कोरोना वायरस के बीच आई कुपोषण की रिपोर्ट

कोरोना वायरस के बीच आई कुपोषण की रिपोर्ट, प्रदेश के अतिकुपोषित १२ जिलो मे सीधी भी शामिल, प्रत्येक माह लाखो खर्च होने के बाद भी नहीं हो पा रहा सुधार, वर्तमान मे आंगनवाडी केंद्र व पोषण पुनर्वास केंद्र बंद होने के कारण नहीं नसीब हो पा रहा पोषण आहार

सीधी। जहां एक तरफ कोरोना वायरस को लेकर देश में बंद जैसी स्थिति है वहीं इस बीच कुपोषण की भी रिपोर्ट जिले को चौकाने वाली हैं। कुपोषण की स्थिति जानने महिला बाल विकास विभाग द्वारा किए गए सर्वे में चौकाने वाले आंकड़े प्राप्त हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक जिले में करीब डेढ़ हजार बच्चे अति कुपोषण की स्थिति में हैं। वहीं 30 हजार बच्चे कुपोषित पाए गए हैं कि 1.673 लाख बच्चे कुपोषण की चपेट से बाहर हैं। विभाग ने सर्वे में 1.32 लाख बच्चों को शामिल कर उनका बजन कराया है। आंकड़े बयां करते हैं कि शासन के तमाम प्रयास के बाद भी कुपोषण का कलंक नहीं मिट पा रहा है। शासन द्वारा इसके लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से हर साल करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं, बावजूद इसके कुपोषण की स्थिति सामान्य नहीं हो पा रही है। कुपोषण को दूर करने के लिए आंगनवाड़ी व पोषण पुनर्वास केंद्र मे सुविधाएं मुहैया कराई जाती थी किंतु वर्तमान मे ये बंद होने के कारण कुपोषितों को पोषण आहार नहीं नसीब हो पा रहा है।
मझौली की स्थिति सबसे भयावह-
कुपोषण को लेकर मझौली इलाके की तस्वीर सबसे भयावह है। रिपोर्ट के अनुसारए यहां 332 बच्चे अति कुपोषित पाए गए हैं। जबकि कुपोषित बच्चों की सख्या छह हजार है। इस परियोजना अंतर्गत 18 हजार 548 बच्चों का वजन कराया गया था, जबकि सर्वे में 21 हजार 119 बच्चे शामिल किए थे।
30 फीसदी बच्चों का नहीं हो पा रहा पोषण-
गंभीर कुपोषित बच्चों को पोषित करने के लिए पोषण पुनर्वास केंद्रो में भर्ती कराया जाता है, लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते करीब 30 फीसदी बच्चों को उचित पोषण नहीं मिल पा रहा।
हाई बर्डन जिले मे सीधी शामिल-
भारत सरकार महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा देश के 112 हाई बर्डन जिलों की हाल ही में एक सूची तैयार की गई है, उसमें प्रदेश के 12 जिले शामिल हैं। सूची में सीधी जिला भी शामिल है। प्रदेश के जो 12 जिले अब हाईबर्डन श्रेणी में शामिल हैं उनमें सिंगरौली, सीधी, बड़वानी, दमोह, विदिशा, बुरहानपुर, टीकमगढ़, दतिया, अलीराजपुर, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी शामिल है। अब इन्हें कुपोषणमुक्त भारत मिशन 2022 के तहत वृहद कार्ययोजना बनाकर कुपोषण से मुक्ति दिलाई जाएगी।
ऐसे हुई गणना-
पूरे देश में कुपोषण की स्थिति का पता लगाने के लिए राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे के परिणामों में बच्चों की स्टनिंग, अतिकम वजन तथा वेस्टिंग के आधार पर कुपोषितों की संख्या का आकलन किया गया। इससे मिले परिणामों के आधार पर हाईबर्डन जिले चिह्नित किए गए। इसमें देश के 112 जिले शामिल किए गए हैं।
यह होगा प्रयास-
अब हाईबर्डन में शामिल प्रदेश के 12 जिलों को कुपोषण से मुक्ति के लिए शिशु एवं बाल आहार व्यवहार, टीकाकरण, संस्थागत प्रसव, बचपन का विकास, फूड फोर्टिफिकेशन, स्वच्छ पेयजल की ब्यवस्थाएं व्यक्तिगत स्वच्छता तथा खाद्य विविधता की दिशा में व्यापक पैमाने पर काम किया जाएगा। इन घटकों के आधार पर संबंधित जिलों में वृहद कार्ययोजना बनाई जाएगी। 2022 तक इन जिलों को कुपोषण मुक्त करना होगा।
परियोजनावार कुपोषण की स्थिति-
परियोजना सर्वे बच्चे सामान्य कुपोषित अतिकुपोषित
कुशमी 10,651 7,985 2,376 212
मझौली 21,119 12,880 6,000 332
रामपुर नैकिन एक 16,393 12,337 2,746 140
रामपुर नैकिन दो 15,314 12,544 2,180 243
सीधी एक 28,160 16,472 7,110 213
सीधी दो 17,160 10,885 3,982 212

op pathak Reporting
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