपं सदस्य
- तिलकराज सिंह, पूर्व प्रत्याशी
- कमलेश सिंह, पूर्व विधायक की बेटी
- आरडी सिंह, कांग्रेस नेता
- शेषमणि पनिका, जिंप सदस्य

जातिगत समीकरण
- क्षेत्र में गोंड़ व बैगा मतदाताओं की संख्या अन्य वर्गों की अपेक्षा ज्यादा है।
- इसके अलावा ब्राह्मण, क्षत्रिय और व्यापारी भी निर्णायक भूमिका में रहते हैं।

चुनौतियां
- दो बार से विधायक, एंटी एंकमबेंसी
- ज्यादा दावेदार, गुटवाजी और भितरघात से कांग्रेस को पार पाना होगा।

विधायक की परफॉर्मेंस
- विकास के बड़े प्रोजेक्ट तो आए नहीं, ग्रामीणों से दूरी व विस्थान-पुनर्वास जैसे मुद्दों में चुप्पी भारी पड़ सकती है।

क्षेत्र में सुनियोजित विकास नहीं हुआ। जनप्रतिनिधि को जनता के भरोसे पर खरा न उतराना चाहिए।
-नरेन्द्र बहादुर सिंह, रंगकर्मी

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