लोगों के पास छत नहीं, यहां जर्जर हो गए खाली पड़े 80 फीसदी मकान

सरकारी सिस्टम की यह तस्वीर जिम्मेदारों के लिए आईना है। चिकित्सक व नर्सिंगकर्मियों के लिए जिला अस्पताल से लेकर सीएचसी, पीएचसी तक क्वार्टर बने हुए है।

By: Sachin

Published: 12 Apr 2021, 04:15 PM IST

सीकर. सरकारी सिस्टम की यह तस्वीर जिम्मेदारों के लिए आईना है। चिकित्सक व नर्सिंगकर्मियों के लिए जिला अस्पताल से लेकर सीएचसी, पीएचसी तक क्वार्टर बने हुए है। लेकिन ज्यादातर चिकित्सकों का सरकारी आवास से मोहभंग हो गया है। एक तरफ सरकार की ओर से बेहतर चिकित्सा सुविधाओं के लिए सभी अस्पतालों में चिकित्सक व नर्सिंगकर्मियों के लिए क्वार्टर बनाए जा रहे हैं। दूसरी तरफ पहले से बने क्वार्टर सालों से बंद रहने की वजह से कबाड़ हो गए है। कई चिकित्सक आवासों में रहना भी चाहते है लेकिन चिकित्सा विभाग के पास उनकी मरम्मत के लिए पैसा नहीं है। तीन दिन पहले जिला परिषद सभागार में हुई गांवों की सरकार की बैठक में भी यह मुद्दा छाया रहा। पत्रिका टीम ने जिले के कई सरकारी अस्पतालों के आवासों की स्थिति देखी तो हाल बेहद बदतर मिले। जिलेभर में लगभग दस करोड़ से बने इन भवनों को अब मरम्मत की दरकार है।


ग्रामीण बोले, सरकारी आवासों में रहे चिकित्सक
जिले के 110 से अधिक गांव-ढाणियों के लोगों का कहना है कि चिकित्सक व नर्सिंगकर्मियों के क्वार्टर में नहीं रहने के कारण काफी परेशानी होती है। रात के समय कोई आपात केस होने की स्थिति में कस्बों की तरफ भागना पड़ता है। चिकित्सा विभाग भी इस संबंध में कई बार आदेश जारी कर चुका है।

दूसरी तस्वीर: चिकित्सक रहना चाहते है क्र्वाटर नहीं

अजीतगढ़ व कोटडी लुहारवास एवं खाटूश्यामजी सहित कई अन्य क्षेत्रों में सरकारी अस्पतालों के चिकित्सक गांव में ही रहना चाहते हैं। लेकिन कही पर्याप्त आवास नहीं है तो कही आवास जर्जर है। इस संबंध में चिकित्सकों की ओर से भी कई बार मांग की जा चुकी है। लेकिन अभी तक विभाग समस्या का समाधान नहीं करवा सका है।


बड़ी लापरवाही: सालों तक नहीं खुले ताले
जिले के चिकित्सकों के आवास के सालों तक ताले ही नहीं खुले। ऐसे में वहां छत टपकने, बारिश का पानी आने की वजह से भवन लगातार जर्जर होते रहे। लेकिन जिम्मेदारों की तरफ से कभी भी इन भवनों की ऑडिट नहीं कराई गई। ऐसे में विभाग की ओर से अब ठेकेदारों को भी गुणवत्ता के लिए नोटिस जारी नहीं किया जा सकता है।

नकारा इतने कि कोई नहीं रह सकता
चिकित्सा विभाग की वर्षो पुरानी लापरवाही की वजह से चिकित्सक आवास बेहद जर्जर हो गए है। कई आवासों को तो सार्वजनिक निर्माण भी नकारा घोषित कर चुका है। पत्रिका टीम ने इस मामले में कई चिकित्सकों से भी बातचीत की। चिकित्सकों का कहना है कि भवन पूरी तरह जर्जर है, यदि इनकी मरम्मत हो तभी चिकित्सक रह सकते हैं।

पहल: तो मरीजों को मिल सकता है तोहफा...
चिकित्सा विभाग पहल करें तो कई अस्पतालों में मरीजों को राहत दे सकता है। छोटे कस्बों में मरीजों के परिजनों के लिए धर्मशाला आदि की सुविधा नहीं है। ऐसे में चिकित्सा विभाग इन जर्जर भवनों को भामाशाहों की मदद से ठीक करवाकर मरीजों के परिजनों को राहत दी जा सकती है। कई नर्सिंगकर्मी की ओर से सालों से आवास की मांग की जा रही है।

यह है जिलेभर के अस्पतालों के हाल

पिपराली: 68 लाख से बने भवन बर्बाद होने की स्थिति में

पिपराली में दो साल पहले चिकित्सा विभाग ने लगभग 68 लाख रुपए की लागत से चिकित्सकों के लिए आवास बनवाए थे। लेकिन अभी तक ज्यादातर चिकित्सकों ने रहना शुरू नहीं किया है। ग्रामीणों का आरोप है कि ज्यादातर चिकित्सक सीकर में रहते है। इस कारण मरीजों को काफी परेशानी होती है। चिकित्सकों के इन आवास में नहीं रहने की वजह से भवन जर्जर होने की स्थिति में आ गए है।

