MP Assembly Election 2018: सिहावल में किसको मिलेगा टिकट, किसका दावा, क्यों मजबूत.. पढ़िए पूरी रिपोर्ट

MP Assembly Election 2018: सिहावल में किसको मिलेगा टिकट, किसका दावा, क्यों मजबूत.. पढ़िए पूरी रिपोर्ट

Suresh Kumar Mishra | Publish: Sep, 07 2018 06:04:20 PM (IST) Sidhi, Madhya Pradesh, India

कांग्रेस को अपना ही 'गढ़' बचाने की चुनौती, मजबूत विकल्प की तलाश में भाजपा

ओपी पाठक @ सीधी। मध्यप्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए राजनीतिक दलों ने सक्रियता बढ़ा दी है। इस बार सिहावल विधानसभा में कांग्रेस को अपना-गढ़ बचाने की चुनौती है। पिछली बार भाजपा को यहां 33 हजार मतों से शिकस्त मिली थी। लिहाजा, इस बार वह यहां कोई कसर नहीं छोडऩा चाहती है। इसके लिए चुनावी बिसात बिछाने की कावायद शुरू कर दी है।

जबकि कांग्रेस कमलेश्वर पटेल की यह सीट सुरक्षित मानती है। भाजपा को सिहावल विधानसभा क्षेत्र में कमलेश्वर पटेल को मात देने के लिए मजबूत विकल्प की तलाश है। सूत्रों की मानें तो भाजपा भी दमखम से मैदानी तैयारी में है। बड़े नेताओं का भी इसी सीट पर फोकस है।

सिहावल: भाजपा में दावेदारों की भीड़
सिहावल विधानसभा कांग्रेस की परंपरागत सीट रही है। पूर्व मंत्री इंद्रजीत सिंह के बाद बेटे कमलेश्वर पटेल यहां से वर्तमान विधायक हैं। पार्टी में उनके कद व परफॉर्मेंस को देखते हुए उनका टिकट सुरक्षित माना जा रहा है। लिहाजा, कांग्रेस में दावेदार कम हैं, लेकिन भाजपा में आधा दर्जन से ज्यादा नेताओं ने दावेदारी जताई है।

विधानसभा चुनाव 2013 के वोट
- भाजपा विश्वामित्र पाठक 40,372
- कांग्रेस कमलेश्वर पटेल 72,928

ये हैं चार मुद्दे
- उद्योग का अभाव, बेरोजगारी, आपेक्षित विकास न हो पाना, अवैध खनन, शिक्षा-स्वास्थ्य

भाजपा मजबूत दावेदार
- विश्वामित्र पाठक - पूर्व विधायक
- शिवबहादुर सिंह- पूर्व प्रत्याशी
- घनश्याम पाठक- पूर्व प्रत्याशी
- नरेंद्र सिंह- जिला मंत्री
- देवेंद्रनाथ चतुर्वेदी- किसान मोर्चा
- उषा गोपाल पटेल- जिपं सदस्य

कांग्रेस मजबूत दावेदार
- विधायक कमलेश्वर पटेल यहां से पहली बार निर्वाचित हुए थे।
- क्षेत्र में अपेक्षित विकास तो नहीं कराए पाए, लेकिनविधानसभा में सक्रियता व पार्टी में कद को देखते हुए टिकट मिलना तय है।

जातिगत समीकरण
- क्षेत्र में ब्राह्मण, पटेल, साहू, गोंड़, बैगा, विश्वकर्मा, कोल, मुस्लिम मतदाताओं की संख्या ज्यादा है। जो जीत-हार की राह तय करते हैं।

चुनौतियां
- भाजपा में दावेदार कई है। ऐसे में बगावत व भितरघात का डर है। सांसद की गांवों से दूरी।
- भाजपा की कूटनीति व जातिगत समीकरण से कांग्रेस को पार पाना होगा। डमी व बागी प्रत्याशी भी चुनाव में उतारे जा सकते हैं।

विधायक की परफॉर्मेंस
विकास का प्रयास तो किया, लेकिन विपक्ष में होने से कोई बड़ा प्रोजेक्ट नहीं लगवा पाए। हालांकि, जनता से जुड़ाव व अपने स्तर पर लोगों की मदद लगातार करते रहे।

आपेक्षित विकास तो नहीं हुआ। विधायक ऐसा होना चाहिए जो दलगत राजनीति से ऊपर उठकर काम करे।
- बृजेंद्र सिंह, एडवोकेट

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