शिकार की बढ़ती घटनाओं के बीच शावकों की सुरक्षा अफसरों के लिए बनी चुनौती

संजय टाईगर रिजर्व में गांवों का विस्थापन न होने से बाघों के लिए कम पड़ा रहा क्षेत्र, क्षेत्र कम पडऩे से बाघों के बीच वर्चस्व की लड़ाई की बढ़ती घटनाओं से भी शावकों को खतरा, बापू, भरतबहादुर, शांभवी व लक्ष्मण कर रहे शावकों की चौकसी

सीधी। संजय टाईगर रिजर्व में दो नए मेहमान आने से जहां टाईगर रिजर्व के अधिकारी पुलकित हैं, वहीं टाईगर रिजर्व एरिया में वन्य प्राणियों की लगातार हो रही शिकार की घटनाओं के बीच इनकी सुरक्षा भी एक बड़ी चुनौती मानी जा रही है। इसके साथ ही संजय टाईगर रिजर्व में गांवों का विस्थापन न होने से यहां बाघों के विचरण के लिए क्षेत्र भी कम पड़ता जा रहा है, जिसके चलते बाघों के बीच आपसी लड़ाई के घटनाओं की आशंका के बीच नए मेहमानों पर खतरा नजर आ रहा है।
उल्लेखनीय है कि करीब दो वर्ष बाद संजय टाईगर रिजर्व क्षेत्र में नए मेहमानों के आगवन की खुशी मिली है। विभागीय सूत्रों की बात माने तो संजय टाईगर रिजर्व क्षेत्र में आठ नए मेहमान आने की जानकारी मिली है। हाल ही में जहां केमली बाघिन के चार शावक देखे गए हैं, वहीं एक अन्य बाघिन द्वारा भी चार शावकों को जन्म दिया गया था, इस बाघिन का ठिकाना एक ही जगह होने के कारण सुरक्षा की दृष्टि से इसके नाम के साथ ही लोकेशन आदि की भी गोपनीयता रखी जा रही है। इस बाघिन ने करीब 9 माह पूर्व चार शावकों को जन्म दिया था, जबकि केमली ने करीब 8 माह पूर्व चार शावकों को जन्म दिया है। जो अब अपनी मां के साथ उछल कूद कर रहे हैं।
शिकार की घटनाएं चिंता का विषय-
संजय टाईगर रिजर्व क्षेत्र में बाघ, तेंदुआ के सहित अन्य प्राणियों के लगातार हो रही शिकार की घटनाओं के कारण नए शावकों की सुरक्षा भी विभागीय अधिकारियों के लिए एक बड़ी चुनौती है। हलांकि अभी सभी शावक अपनी मां के साथ हैं और यह माना जा रहा है कि बाघिन अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर सचेत है, फिर भी संजय टाईगर रिजर्व क्षेत्र में जिस तरह बाघ और तेंदुए की शिकार की घटनाएं हो चुकी हैं, वह बाघिन के साथ ही नए शावकों के लिए भी चिंता का विषय है।
सुरक्षा की दृष्टि से रखी जा रही गोपनीयता-
शावकों के साथ बाघिन की सुरक्षा को लेकर विभागीय अधिकारी काफी चिंतित हैं, शायद यही वजह है कि नए शावकों के जन्म को लेकर विभाग द्वारा गोपनीयता रखी जा रही है, नौ माह पूर्व हुए चार शावकों के जन्म की जानकारी होने के बाद भी विभागीय अधिकारियों द्वारा गोपनीयता रखी गई थी, क्योंकि शावकों को जन्म देेने वाली बाघिन के रहवास का एक निश्चित ठिकाना है, जिससे शिकारियों से उक्त ठिकाने को लेकर गोपनीय रखने का प्रयास लगातार रखा जा रहा है। वहीं केमली बाघिन के चार शावकों के जन्म को भी गोपनीय रखा गया था, लेकिन ग्रामीणों की निगाह इन शावकों पर पडऩे से इनके जन्म की बात फैल गई।
विस्थापन नहीं हुआ तो बढ़ सकती है आपसी लड़ाई-
संजय टाईगर रिजर्व क्षेत्र में आठ नए शावकों के जन्म लेने के बाद अब यहां बाघों की संख्या बढ़ गई है। इधर संजय टाईगर रिजर्व में विस्थापन के लिए चिन्हित किए गए करीब पचास गांवों में से अब तक महज 10 गांवों का ही विस्थापन हो पाया है। जबकि दस गांवों के विस्थापन की प्रक्रिया तो पूर्ण हो चुकी है लेकिन अभी तक विस्थापन नहीं हो पाया है, वहीं शेष बचे 10 गांवों में अभी तक विस्थापन की प्रक्रिया ही पूर्ण नहीं हो पाई है, ऐसे में अभी तक संजय टाईगर रिजर्व में विस्थापन के लिए चिन्हित किए गए करीब ३० गांवों का विस्थापन न होने से यहां विचरण करने वाले वन्य प्राणियों खासकर बाघों के लिए क्षेत्र कम पड़ रहा है, जिसके चलते यहां रहवास करने वाले बाघों के लिए क्षेत्र कम पडऩे लगा है, जिसका परिणाम यह है कि बाघों के बीच वर्चस्व की लड़ाई की संभावनाएं बढऩे लगी हैं, गत माह दो बाघों के बीच हुई लड़ाई इसका ही एक उदाहरण है।
चार हांथियों से की जा रही शावकों की चौकसी-
विभागीय सूत्रों की माने तो संजय टाईगर रिजर्व में आए आठ नए मेहमानों की सुरक्षा को लेकर विशेष चौकसी की जा रही है। संजय टाईगर रिजर्व क्षेत्र में मौजूद चार प्रशिक्षित हांथियों बापू, भरत बहादुर, शांभवी और लक्ष्मण से नए शावकों पर चौबीस घंटे निगरानी रखी जा रही है, ताकि अन्य बाघ व शिकारियों से इनकी सुरक्षा की जा सके।

Manoj Pandey
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