160 साल बाद लीप ईयर व अधिकमास साथ, श्राद्ध व नवरात्रि में एक महीने का होगा अंतर, गुरु बढ़ाएगा परेशानी

देवशयनी एकादशी के साथ ही चातुर्मास का आगाज बुधवार से हो गया। पुराणों के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं और चार महीनों बाद जागते हैं।

By: Sachin

Published: 01 Jul 2020, 11:49 AM IST

सीकर. देवशयनी एकादशी के साथ ही चातुर्मास का आगाज बुधवार से हो गया। पुराणों के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं और चार महीनों बाद जागते हैं। इसलिए इस दिन से चातुर्मास शुरू हो जाता है। लेकिन, इस बाद अधिकमास की वजह से देवता चार की जगह पांच महीने सोयेंगे। पंडित दिनेश मिश्रा के अनुसार इस दौरान शादी, गृह प्रवेश और अन्य बड़े मांगलिक काम नहीं किए जा सकेंगे। 148 दिन बाद यानी 25 नवंबर के बाद ही मांगलिक कार्यों की शुरुआत होगी। देव शयनी एकादशी पर बुधवार को मंदिरों में कई धार्मिक आयोजन भी हो रहे हैं। ठाकुर जी को आम, चीनी, खरबूजे का भोग लगाया जा रहा है।

 

श्राद्ध खत्म होते ही नहीं आयेगी नवरात्रि


पंडित नंदकिशोर नांगलका जोशी ने बताया कि अधिकमास आने से चातुर्मास चार के बजाय पांच माह का होगा। इसके चलते श्राद्ध पक्ष के बाद आने वाले सभी त्योहार 20-25 दिन विलंब से आएंगेे। इस बार दो आश्विन मास होंगे। इस महीने में श्राद्ध और नवरात्रि, दशहरा जैसे त्योहार आते हैं। आमतौर पर श्राद्ध खत्म होते ही अगले दिन से नवरात्रि आरंभ हो जाती है लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा और श्राद्ध समाप्त होने के एक माह बाद नवरात्र शुरू होंगे। उन्होंने बताया कि 17 सितंबर को श्राद्ध खत्म होंगे और अगले दिन से अधिकमास शुरू हो जाएगा। 17 अक्टूबर से नवरात्र आरंभ होंगे। इस तरह श्राद्ध और नवरात्र के बीच इस साल एक महीने का अंतर रहेगा।


14 नवंबर की दिवाली, दो महीने 9 मुहूर्त


अधिकमास के चलते इस बाद दशहरा 26 अक्टूबर को और दीपावली 14 नवंबर को मनाई जाएगी। 25 नवंबर को देवउठनी एकादशी रहेगी और इस दिन चातुर्मास भी समाप्त होगा। देवउठनी एकादशी से ही मांगलिक कार्य शुरू होंगे। इस साल नवंबर में 26 और 27 तारीख को ही मुहूर्त रहेंगे। जबकि दिसंबर में केवल 1 से 11 तक सात दिन ही मुहूर्त रहेंगे।

 

लीप ईयर व अधिक मास एक साल में


इस साल अंग्रेजी कैलेंडर का लीप ईयर और आश्विन के अधिकमास का योग 160 साल बाद बन रहा है। इससे पहले 1860 में ऐसा अधिकमास आया था, जब उसी साल लीप ईयर भी था। इसी तरह 19 साल बाद आश्विन माह का अधिकमास आया था। इससे पहले 2001 में अश्विन अधिकमास आया था। इसके बाद फिर 19 साल बाद यानि 2039 में अश्विन अधिकमास का संयोग बनेगा।

 

गुरु ने बदली चाल, बढ़ेगी परेशानी


मंगलवार सुबह गुरु मकर से धनु राशि में प्रवेश कर गया। इस समय गुरु वक्री है। इस वजह से यह मकर से पीछे वाली धनु राशि में प्रवेश कर रहा है। गुरु 20 नवंबर तक धनु राशि में ही रहेगा। 13 सितंबर को ये वक्री से मार्गी होगा। गुरु की स्थिति बदलने से कुछ लोगों के लिए दैनिक जीवन में परेशानियां बढ़ सकती हैं।

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