script15 thousand schools upgraded, government laggy in giving resources | प्रदेश में 9 साल में 15 हजार स्कूल क्रमोन्नत, पर संसाधन देने में सरकार फिसड्डी | Patrika News

प्रदेश में 9 साल में 15 हजार स्कूल क्रमोन्नत, पर संसाधन देने में सरकार फिसड्डी

प्रदेश में सरकार की ओर स्कूलों को क्रमोन्नत कर भले ही वाही-वाही लूटी जा रही हो लेकिन संसाधन देने में सरकार पूरी तरह फिसड्डी है।

सीकर

Published: April 04, 2022 05:05:26 pm

सीकर. प्रदेश में सरकार की ओर स्कूलों को क्रमोन्नत कर भले ही वाही-वाही लूटी जा रही हो लेकिन संसाधन देने में सरकार पूरी तरह फिसड्डी है। प्रदेश में नौ साल में सरकार की ओर से 15 हजार से अधिक स्कूलों को क्रमोन्नत किया गया। लेकिन कक्षा-कक्ष, खेल मैदान व स्टाफ का टोटा विद्यार्थियों की मुसीबत बढ़ा रहा है। कोरोनाकाल में सरकारी स्कूलों का नामांकन का आंकड़ा बढ़कर लगभग एक करोड़ तक पहुंच गया। इसके बाद भी सरकारी स्कूलों में संसाधन बढ़ाने की दिशा में सरकार का कोई एक्शन नजर नहीं आ रहा है। प्रदेश में पिछले दिनों ही सरकार ने 3828 स्कूलों को सैकण्डरी से सीनियर सैकण्डरी में क्रमोन्नत कर दिया। इनमें से कई स्कूलों की हालत यह है कि वहां फिलहाल दसवीं तक के विद्यार्थियों को ही बैठाने की जगह नहीं है। ऐसे में अगले सत्र से नई कक्षाएं शुरू होने पर विद्यार्थियों को कहां बैठाया जाएगा। कई स्कूलों के संस्था प्रधान भी सरकार की घोषणा में पूरी तरह उलझ गए। क्योंकि सरकार ने संसाधन नहीं बढ़ाए तो अगले सत्र में प्रदेश के आठ हजार से अधिक स्कूलों में पेड़ की छांव में क्लास लगना तय है।

प्रदेश में 9 साल में 15 हजार स्कूल क्रमोन्नत, पर संसाधन देने में सरकार फिसड्डी
प्रदेश में 9 साल में 15 हजार स्कूल क्रमोन्नत, पर संसाधन देने में सरकार फिसड्डी

किस वर्ष में कितने स्कूल क्रमोन्नत

वर्ष क्रमोन्नत स्कूल
2013-2014: 2850

2014-2015: 5001
2015-16: 115

2016-2017: 129
2017-2018: 317

2018-2019: 1849
2019-2020: 667

2020-21: 194
2021-2022: 3964


पांच लाख का हर साल बढ़ रहा नामांकन

प्रदेश के सरकारी स्कूलों में हर साल औसतन पांच लाख तक का नामांकन बढ़ता है। कोरोना की वजह से इस सत्र में नामांकन के पुराने सभी रेकार्ड टूट गए। इस बार नामांकन नौ लाख से अधिक बढ़ा है।

और ऐसे समझें मुसीबत
1. कक्षा-कक्ष: चाहिए 30 हजार अतिरिक्त कमरे
सरकार क ओर से तीन साल में जितने स्कूलों को क्रमोन्नत किया है उनमें छात्र संख्या के हिसाब से अब 30 हजार से अधिक अतिरिक्त कक्षा-कक्षों की आवश्यकता है। लेकिन शिक्षा विभाग के वार्षिक प्लान के हिसाब से इस साल इतने कक्षा कक्ष तैयार करने की फिलहाल कोई योजना नहीं है। ऐसे में विद्यार्थियों की मुसीबत बढऩा तय है।

2. शिक्षक: 1.50 लाख से अधिक पद खाली

प्रदेश में वर्तमान में 4.70 लाख शिक्षकों के पद होनी चाहिए। लेकिन एक लाख तृतीय श्रेणी शिक्षक, वरिष्ठ अध्यापक, व्याख्याता व प्रिसिंपल सहित अन्य पद खाली है। यदि वर्तमान नामांकन के हिसाब से बात करें तो 1.50 लाख से अधिक पद रिक्त है। सरकार की ओर से पिछले बजट में विद्या सम्बलन योजना के जरिए अस्थाई आधार पर शिक्षकों की नियुक्ति का दावा किया गया, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित नहीं हो। लेकिन ज्यादातर स्कूलों में यह योजना भी विद्यार्थियों को राहत नहीं दे सकी। वहीं भर्तियों में देरी की वजह से बेरोजगारों को काफी परेशानी हो रही है।


3. 40 फीसदी में मैदान नहीं, 60 फीसदी में संसाधनों का टोटा
प्रदेश के 40 फीसदी सरकारी स्कूलों में नामांकन के हिसाब से खेल मैदान नहीं है। वहीं 60 फीसदी स्कूलों में खेल संसाधनों का टोटा है। हालांकि सरकार ने इस कार्यकाल में एक बार खेल सामग्री के लिए बजट दिया। लेकिन इससे खिलाडिय़ों की मांग पूरी नहीं हो सकी।

आंकड़ों में बाजीगिरी नहीं, धरातल पर मिले राहत
सरकार ने पिछले 7-8 साल में काफी संख्या में स्कूल क्रमोन्नत किए हैं। लेकिन वर्ष 2016 के बाद न तो बढ़े हुए नामांकन के आधार पर पद सृजित किए हैं न ही सुविधाओं का विस्तार। अनिवार्य हिंदी और अंग्रेज़ी व्याख्याता के तो पद सृजित करना ही बंद कर दिया है। सरकार आंकड़ों की बाजीगिरी से दूर रहकर धरातल पर सुविधाओं का विस्तार करना होगा।

उपेन्द्र शर्मा प्रदेश महामंत्री, राजस्थान शिक्षक संघ (शेखावत)

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