पर्यटकों के लिए ऑनलाइन बुकिंग सेवा शुरू, इस तरह भ्रमण करें संजय गांधी टाइगर रिजर्व

suresh mishra

Publish: Nov, 14 2017 04:35:01 (IST)

Satna, Madhya Pradesh, India
पर्यटकों के लिए ऑनलाइन बुकिंग सेवा शुरू, इस तरह भ्रमण करें संजय गांधी टाइगर रिजर्व

दुनिया के पर्यटन नक्शे में शामिल हुआ संजय गांधी टाइगर रिजर्व, पर्यटकों के लिए दी जा रही ये खास सुविधाएं

सीधी। संजय टाइगर रिजर्व अब विश्व मानचित्र नक्शे पर नजर आएगा। वहीं संजय टाइगर रिजर्व का भ्रमण करने के लिए पर्यटकों को परेशान नहीं होना पड़ेगा, बल्कि वे देश के किसी कोने में रहकर ऑनलाइन बुकिंग करा सकते हैं और आसानी से यहां का भ्रमण कर सकते हैं। संजय टाइगर रिजर्व में बाघ के साथ अन्य जंगली जानवर पाए जाते है, जिन्हें देखने के लिए अब आसानी से बुकिंग की सुविधा नसीब हो पाएगी।

ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन सेवा का शुभारंभ मंगलवार से किया जा रहा है। सांसद रीती पाठक मुख्य आतिथ व धौहनी विधायक कुंवर सिंह टेकाम कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे। वर्तमान में यह सुविधा प्रदेश के पांच टाइगर रिजर्व में उपलब्ध है। इस सेवा के प्रारंभ हो जाने से संजय टाइगर रिजर्व इंटरनेट की सेवा से जुड़ जाएगा।

घर बैठे अपनी बुकिंग

वन्य जीव पर्यटन प्रेमी विश्व के किसी कोने पर रहकर टाइगर रिजर्व के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। और घर बैठे अपनी बुकिंग करा सकते हैं। उम्मीद की जा रही है कि इस प्रणाली के लागू हो जाने से पर्यटकों की संख्या में इजाफा होगा, जिससे संजय टाईगर रिजर्व के निकट निवासरत ग्रामीणों को रोजगार के अवसर भी उपलब्ध होंगे।

इन्होंने लिया प्रशिक्षण
आल इंडिया टाइगर एस्टीमेशन वर्ष 2018 हेतु प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्य प्राणी मप्र भोपाल के निर्देशानुसार बांधवगढ़ ताला में गत माह हुए मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षण में टमसरा के परिक्षेत्राधिकारी शरद सिंह, वनपाल संतोष वर्मा, वनरक्षक मुकेश पटेल, बीटगार्ड गोविंद विश्वकर्मा व वनरक्षक विमलेश कोल ने प्रशिक्षण लिया है।

प्रशिक्षित हो रहे ३00 से अधिक कर्मचारी
वर्ष 2018 के शुरुआती चरण में होने वाली अखिल भारतीय बाघ गणना की तैयारियां संजय टाइगर रिजर्व ने शुरू कर दी है। इसके लिए करीब ६० फीसदी कर्मचारी प्रशिक्षित किए जा चुके हैं। साथ ही बाघ गणना में इस्तेमाल किए जाने वाले कैमरा ट्रैप व हाथियों की व्यवस्था की जा रही है।

राष्ट्रीय स्तर पर बाघ गणना

बाघों के संरक्षण व संवर्धन के लिए प्रति चार वर्ष में राष्ट्रीय स्तर पर बाघ गणना की जाती है। कार्यक्रम देश भर के टाइगर रिजर्व एरिया में चलता है। इसके तहत गत वर्षों की तुलना में बाघों की मौत, जन्म व उनकी संख्या में बढ़ोत्तरी का तुलनात्मक अध्ययन किया जाता है। फिर उसी हिसाब से सुविधाएं बढ़ाई जाती हैं।

ऐसे होती है पहचान
बाघों की गणना के लिए उनकी पहचान के कई आधार बनाए गए हैं, जिसमें बाघों के पग चिह्न, मल, शरीर पर बनी धारियां मुख्य रूप से शामिल हैं। इसके लिए विशेष दल को प्रशिक्षित किया जाता है, साथ ही टाईगर रिजर्व एरिया में जगह-जगह कैमरा ट्रैप लगाए जाते हैं।

उपयोग होंगे 500 से अधिक ट्रैप कैमरे
बाघ गणना के लिए दुबरी अभ्यारण्य में 235 नग कैमरा ट्रैप उपलब्ध हैं। इनके अलावा 300 नग ट्रैप कैमरा वन्य जीव संस्थान देहरादून से उपलब्ध कराए जाने हैं। इसके लिए निविदा जारी चुकी है। कुल मिलाकर 534 नग कैमरा ट्रैप बाघ गणना में उपयोग किए जाएंगे।

तीन हाथी भी मांगे
संजय दुबरी टाइगर रिजर्व में बाघों की चहल कदमी व गतिविधियों पर नजर रखने के लिए दो हाथी उपलब्ध हैं, लेकिन विभागीय अफसरों का दावा है कि ये पर्याप्त नहीं है। इसलिए उन्होंने तीन हाथी उपलब्ध कराने का प्रस्ताव वरिष्ठ कार्यालय को भेजा है।

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