जिले में न विद्यालय प्रबंधन समिति की बैठक हुई न अभिभावकों की मीटिंग

जिले में न विद्यालय प्रबंधन समिति की बैठक हुई न अभिभावकों की मीटिंग

Anil Singh Kushwaha | Publish: Nov, 11 2018 02:15:47 AM (IST) Singrauli, Madhya Pradesh, India

कोरम पूर्ति के लिए गठित हैं समितियां

सीधी. जिले के सरकारी विद्यालयों में शैक्षणिक गतिविधियों को बढ़़ाने व विकास को लेकर विद्यालय प्रबंधन समितियों व शिक्षक अभिभावकों की बैठकें कागजों तक सीमिति रह गई हैं। कुछ स्कूलों में ये बैठकें होती भी हैं तो महज खानापूर्ति के लिए। समितियों के अध्यक्ष व सदस्य इनमें सक्रिय भागीदारी नहीं निभाते। दरअसल में सरकारी विद्यालयों में विकास कार्यों पर चर्चा करने व सुधार को लेकर शिक्षा विभाग की ओर से प्रत्येक प्रारंभिक शिक्षा के विद्यालयों में शिक्षा सत्र शुरू होने के बाद से ही शाला प्रबंंधन समितियां एसएमसी गठित हुई हैं।

विद्यालयों में एसडीएमसी का गठन
जबकि माध्यमिक स्तरीय विद्यालयों मे एसडीएमसी का गठन किया किया गया है। विभाग की ओर से प्रत्येक माह की अमावस्या को एसएमसी की बैठक करने का प्रावधान है। जिससे कि विद्यालय में विकास कार्याे व शैक्षिक गतिविधियों को गति मिल सके।

मॉनीटरिंग का अभाव
समिति में अध्यक्ष-उपाध्यक्ष सहित 16 सदस्य होते हैं। इनमें पांच सदस्य मनोनीत किए जाते हैं। कामकाज के दिन होने से अभिभावक सदस्य बैठकों में शामिल नहीं होते। हालांकि पूर्व मे सभी स्कूलो के प्रधानाध्यापको से बैठक की जानकारी मांगी जा चुकी है। प्रधानाध्यापकों का कहना है कि रबी सीजन मे अभिभावक खेती के कार्य में जुटे रहते हैं, जिससे बुलाने के बाद भी वे बैठक में नहीं शामिल हो पाते हैं। कोरम अभाव के कारण बैठकें नहीं आयोजित हो पा रही है।

ये हैं अधिकार
विद्यालय स्तर पर गठित शाला प्रबंधन समिति का उपयोग विकास योजना को मूर्त रूप देना है। विद्यालय परिसर की साफ-सफाई भवन की समय पर मरम्मत का निर्णय, सम्पत्ति का लेखाजोखा, विकास गतिविधियों को बढ़ावा देना, भवन विस्तार व जरूरी सुविधाएं बढ़ाना, विद्यालय की समय-सारणी के क्रियान्वयन सहित वेतन, कोष, आय के स्रोत बढ़ाने का कार्य शामिल हैं।

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