दस साल की सियासत के बाद राजस्थान की इस मेडिकल कॉलेज में भी इस साल शुरू होगा प्रवेश

सीकर. कोरोना काल में शिक्षानगरी के लिए राहत भरी खुशखबर है। दस साल की सियासत के बाद आखिरकार सांवली में बने सीकर मेडिकल कॉलेज को नेशनल मेडिकल काउंसिल ने मंगलवार को हरी झंडी दिखा दी।

By: Sachin

Published: 28 Oct 2020, 10:07 AM IST

सीकर. कोरोना काल में शिक्षानगरी के लिए राहत भरी खुशखबर है। दस साल की सियासत के बाद आखिरकार सांवली में बने सीकर मेडिकल कॉलेज को नेशनल मेडिकल काउंसिल ने मंगलवार को हरी झंडी दिखा दी। नवम्बर माह में होने वाली काउंलिंग में सीकर मेडिकल कॉलेज को बतौर च्वाइस लिया जा सकेगा। यह सबकुछ हमारे मेडिकल कॉलेज के प्रिंसीपल और उनकी टीम ने महज एक वर्ष में कर दिखाया है। खुशी की बात है कि बुधवार से सीकर मेडिकल कॉलेज का नाम काउंसलिंग की लिस्ट में शामिल हो गया है और शेखावाटी के होनहारों को अब मेडिकल कॉलेज के लिए किसी दूसरे मेडिकल कॉलेज में नहीं जाना पडेगा। सीकर मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की 100 सीट के बैच शुरू होंगे।


मेडिकल कॉलेज शुरू करवाने में इनकी भूमिका अहम

प्रिंसीपल: डा. केके वर्मा ने 2019-20 में बतौर प्रिंसीपल ड्यूटी ज्वाइन की। इस दौरान सावंली मेडिकल कॉलेज के लिए सात बार निरीक्षण हो चुका था लेकिन जिम्मेदारों की अनदेखी के कारण बजट तक नहीं मिला। ऐसे में मेडिकल कॉलेज की स्वीकृति मिलना तो दूर खामियों को ही पूरा नहीं किया जा सका। प्रिंसीपल ने ड्यूटी ज्वाइन करने के बाद शुरूआत में जिला अस्पताल की खामियों को भामाशाहों के सहयोग से पूरा किया। इसके बाद प्रिंसीपल ने मेडिकल कॉलेज परिसर में ही ऑफिस खोला और स्टॉफ को वहीं शिफ्ट कर दिया। साथ ही लगातार मॉनिटरिंग की तो ठेकेदारों ने काम को तय समय पर पूरा कर दिया। पिछले दिनो राष्ट्रीय टीम ने कॉलेज के निर्माण को सही मानते हुए अक्टूबर में ही लेटर ऑफ परमिशन जारी कर दी।


नोडल अधिकारी डा महेन्द्र खीचड

मेडिकल कॉलेज के नोडल अधिकारी डा महेन्द्र खीचड ने ड्यूटी ज्वाइन करने के बाद सबसे पहले तो मेडिकल कॉलेज का नियमित रूप से निरीक्षण शुरू किया और रोजाना काम के लिए ठेकेदारों को लक्ष्य दिए और उसकी प्रगति की जानकारी ली और बाधाएं आने पर जयपुर और सीकर के बीच बतौर समन्वयक भूमिका निभाई। यही नहीं इस दौरान उन्होंने कोरोना डेडीकेटेड कोविड अस्पताल का काम भी संभाला।

नाथूराम ढाका: एकाउंटेंट
नाथूराम ढाका ने मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल के अधीन होने वाले कार्य के लिए लगातार मुख्यालय से संपर्क रखा। मेडिकल कॉलेज के अधीन जिला अस्पताल के पट्टे से लेकर लैब उपकरण सहित अन्य खामियों को पूरा करने के लिए बजट से लेकर मशीन मंगवाने की जिम्मेदारी संभाली और इन सब से तारतम्य रखते हुए निरीक्षण से पहले काम पूरा करवाया और आखिरकार स्वीकृति मिलने तक अहम भूमिका निभाई।