पलसाना: सालों से खाली पड़े है आवास, अब जर्जर

गोवटी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर चिकित्सकों के लिए आवास बने हुए है। लेकिन ज्यादातर स्टाफ आवास में नहीं रहता। इस कारण मरीजों को भी चिकित्सकों का इंतजार करना पड़ता है। वर्षो से आवास के खाली होने की वजह से भवन पूरी तरह जर्जर हो गए है।

खाटूश्यामजी: भवन जर्जर, स्टाफ में भय का माहौल
खाटू नगरी के राजकीय सामुदायिक चिकित्सालय का पुराना भवन और चिकित्सकों के आवासीय भवन काफी जर्जर हो चुके है। यह कभी भी भरभरा कर गिर सकते हैं। कुछ माह पहले एक वार्ड और एक कक्ष की पट्टियां टूटने से उसमें रखा हजारों रूपए का सामान का नुकसान हो गया। आवासीय भवन नहीं होने से चिकित्सक भी यहां आना नहीं चाहते। अब श्याम मंदिर कमेटी ने 5.5 करोड़ की लागत से अस्पताल और स्टाफ के नए भवन बनाने की घोषणा की है।


थोई: अब तक कोई रहा नहीं, इसलिए भवन जर्जर

जवाहरी देवी राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बने पांच क्वार्टरों में से चार की हालत काफी जर्जर हो चुकी है। कोई भी चिकित्सक या नर्सिंगकर्मी इन जर्जर क्वार्टरों में रहने को तैयार नहीं है। क्योंकि बारिश के समय इनकी छत टपकती है तथा गिरने क े कगार पर हैं।

थोई: झाड़ली में टूट चुकी है पट्टी, कोई सुध लेने वाला नहीं
थोई कस्बे के नजदीकी गांव झाड़ली के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की हॉस्पिटल की पट्टी चुकी है। आवास भी बेहद जर्जर हो चुके है।


नीमकाथाना: आवासों को चिकित्सकों का इंतजार

कपिल अस्पताल के चिकित्सकों के लिए छावनी में बनाए गए आवास पिछले काफी दिनों से खाली पड़े हैं। यहां चल रही पीएचसी का भवन काफी पुराना होने से जर्जर हालत में है। लोगों ने बताया कि पीएचसी के लिए भवन व आवास बन जाए तो जनता को ओपीडी के बाद चिकित्सा सेवाएं मिल सके।

अजीतगढ़: 29 साल पहले बने भवन पूरी तरह जर्जर
अजीतगढ़ के बाबा नारायण दास राजकीय सामान्य चिकित्सालय में चिकित्सकों के आवास 29 साल पहले बने थे। इनकी भी मरम्मत नहीं होने के कारण बारिश का पानी आता है। इस कारण चिकित्सकों के परिवारों को काफी परेशानी होती है। अजीतगढ के सरकारी चिकित्सालय में चिकित्सकों की संख्या 17 है और आवास मात्र चार है जिस कारण अन्य चिकित्सकों को आवास करने के लिए कस्बे में किराए का कमरा लेकर आवास करना पड़ रहा है।


सिरोही: राजकीय चिकित्सालय में कर्मचारियों के कमरों की हालत जर्जर

बालूराम मेमोरियल अस्पताल उपखण्ड क्षेत्र का सबसे बड़ा अस्पताल होने के बावजूद भी अस्पताल में कर्मचारियों के लिए बनाए गए कमरों की हालत कई वर्षों से खराब है । कमरों की हालत जर्जर होने के कारण कर्मचारियों का रहने के लिए कमरे नहीं है जबकि क्षेत्र का यह अस्पताल सबसे बड़ा अस्पताल है। अस्पताल में रोजाना आसपास के सैकड़ों मरीज अपना इलाज करवाने के लिए आते हैं। अस्पताल की ओपीडी रोजाना 200 से 300 तक की रहती है।

धोद: दस साल में कोई नहीं रहा
सीएचसी में 40 साल पहले चिकित्सको के लिए बने क्वार्टर अब जर्जर हालात में हो गए है। इन क्वार्टरों की छतों की हालात बेहद खराब है। छतों से प्लास्टर गिरने के बाद सरिए भी दिखने लग गए है। जर्जर कमरो मे पिछले दस साल से कोई स्टाफ भी नही रह रहा। आवासों का पिछले दिनों पीडब्ल्यूडी विभाग के अधिकारियों ने नही रहने योग्य घोषित कर दिया।

प्रीतमपुरी:
स्वास्थ्य केंद्र के लिए स्वयं का कोई भवन नहीं है। यह धर्मशाला में संचालित हो रहा है। स्टाफ के लिए भी कोई क्वार्टर नहीं है।

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