मोबाइल से पढाई में MP का यह जिला प्रदेश में अव्वल

- संसाधन की कमी के बावजूद बनाया कीर्तिमान

By: Ajay Chaturvedi

Published: 09 Oct 2020, 03:57 PM IST

सीधी. कोरोना काल में जब सब कुछ बंद हो गया तो सरकारों को बच्चों की पढाई की चिंता सताने लगी। ऐसे में काफी सोच विचार के बाद तय किया गया कि बच्चे घरों से बाहर नहीं निकलेंगे, उनकी पढ़ाई घर बैठे ही होगी। इसके लिए ऑनलाइन एजुकेशन को बढ़ावा दिया गया है। छोटे-छोटे बच्चों को भी मोबाइल से पढ़ाया जाने लगा। आलम यह था कि देश के अधिकांश इलाकों में गर्मी की छुट्टियों में भी बच्चों को मोबाइल एजुकेशन ही दिया गया। भले ही अनलॉक-5 में सब कुछ खुल गया हो पर बच्चों का मोबाइल एजुकेशन आज भी जारी है। स्कूलों को खोलने के कई प्रयास हुए, कहा गया कि अभिभावक राजी हों तो बच्चे स्कूल जा सकते हैं। लेकिन इस पर अभी तक एक राय नहीं हो पाई है। ऐसे में मोबाइल एजुकेशन को ही बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रदेश के शिक्षा विभाग ने मोबाइल एजुकेशऩ की पड़ताल को जो सर्वे कराया है उसमें सीधी जिला अव्वल आया है।

बता दें कि सरकार ने सरकारी स्कूलों में पढऩे वाले प्राथमिक, माध्यमिक स्तर के बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिहाज से पहली से लेकर आठवी तक के छात्रों के लिए मोबाइल पर ही पाठ्य सामग्री उपलब्ध कराई गई। इस बीच मोबाइल से पढ़ाई में आने वाली दिक्कत को दूर करने के लिए शिक्षको को घर-घर जाकर पढ़ाने का निर्देश जारी हुआ। इसमें कुछ शिक्षकों ने बेहतर प्रदर्शन किया। उन्होंने मोहल्लेवार मोबाइल एजुकेशन स्टार्ट किया। एक शिक्षक ने तो अपने वेतन से अपनी बाइक में ही लाउड स्पीकर व ब्लैक बोर्ड तक लगवा लिया और मोहल्ले-मोहल्ले घूम कर बच्चों को पढ़ाने लगे।

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बच्चों की पढ़ाई को जारी रखने और उसमें आने वाली हर अड़चन को दूर करने के लिहाज से रेडियो और दूरदर्शन के माध्यम से अलग पठन सामग्री भी उपलब्ध करायी जा रही है। सीधी जिले की बात करें तो एक लाख 26 हजार बच्चों का नामांकन किया गया है जिसमे 48 हजार बच्चे मोबाइल और अन्य माध्यमों से पढ़ाई कर रहे हैं। बताया जाता है कि वाट्सएप के जरिए पढ़ाई करने वाले छात्रों का बीच-बीच में मूल्यांकन भी किया जाता है। प्रदेश स्तर पर होने वाले मूल्यांकन में सीधी जिला इस बार अव्वल रहा। जिले के छात्रों और अभिभावको के पास पर्याप्त मोबाइल सुविधा उपलब्ध न होने के बाद भी पठन-पाठन में बच्चों की अभिरूचि प्रदेश के दूसरे जिलो की अपेक्षा कहीं ज्यादा पाई गई है। कहा जा रहा है कि संसाधनो का अभाव न होता तो यहां के बच्चे और भी बेहतर करते।

हाई स्कूल और हायर सेकेंड्री स्तर के स्कूल खोलने की मंजूरी भले दे दी गई है लेकिन स्कूलों में विद्यार्थियों की आवक नगण्य है। कोरोना संक्रमण के चलते अधिकांस माता-पिता बच्चों को स्कूल भेजने के लिए राजी नहीं हो रहे हैं। स्कूलों में वो ही छात्र-छात्राएं आ रहे हैं जिन्हें मोबाइल शिक्षा में कहीं किसी तरह की दिक्कत आ रही है, वो भी अपनी परेशानी दूर कराने के बाद घर से ही पढ़ाई कर रहे हैं।

बता दें कि हायर स्तर की स्कूलों के संचालन में सरकार फिर से विचार करने जा रही है अगर सब कुछ ठीकठाक रहा तो 15 अक्टूबर के बाद विशेष दिशा-निर्देशों के साथ कक्षाएं संचालित हो सकेंगी। जब तक कक्षा संचालित नहीं हो रही तब तक हायर स्तर के छात्रों को खुद के भरोसे ही पढ़ाई करनी पड़ेगी।

कोट-
प्राथमिक, माध्यमिक स्तर के बच्चों की वाट्सएप से पढ़ाई कराई जा रही है। इसमें भाग ले रहे 48 हजार बच्चों का प्रदेश स्तर पर हुए मूल्यांकन में जिले को प्रथम स्थान मिला है। -डॉ. के.एम. द्विवेदी जिला समन्वयक, सीधी।

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