ऐसे सियासत में उलझे पेंच लेकिन नहीं सीकर नहीं हारा हिम्मत

कांग्रेस: पिछली गहलोत सरकार में सबसे पहले घोषणा
गहलोत सरकार के पिछले कार्यकाल में कांग्रेस ने सीकर में पीपीपी मोड पर मेडिकल कॉलेज खोलने की घोषणा की थी। इसके बाद प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हो गया। इस दौरान मेडिकल कॉलेज एक बार अटक गया। इस पर कांग्रेस ने मेडिकल कॉलेज को चूरू शिफ्ट करने के भी आरोप लगाए। वर्ष 2018 में कांग्रेस के फिर सत्ता में आने पर मेडिकल कॉलेज को चुनावी मुद्दा बनाया। लोकसभा व विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने मेडिकल कॉलेज को एक साल में खोलने का वादा किया।


भाजपा: सांसद ने लिखा पत्र तो पीएम ने की घोषणा
पिछली भाजपा सरकार के समय सांसद सुमेधानंद सरस्वती ने प्रधानमंत्री को सीकर मेडिकल कॉलेज को लेकर पत्र लिखा। इस पर पीएम ने सीकर मेडिकल कॉलेज को मंजूरी दी। इसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे ने बजट में सीकर मेडिकल कॉलेज की घोषणा की। इसके बाद दो चरणों में बजट भी जारी हुआ। लेकिन आचार संहिता की वजह से भाजपा मेडिकल कॉलेज को मंजूरी नहीं दिला सकी।

हमारे प्रयास से खुला मेडिकल कॉलेज: सासंद
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से पिछले कार्यकाल में हुई एक मुलाकात के दौरान ही तय हो गया था कि सीकर में भाजपा मेडिकल कॉलेज खोलकर रहेगी। भाजपा राज में स्वीकृत ज्यादातर पैसा मेडिकल कॉलेज में लगा है। पिछले दिनों केन्द्रीय मंत्री ने इसी सत्र से मेडिकल कॉलेज को शुरू कराने की बात कही थी। मंगलवार को एनएमसी ने इस संबंध में पत्र भी जारी कर दिया।

सुमेधानंद सरस्वती, सांसद, सीकर

विधानसभा चुनाव में हमारी सरकार ने सीकर में मेडिकल कॉलेज खोलने का वादा किया था। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत लगातार सीकर मेडिकल कॉलेज को लेकर प्रयासरत थे। पिछले दिनों कांग्रेस सरकार की पहल पर ही मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण हो सका। अब सीकर मेडिकल कॉलेज को अनुमति मिलने से यहां के युवाओं को फायदा मिल सकेगा।
गोविन्द सिंह डोटासरा, शिक्षा मंत्री

मजबूत होगी अर्थव्यवस्था, सुधरेगी सेहत
सीकर मेडिकल कॉलेज की स्वीकृति से शिक्षानगरी की अर्थव्यवस्था और बेहतर होगी। अब तक सीकर शहर के पिपराली रोड और नवलगढ़ रोड पर विद्यार्थियों की वजह से सबसे ज्यादा चहलकदमी थी। लेकिन मेडिकल कॉलेज की स्वीकृति से अब सांवली रोड को संजीवनी मिलेगी। मेडिकल कॉलेज शुरू होने से कई नए विभाग शुरू होंगे। ऐसे में यहां के मरीजों को अब उपचार के लिए दूसरे शहरों में नहीं जाना पड़ेगा। शिक्षानगरी वैसे भी चूरू, झुंझुनंू, हनुमानगढ़, नागौर, बीकानेर व श्रीगंगागनर जिलों का जक्शन है। ऐसे में यहां आने वाले मरीजों की संख्या और बढ़ेगी, जिसका फायदा सरकारी के साथ निजी अस्पतालों को भी मिलेगी। शिक्षानगरी से हर साल सैकड़ों विद्यार्थी डॉक्टरी में चयनित होते है। इनको अच्छी रैंक होने के बाद भी दूर मेडिकल कॉलेज मिलता है। फिलहाल यहां मेडिकल कॉलेज होने से हमारे होनहारों का डॉक्टर बनने का सपना और मजबूत होगा। वहीं डॉक्टरी की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थियों से एक प्रेरणा भी मिलती रहेगी। ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को मेडिकल कॉलेज का सीधे तौर पर फायदा मिलेगा।
डॉ. सपना कस्वां, सीकर

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