सबसे बड़े अस्पताल के माइक्रोबॉयोलॉजिस्ट व लैब टेक्निशियन कोरेाना पॉजिटिव

राजस्थान के सीकर जिले में कोरोना संक्रमण अब अस्पतालकर्मियों तक पहुंच गया है। शेखावाटी के सबसे बड़े अस्पताल एसके अस्पताल के ही दो कर्मचारियों को कोरोना ने चपेट में ले लिया है।

By: Sachin

Published: 05 Aug 2020, 08:22 AM IST

सीकर। राजस्थान के सीकर जिले में कोरोना संक्रमण अब अस्पतालकर्मियों तक पहुंच गया है। शेखावाटी के सबसे बड़े अस्पताल एसके अस्पताल के ही दो कर्मचारियों को कोरोना ने चपेट में ले लिया है। जिनमें एक माइक्रो बॉयोलॉजिस्ट तो दूसरा लैब टेक्निशियन है। एसके अस्पताल की माइक्रोबॉयोलॉजिस्ट के तो परिवार के चार सदस्य कोरोना संक्रमित मिले हैं। दोनों में संक्रमण की पुष्टि के बाद स्वास्थ्य विभाग ने उनके संपर्क में आए सभी अस्तपताल कर्मियों के सैंपल लिए हैं। जिनकी रिपोर्ट पर अब सबकी निगाहें टिकी हुई है। क्योंकि अस्पताल में रोजाना सैंकड़ों मरीजों की आवाजाही रहती है। ऐसे में यदि अस्पताल में संक्रमण ओर फैला नजर आया, तो यह स्वास्थ्य विभाग के लिए बड़ी चिंता का सबब बन सकता है।


छह महीने के बच्चे सहित 12 पॉजिटिव
सीकर में मंगलवार को छह महीने के बच्चे सहित 12 कोरोना पॉजिटिव मिले थे। बच्चा जयपुर में उपचाराधीन हुडेरा गांव का था। इसी तरह फतेहपुर कस्बे के वार्ड 20 में 60 वर्षीय बुजुर्ग और 30 वर्षीय बेटा संक्रमित मिला, तो वहीं सीकर शहर के वार्ड 33 के पुलिस कोतवाली के पास वाले क्षेत्र में 75 वर्षीय बुजुर्ग और उसकी 70 वर्षीय पत्नी, 30 वर्ष व 35 वर्षीय बेटे और एक 42 वर्षीय महिला कोरोना पॉजिटिव आई। वार्ड 35 में 31 वर्षीय शख्स, राधाकिशनपुरा क्षेत्र में रहने वाला टोंक का निवासी 25 वर्षीय युवक, सीकर शहर के वार्ड 8 के पालवास रोड क्षेत्र में 38 वर्षीय महिला, वार्ड 57 की किसान कॉलोनी क्षेत्र में 57 वर्षीय महिला की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई।

होम आइसोलेट हो तो मिले चिकित्सकों को राहत
जिले मे कोरोना के बढते केस के कारण चिकित्सकों सहित प्रशासन की सांसे फुली हुई है। इसकी बानगी है कि सांवली में 300 बैड के कोविड सेंटर में मरीज क्षमता से ज्यादा है इसके बावजूद बिना लक्षणों वाले मरीजों को होम आइसोलेशन में नहीं भेजा रहा है। जबकि सीकर जिले को छोडकर अन्य जिलो में बिना लक्षणों वाले और पात्रता के दायरे में आने वाले मरीज ही कोविड सेंटर में रखे जाते हैं। बिना लक्षणों वाले मरीजों को होम आइसोलेशन में भेज दिया जाए तो न केवल इन मरीजों को राहत मिलेगी वहीं प्रशासन भी आए दिन होने वाले विवादों से बच सकेगा। स्वास्थ्य मंत्रालय की गाइडलाइन के मरीज खुद के वचन पत्र के होम आइसोलेट हो सकता है। चिकित्सा विभाग की इसकी जांच करने के बाद स्वीकृति दे देती है। इसके बावजूद न तो चिकित्सक और न ही मरीजों को राहत की सांस मिल रही है। नतीजन आए दिन कोविड सेंटर में मरीज विरोध जता रहे हैं।

 

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