डेंगू पसार रहा पांव, प्रशासन के पुराने इंतजाम

डेंगू पसार रहा पांव, प्रशासन के पुराने इंतजाम

Vinod Singh Chouhan | Publish: Oct, 13 2018 07:11:45 PM (IST) | Updated: Oct, 13 2018 07:11:46 PM (IST) Sikar, Rajasthan, India

सीकर. शहर में डेंगू बीमारी के पूरी तरह पैर पसार लिए है लेकिन नगर निकाय और चिकित्सा विभाग अभी भी गहरी नींद में सोए हैं।

 

सीकर. शहर में डेंगू बीमारी के पूरी तरह पैर पसार लिए है लेकिन नगर निकाय और चिकित्सा विभाग अभी भी गहरी नींद में सोए हैं। इसकी बानगी है डेंगू मच्छर ने अपना स्टेन बदल लिया है लेकिन जिम्मेदार अभी भी पुराने तरीके से फोगिंग में महज पाइरेथ्रियम का ही इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे न तो मच्छर मर रहा है और न ही बीमारी नियंत्रण में आ रही है। रही सही कसर चिकित्सा विभाग की ओर से ग्रामीण अंचल में सक्रिय झोलाछापों पर निगाह नहीं रखने से हो रही है। पिछले एक सप्ताह से मरीज के साथ होने वाली लूट खसोट के कई मामले सामने आ चुके लेकिन विभाग ने इस ओर ध्यान तक नहीं दिया है। एेसे में महज प्लेटलेटस में कमी आने के नाम पर मरीजों की सेहत के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। पिछले २४ घंटे में शहर के निजी और सरकारी अस्पताल के आंकडों को देखा जाए तो ३ नए मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई।

३३ जगह चिन्हित, नालियों में बह रहा ताजा पानी

जिले में करीब ३३ जगह एेसी है जहां ताजा पानी बहता रहता है। इसमें से १२ जगह सीकर शहर और २१ जगह जिले के विभिन्न इलाकों में है। डेंगू को लेकर डब्ल्यूएचओ की गाइड के अनुसार डेंगू का मच्छर साफ पानी के साथ उस गंदे पानी में पनप सकता है जहां किसी भी रुप से ताजा बहता है। शहर में अधिकांश जगह गंदे पानी की नालियों से होकर पानी की पाइप लाइन गुजरती है। जिनमें लीकेज के कारण साफ पानी भी बहता रहता है। इसके अलावा सड़क निर्माण के दौरान क्षतिग्रस्त पाइप लाइनों को नालियों में दबा दिया गया। जिससे साफ पानी नालियों में बहता रहता है।


जिन पर जिम्मा वे भी खामोश
नगर परिषद जिम्मेदार की ओर से न तो नालियों की नियमित रूप से सफाई कराई जाती है। चिकित्सा विभाग ने नगर परिषद को फोगिंग का तो जिम्मा दे दिया लेकिन फोगिंग करने वाले कर्मचारियों के प्रशिक्षित नही होने के कारण भी परेशानी आती है। इधर जिले में निजी स्तर पर एक भी एलाइजा टेस्ट नहीं किया जा रहा है। डेंगू के फैलते दायरे को देखते हुए चिकित्सा विभाग की टीम दिन में वार्डोंे के चक्कर लगाती रही। फौरी तौर पर सर्वे कर एंटीमॉलोजिकल कार्रवाई भी गई। कल्याण अस्पताल के चिकित्सक डॉ. रघुनाथ चौधरी ने बताया कि खून में प्लेटलेट्स कम होते ही घबराने की जरूरत नहीं है। जरूरी नहीं है कि आपको डेंगू ही हो, प्लेट्लेट्स वायरल बुखार में भी प्लेटलेट्स कम होती है।

यूं चलती है लूट खसोट
साधारण सर्दी जुकाम होते ही मरीज खून की जांच के लिए लैब में जाता है। जहां अप्रशिक्षित लोग कार्ड टेस्ट के जरिए महज १५० रुपए में जांच कर देते हैं। जैसे ही प्लेटलेट्स की संख्या में कमी आती है संबंधित को डेंगू पॉजीटिव बता दिया जाता है। इसके बाद मरीज को लेकर निजी अस्पताल में भर्ती कर दिया जाता है और मरीज के परिजन से एक यूनिट ब्लड लेकर उसमें से ब्लड कम्पोनेंट अलग-अलग कर लेते हैं। महज एक यूनिट के जरिए इन कम्पोनेंट को अलग-अलग चार मरीजों को देकर हजारों रुपए वसूले जाते हैं। इसके बाद भी स्थिति कंट्रोल नहीं होती है तो मरीज को सरकारी अस्पताल में रैफर कर दिया जाता है।

इनका कहना है
डेंगू मच्छर के नियंत्रण के लिए शहर में एक साथ सात फोगिंग मशीन लगाई है। टीम लगातार शहर में संदिग्ध मरीजों की जांच करवा रही है। फोगिंग खराब होने जैसी कोई बात नहीं है।

- डॉ. सीपी ओला, डिप्टी सीएमएचओ

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