रोजगार की तलाश में भटक रहे ग्रामीण, जेसीबी से कराया जा रहा काम

वाटर सेड योजना से बन रहे स्टाप डेम मे लेवर की जगह जेसीबी मशीन से की जा रही है नीव की खनाई, मझौली जनपद के ग्राम पंचायत पांड़ का मामला

सीधी। ग्रामीण अंचलों में ग्राम पंचायत स्तर पर श्रमिकों को रोजगार मुहैया कराए जाने के लिए रोजगार गारंटी योजना तो लागू की गई है, लेकिन सरपंच सचिव पंचायतों में मजदूरों के बजाय मसीनों से काम करवा रहे हैं, जिससे श्रमिकों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मुहैया नहीं हो पाता, और रोजगार की तलाश में उन्हें महानगरों की ओर पलायन करना पड़ता है। ग्राम पंचायतों के अलावा भी जो काम मजदूरों से कराया जाना चाहिए वहां भी मनमानी का आलम व्याप्त है, और मजदूरों के हक का काम मशीनों से कराए जाने के कारण स्थानीय श्रमिक काम की तलाश में भटक रहे हैं।
ऐसा ही एक मामला जनपद पंचायत मझौली अंतर्गत ग्राम पंचायत पांड़ के डड़ौर का सामने आया है। जहां वाटर सेड योजना से बन रहे स्टाप डेम मे श्रमिक की जगह जेसीबी मशीन से नीव की खनाई कराई जा रही है। जिससे स्थानीय श्रमिको के रोजगार में बट्टा लग रहा है, और वह काम की तलाश में भटक रहे हैं। बता दें कि वाटर सेड योजना कुछ गांवो को चिन्हित कर पांच वर्ष के लिए लागू की जाती है, इन ग्रामो मे लगभग योजना का कार्यकाल समाप्ति की ओर है, वहीं बचे हुए बजट को किसी प्रकार खतम करने के चक्कर मे जिम्मेदार मजदूरों की जगह मसीनो का उपयोग करने मे लगे हुए हैं। यहीं निवासी लालमन यादव ने बताया कि मसीन द्वारा नीव की खनाई की गई है, उसके बाद हम लोग सफ ाई का काम कर रहे हैं, जहां हम लोग खनाई कर सकते थे वहां मसीन से काम कराया गया है और अब सफ ाई बस हम लोगो से करवाया जा रहा है। वहीं कृष्ण प्रसाद यादव ने बताया कि उपयंत्री द्वारा मसीन से नीव खनाई करा ली गई है, उसके बाद थोड़ा बहुत काम हम लोगों से सफाई का कराया जा रहा है। यदि नीव खनाई का कार्य हम श्रमिकों से लिया जाता तो हमे कुछ दिन का रोजगार मिल जाता। ग्राम पंचायत पांड़ की महिला सरपंच के पति शिवलाल ङ्क्षसह ने चर्चा के दौरान कहा कि महिला सरपंच होने के कारण काम मे समय नहीं दे पाती है, स्टाप डेम का निर्माण वाटर सेड के इंजीनियर परिहार करवा रहे हैं।

Manoj Pandey Bureau Incharge
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