संजय टाईगर रिजर्व के तीन बाघ हुए वयस्क, मां का साथ छोड़ बना रहे अपना इलाका

संजय टाईगर रिजर्व के तीन बाघ हुए वयस्क, मां का साथ छोड़ बना रहे अपना इलाका
sidhi news

Manoj Kumar Pandey | Updated: 20 Jul 2019, 09:24:33 PM (IST) Sidhi, Sidhi, Madhya Pradesh, India

अपनी टेरोटरी की तलाश में भटक कर पहुंच रहे गांवों की ओर, टाईगर रिजर्व एरिया में गांवों का विस्थापन न होना भी बाघों के लिए बन रही समस्या, पचास में से महज दस गांवों का हो पाया है विस्थापन

सीधी। संजय टाईगर रिजर्व क्षेत्र के तीन बाघ हो गए हैं, अब ये बाघ टाईगर रिजर्व के अधिकारियों के लिए मुसीबत खड़ी कर रहे हैं, क्योंकि अब तक ये शावक थे और अपनी मां के साथ समूह में रहते थे, जैसे ही ये वयस्क हुए मां से अलग हो गए और अपनी टेरोटरी की तलाश करने लगे हैं। टेरोटरी की तलाश में बाघ अपना अलग जंगल एरिया बनाने के लिए निकल पड़े हैं, जिससे यह कभी कभी जंगल छोड़ गांवों की ओर भी पलायन कर जाते हैं, जिससे पशुहानि व जनहानि का भी खतरा बनने लगा है।
संजय टाईगर रिजर्व के विशेषज्ञों की माने तो नर बाघ वयस्क होने के बाद अपने समूह यानि परिवार से अलग हो जाता है, और जंगल में अपना एक अलग क्षेत्र निर्धारित कर लेता है, उसके क्षेत्र में मादा बाघ तो रह सकते हैं लेकिन कोई दूसरा नर बाघ नहीं रह सकता है, यदि कोई दूसरा बाघ उसके टेरोटरी में प्रवेश कर गया तो दोनो की आपस में लड़ाई हो जाती है, यह लड़ाई तब तक आपस में जारी रहती है, जब तक की उनमे से एक बाघ उस क्षेत्र को या तो छोड़कर चला जाए या आपसी लड़ाई में एक की मौत हो जाए।
संजय टाईगर रिजर्व में तीन शावक हुए वयस्क-
विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार संजय टाईगर रिजर्व क्षेत्र में वर्ष 2017 में दो मादा बाघों ने सात शावकों को जन्म दिया था, जिसमें तीन नर बाघ शामिल थे, अब ये तीनों नर शावक वयस्क हो गए हैं, और अपनी मां और समूह से अलग होकर अपनी एक अलग टेरोटरी बना रहे हैं। अपने क्षेत्र के तलाश में बाघ जंगल क्षेत्र से निकलकर गांवों की ओर भी पहुंच रहे हैं।
गांवों का विस्थापन न होना बाघों के लिए बना समस्या-
संजय टाईगर रिजर्व एरिया कोर जोन से पचास गांवों का विस्थापन होना है, विभागीय अधिकारियों के अनुसार वर्तमान स्थिति में कोर एरिया के दस गांव पूरी तरह से विस्थापित हो चुके हैं। वहीं 11 गांव आंशिक रूप से विस्थापित हो पाए हैं, इस तरह पचास में से विस्थापन का जो कुछ भी काम हुआ है वह मात्र 21 गांव में ही हो पाया है, जबकि 29 गांव का विस्थापन नहीं हो पाया है। ऐसी स्थिति में बाघों सहित अन्य वन्य प्राणियों के रहवास क्षेत्र में मानव का दखल है, जिससे बाघों को अपनी टेरोटरी बनाने में दिक्कतें हो रही हैं, और वो गांवों की ओर पलायन कर रहे हैं।
डढ़वा में पकड़ा गया बाघ टेरोटरी की तलाश में निकला था-
हाल ही में रीवा जिले के डढ़वा गांव में रेस्क्यू कर पकड़ा गया बाघ संजय टाईगर रिजर्व क्षेत्र का बाघ एसडी-23 है, यह हाल ही में वयस्क हुए तीन नर शावकों में से ही एक है जो मां से अलग होने के बाद अपनी टेरोटरी बनाने की तलाश में निकला था, और भंरवरसेन होते हुए रीवा जिले में पहुंच गया।
वयस्क होने के बाद अपना इलाका बना रहे नर बाघ-
नर बाघ वयस्क होने के बाद कभी भी समूह में नहीं रहता है, वयस्क होते ही वह अपना समूह छोड़ देते हैं, और अपना एक अलग क्षेत्र बना लेते हैं, संजय टाईगर रिजर्व एरिया के तीन नर शावक वयस्क हो गए हैं और वह अपनी टेरोटरी की तलाश कर रहे हैं। डढ़वा गांव से रेस्क्यू कर पकड़ा गया बाघ एसडी २३ उन्हीं में से एक है। जहां तक विस्थापन की बात है वह स्वैच्छिक विस्थापन नीति के कारण धीमी गति से हो रहा है।
विसेंट रहीम
क्षेत्र संचालक, संजय टाईगर रिजर्व सीधी

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