भारत में 50 लाख लोग होंगे कोरोना संक्रमित, लैब से निकले वायरस से होगा तीसरा विश्वयुद्ध, चीन को खतरा

कोरोना वायरस के कृत्रिम व प्राकृतिक होने की बहस विश्वभर में जारी है। इसी बीच राजस्थान के सीकर जिले के लक्ष्मणगढ़ के श्रीनाथजी आश्रम के पीठाधीश्वर व आध्यात्मिक गुरू बैजनाथ महाराज ने भी वायरस के कृत्रिम होने की बात कही है। उनका कहना है कि कोरोना वायरस प्राकृतिक नहीं, बल्कि चीन की जैविक हथियार बनाने वाली लैब से अनजाने में निकला है।

By: Sachin

Published: 10 May 2020, 11:37 AM IST

सीकर. कोरोना वायरस के कृत्रिम व प्राकृतिक होने की बहस विश्वभर में जारी है। इसी बीच राजस्थान के सीकर जिले के लक्ष्मणगढ़ के श्रीनाथजी आश्रम के पीठाधीश्वर व आध्यात्मिक गुरू बैजनाथ महाराज ने भी वायरस के कृत्रिम होने की बात कही है। उनका कहना है कि कोरोना वायरस प्राकृतिक नहीं, बल्कि चीन की जैविक हथियार बनाने वाली लैब से अनजाने में निकला है। जो एक से दो साल तक अपना प्रकोप दिखाएगा। पत्रिका से विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि वायरस चेतन ओर गिरगिट की तरह रंग बदलने वाला है। भारत सरकार को भी 50 लाख लोगों के इसके चपेट में आने की आशंकाओं के आधार पर भविष्य की तैयारी करनी चाहिए। वायरस की उत्पत्ति को अध्यात्म से जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि धरती पर अनाचार, भ्रष्टाचार, अनैतिकता, नास्तिकता व हिंसा का बोझ बढ़ रहा था। ऐसे में परम सत्ता के आदेश पर मनुष्य के अहंकार को तोडऩे व धरती के बोझ को कम करने के लिए प्रकृति ने कोरोना वायरस का खेल चीन से रचा। कहा, आने वाले समय में सभी राष्ट्र एकजुट होकर चीन पर आर्थिक, राजनीतिक व सामरिक आक्रमण करेंगे। जो तीसरे विश्वयुद्ध का रूप होगा और चीन को भारी नुकसान होगा। लॉकडाउन खोलने के मुद्दे पर पीठाधीश ने कहा कि रेड जोन को छोड़ इसे आगे बढ़ाना सही नहीं है। अर्थव्यवस्था के लिए साप्ताहिक अवकाश के साथ एक समिति समय में सभी व्यवसायिक गतिविधियों को छूट देनी चाहिए। प्रदेश में आय के लिए शराब की दुकान खोलने को उन्होंने राज्य सरकार की कमजोरी व इस आय को तामसिक आय बताते हुए विरोध किया। शराब

बिक्री की बजाय दूसरे विकल्प तलाशने की बात कही।

देश की अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए उन्होंने बाहरी बड़ी कंपनियों को आमंत्रित करने के साथ आत्म निर्भरता बढ़ाने के लिए लघु उद्योगों को ज्यादा तवज्जो देना बेहतर बताया। मजदूर पलायन को अनुचित बताते हुए उन्हें रोकने के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की हिमायत की। मध्यम वर्ग को देश की रीढ़ बताते हुए उन्हें संभालना भी बेहद जरूरी बताया। परिवार व पर्यावरण के लिए साल में दो बार कम से कम दस दिन का लॉकडाउन किए जाने का पक्ष भी रखा।

देशभक्त की पहचान जरूरी

कोरोना वायरस को सांप्रदायिक चश्मे से देखने के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह समय अहंकार व मतभेद त्यागकर विश्वभूमि व वसुदेव कुटुम्बकम की संस्कृति को जीवन में उतारने का है। लेकिन, केंद्र सरकार को यह भी विश्लेषण करना चाहिए कि कौन देशभक्त है और कौन नहीं।

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