सीकर का 568 वर्ष पुराना कस्बा...जहां 12वीं पास करते ही होते जाते हैं बेघर!

फतेहपुर में सरकारी कॉलेज के अभाव में विद्यार्थियों को बाहर का रुख करना पड़ता है। जबकि यहां 76 स्कूलों से प्रतिवर्ष 5 हजार छात्र होते 12वीं पास।

By: Gaurav kanthal

Published: 01 Jul 2019, 05:43 PM IST

फतेहपुर. यू तो फतेहपुर कस्बे को जिले के सबसे पुराने व दूसरा सबसे बड़ा कस्बा होने का तमगा हासिल है। लेकिन शिक्षा में उतना ही पिछड़ा हुआ है। 568 वर्ष का फतेहपुर आज भी सरकारी कॉलेज से वंचित हैं। सरकारी कॉलेज नहीं होने से रोजाना फतेहपुर के हजारों विद्याथियों को बाहर जाना पड़ता हैं। यह हालात तब है जब दानदाता जमीन के साथ भवन बनाकर देने को तैयार हैं। उसके बाद भी सरकार की ओर से सरकारी कॉलेज की अनुमति नहीं दी जा रही हैं। राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र से विद्यार्थियों को फिर सरकारी कॉलेज की आस जगी है। अब नये चुने गए विधायक से भी उम्मीदे जगी है। सत्ता पक्ष के ही विधायक होने से लोगों को आशा है कि अबकी बार सरकारी कॉलेज मिल जायें तो विद्यार्थियों का भला हो सके। जानकारी के अनुसार फतेहपुर उपखण्ड पर हरवर्ष हजारों विद्यार्थी 12 वीं कक्षा पास करके निकलते है। फतेहपुर कस्बे में सरकारी महाविद्यालय नहीं है, इसके साथ ही विडम्बना यह भी है कि यहां पर सह शिक्षा के लिए निजी कॉलेज भी संचालित नहीं है। बालिकाओं के लिए तो तीन निजी कॉलेज संचालित है लेकिन लडक़ों के लिए महज एक कॉलेज है उसमें भी व्यवस्थाओं के अभाव में छात्र संख्या नहीं होने से लोगों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है। लडक़ों को पढ़ाई के लिए फतेहपुर से बाहर का रास्ता अपनाना पड़ता है। इससे फीस भी अधिक लगती है व आने जाने का खर्चा भी अधिक वहन करना पड़ता है। ऐसे में कई विद्यार्थियों की पढ़ाई छूट जाती है। 14 वीं विधानसभा के सत्रों में कई बार कॉलेज की मांग गूंजी थी लेकिन सरकार ने वितीय संसाधनों का अभाव बताते हुए कॉलेज खोलने की स्वीकृति नहीं जारी की। जबकि कॉलेज के लिए जमीन व भवन देने के लिए दानदाता भी तैयार है लेकिन सरकार की उदासीनता के चलते विद्यार्थियों को फायदा नहीं मिल पा रहा है। फतेहपुर उपखण्ड क्षेत्र में 78 सरकारी व गैर सरकारी सीनियर सैकण्डरी संचालित हो रही है। हर वर्ष 5000 विद्यार्थी 12 वीं पास करके निकल रहे है। इनमें से कई विद्यार्थी सीकर व रामगढ़ की सरकारी कॉलेज में प्रवेश लेने के लिए जाते है लेकिन वहां पर कम सीट होने के कारण कटऑफ अत्यधिक रहती है। इसके चलते इन विद्यार्थियों का सरकारी कॉलेज में पढऩे का सपना चकनाचूर हो जाता है।
दानदाता ने जमीन व भवन का दिया प्रस्ताव
फतेहपुर में उपखण्ड स्तर पर सरकारी कॉलेज खोलने के लिए दानदाता कई वर्षों से तैयार है। चार वर्ष पहले मोदी ट्रस्ट ने फतेहपुर में सरकारी कॉलेज के लिए नेशनल हाइवे पर जमीन व भवन बनाकर देने का प्रस्ताव राज्य सरकार को दिया था। दो वर्षों तक सरकार ने प्रस्ताव को नहीं माना लेकिन बात में प्रस्ताव मान लिया। अब सरकार वित्तीय संसाधनों का अभाव बताकर कॉलेज को स्वीकृति नहीं देने की बात कहती आ रही है।

Gaurav kanthal Desk
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