घर वापसी के नाम पर मजदूरों से किराया वसूलना दुर्भाग्यपूर्ण-रोहित

श्रमिकों का राज्य सरकार स्वयं किराया वहन करे

By: Manoj Pandey

Published: 05 May 2020, 10:31 PM IST

सीधी। जिला कांग्रेस कमेटी के उपभोक्ता संरक्षण प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष एड.रोहित मिश्रा ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा है कि कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए लागू लॉकडाउन के बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दूसरे राज्यों में फं से छात्रों, मजदूरों और श्रद्धालुओं को घर पहुंचाने के लिए स्पेशल ट्रेनों को अनुमति दे दी है। इसके बाद रेलवे ने फंसे हुए प्रवासी कामगारों के लिए स्पेशल ट्रेनों के टिकटों का किराया वसूलने का फैसला किया है। रेलवे ने फैसला किया है कि किराए में नियमित स्लीपर क्लास के टिकटों की कीमत के अलावा 30 रुपये सुपरफ ास्ट चार्ज और 20 रुपये का अतिरिक्त शुल्क लिया जाएगा। इसमें लंबी दूरी की ट्रेनों में भोजन और पीने का पानी शामिल होगा।
रेल मंत्रालय का कहना है कि अगर भेजने वाली राज्य सरकारें चाहें तो प्रवासी मजदूरों को राहत देते हुए खुद किराए का भुगतान कर सकती हैं। इसके अलावा जिस राज्य के मजदूर यात्रा करेंगे वो सरकारें भी मजदूरों की ओर से भुगतान कर सकती हैं। रेल मंत्रालय ने कहा है कि फंसे हुए व्यक्तियों को भेजने के लिए मानक प्रोटोकॉल के अनुसार संबंधित राज्य सरकारों के अनुरोध पर प्वांइट टू प्वाइंट तक विशेष ट्रेनें चलाई जाएंगी। रेलवे और राज्य सरकार वरिष्ठ अधिकारियों को नोडल अधिकारी नियुक्त करेंगे। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि सीधी जिले में अब तक नोडल अधिकारी तक नियुक्त नहीं हैं, इस महामारी में जब मजदूर 1 माह से ज्यादा समय से लॉकडाउन है, कमरे का किराया तक देने के लिए मजदूरों के पास पैसा नहीं है, ऐसी स्थिति में अगर सरकार गरीब मजदूरों से किराया लेकर और इस तरह के अतिरिक्त चार्ज लेकर घर वापसी कराएगी तो बेचारे मजदूर बिना कोरोना के ही मर जाएंगे। ऐसी स्थिति में राज्य सरकार स्वयं किराया वहन करे।

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