दिन भर बंद रहा सीधी-कुसमी मार्ग, आवागवन हुआ प्रभावित

टमसार में ग्रामीणों व व्यापारियों ने किया चक्काजाम आंदोलन, वन एवं राजस्व विभाग की कार्रवाई से नाराज ग्रामीणों व व्यापारियों द्वारा किया गया चक्काजाम, समझाईश में जुटे रहे वन एवं राजस्व विभाग के अधिकारी, दस घंटे बाद समाप्त हो पाया आंदोलन

सीधी/टंसार। जिले के कुसमी विकासखंड अंतर्गत टमसार में वन एवं राजस्व विभाग द्वारा की गई अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से नाराज स्थानीय ग्रामीणों व व्यापारियों द्वारा पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार गुरूवार को सुबह ७ बजे से टमसार बाजार में सीधी-कुसमी मुख्य मार्ग पर तंबू गाड़कर चकाजाम आंदोलन शुरू कर दिया गया। सुबह सात बजे से शुरू हुआ यह आंदोलन वन एवं राजस्व अधिकारियों की लगातार समझाइश के बाद शाम करीब 5.30 बजे समाप्त हो पाया। इस दौरान सीधी-कुसमी मार्ग में आवागवन पूरी तरह से प्रभावित रहा, यात्री बसों के साथ ही निजी वाहनों के पहिए भी पूरी तरह थमे रहे। चकाजाम आंदोलन के कारण विकासखंड मुख्यालय कुसमी जाने वाले लोग नहीं पहुंच पाए।
चकाजाम आंदोलन करने वाले ग्रामीणों व छोटे व्यवसाइयों का कहना था कि प्रदेश की कमलनाथ व देश की मोदी सरकार गरीब बेरोजगारों को गुमटियों ठेला के माध्यम से रोजगार देने की बात करती है, मध्यप्रदेश की सरकार कहती है कि धनाड्य भू-माफिया अतिक्रमणकारियों को हटाने के निर्देश दिए हैं। लेकिन टंसार गांव मे सड़क के पचासे के किनारे छोटी-छोटी दुकान रखकर जीविकोपार्जन कर रहे फुटपाथी व्यवसाइयों को वन विभाग और राजस्व विभाग द्वारा नोटिस पर नोटिस दिया जा रहा था, जिससे त्रस्त आकर सैकड़ो दुकानदारो ने ग्रामीणों के साथ प्रशासन को सूचना देने के बाद गुरूवार की सुबह 7 बजे से वन विभाग और राजस्व विभाग के खिलाफ धरने पर बैठ गए। ज्ञात हो ये सभी दुकानदारों ने अपनी-अपनी दुकान हटाकर, बंद करके ग्रामीणों के साथ ***** जाम हड़ताल में बैठ गए थे। दुकानदारों का मानना है कि हम सभी दुकानदार आज 15 से 20 साल से अपने एवं अपने परिवार का भरण पोषण कर रहे थे, लेकिन वन एवं राजस्व विभाग द्वारा हमारी दुकानें हटाकर रोजगार छीन लिया गया। वहीं ग्रामीणजनो का कहना था कि इन फु टपाथी दुकानदारों के हट जाने से हम लोगों को दैनिक आवश्यकताओं की वस्तुएं नही मिल पा रही हंै, जबकि वन विभाग के अंतर्गत ही कई मकान अतिक्रमण कर बने हुए हैं, लेकिन उन धनाढ्यों पर कार्रवाई नहीं की जा रही है। ऐसे में विभाग की दोहरी नीति झलक रही है।
वन विभाग के कार्यालय पहुंचकर मांगा जवाब-
आंदोलन के दौरान दोपहर करीब 2 बजे प्रभावित फुटपाथी व्यवसाइयों का एक प्रतिनिधि मंडल टंसार रेंज कार्यालय पहुंचकर गोमती हटाए जाने और अवैध बने मकानों के संबंध में कार्रवाई न किए जाने पर सवाल खड़ा किया। जिस पर रेंजर संजीव रंजन ने अपना पल्ला झाड़ते हुए कहा कि सभी गोमती, ठेला वन विभाग की भूमि में अतिक्रमण कर रखे गए थे, इसलिए नोटिस जारी किया गया था। वहीं बने मकानों के संबंध में कहा कि 3 मकानो का निर्णय न्यायालय में विचाराधीन चल रहा है, न्यायालय से निर्णय आने के बाद ही वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
कांग्रेस व गोंडवाना भी आई समर्थन में-
कांग्रेस के प्रवक्ता श्रीकांत शुक्ला ने दुकानदारों का समर्थन करते हुए कहा कि इन सभी सैकड़ो दुकानदारो को वन विभाग ने बेरोजगार कर दिया है, दुकानों को उजाड़ दिया गया जो निंदनीय और घृणित है। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के गेंदलाल सिंह ने कहा कि विभाग की यह कार्रवाई दु:खद व निंदनीय है। जनपद सदस्य महिपत सिंह ने कहा कि जबसे प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी है तभी से यह हाल हो रहा है, पूरे प्रदेश में राजसी सरकार चल रही है, गरीबों के साथ अन्याय हो रहा है।
दिन भर चली समझाईश-
आंदोलन समाप्त करने के लिए तहसीलदार कुसमी लवलेश मिश्रा व रेंजर टमसार संजीव रंजन सहित राजस्व व वन विभाग का अमला आंदोलन कारियों को समझाइस देता रहा, लेकिन आंदोलनकारी अपनी इस मांग पर अड़े हुए थे कि वन एवं राजस्व भूमि पर जो धनाढ्य लोग अतिक्रमण कर मकान बनाए हुए हैं, उनका भी अतिक्रमण हटाया जाए, साथ ही हमारी जब्त की गई दुकानें वापस किए जाने के साथ ही हमें सड़क के किनारे अस्थाई तौर पर गुमटी रखने की अनुमति दी जाए। लेकिन विभागीय अधिकारी दुकाने सजाने की अनुमति नहीं दे रहे थे, जिससे यह आंदोलन शाम करीब 5.30 बजे तक चला, फिर केवल इस आश्वासन पर आंदोलन समाप्त कर दिया गया कि जब्त दुकानें व्यवसाइयों को वापस कर दी जाएंगी।
प्रभावितों ने सुनाया दर्द-
........जब हमारी गुमटिया हटाई गई थी, तभी हमने चेतवानी दी थी कि वन भूमि पर बनाए गए मकान भी हटा दिए जाएं, ऐसा न करने हम पुन: आंदोलन करेंगे, लेकिन वन भूमि पर अतिक्रमण कर बनाए गए मकान नहीं हटाए गए, इसलिए आंदोलन किया जा रहा है।
राजकुमार सिह, स्थानीय निवासी
.........छोटे-छोटे दुकानदारों को बेदखल किया गया है, जबकि सारी दुकानें वन सीमा से बाहर थी, बगल में वनभूमि के अंदर मकान बने हुए हैं, उन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। हम आदिवासी बेरोजगार लोग कहां जाएं हम लोग यह आंदोलन मजबूरी में कर रहे हैं। हमारी मांग है कि छोटे-छोटे ठेला गोमती वालो को पुन: सुचारू रूप से उनका धंधा चलने दे और उसी जगह में गोमती रखवाई जाए।
रावेंद्र सिंह, स्थानीय निवासी
.........छोटे छोटे गुमटियों, ठेला वालों को भगाया जा रहा है, यह कार्रवाई वन विभाग और राजस्व विभाग द्वारा की गई है। हम लोंगो को जीविका चलाने में समस्या हो रही है, हम लोगों के सामने तेल, नमक की समस्या हो गई है। 100 से अधिक दुकानदारों को बेरोजगार कर दिया गया।
शुभलाल सिंह, स्थानीय निवासी
.......15 से 20 वर्षो से से गोमती में सिलाई मशीन रखकर कपड़ेे की सिलाई कर रहा था, बार-बार डरावने नोटिस देकर वन विभाग द्वारा परेशान कर दिया, अब कैसे परिवार का भरण पोषण करेंगे।
रामबहादुर प्रजापति, दुकानदार
........हम लोगों के पेट मे लात मारा गया है, अब हम और हमारे लड़के बच्चे कहां जाएं, 15 साल से छोटी सी दुकान रखे थे, राजस्व जुर्माना भी दिया। वन विभाग की कार्रवाई से हम बेरोजगार हो गए।
गेंदलाल जायसवाल, दुकानदार
..............अभी मकान वालो का प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन है, न्यायालय के निर्णय के बाद कार्रवाई की जाएगी, निर्णय अगर वन विभाग के पक्ष में आएगा तो जेसीबी लगाकर अवैध मकानों को गिरा दिया जाएगा।
संजीव रंजन, रेंजर टंसार

Manoj Pandey Bureau Incharge
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