उधार के भवन से कृषि विस्तार!

मूंडरू में सहायक कृषि अधिकारी को बैठने के लिए भवन नहीं है।

By: Gaurav kanthal

Published: 23 Jun 2019, 06:12 PM IST

मूंडरू. एक तरफ सरकार आम आदमी तक जनकल्याणकारी योजनाएं पहुंचाने का दावा करती है। वहीं पर्याप्त संसाधनों के अभाव में सरकारों के दावे खोखले नजर आते हैं। इसका एक उदाहरण मूंडरू ब्लॉक में देखने को मिल रहा है। यहां मूंडरू ब्लॉक स्तर पर सात साल पहले सहायक कृषि अधिकारी का पद स्वीकृत किया था। सरकार ने सहायक कृषि अधिकारी का पद तो स्वीकृत कर दिया लेकिन उनके बैठने का कार्यालय भवन आज तक नहीं बना। इतना ही नहीं सरकार ने भवन के लिए आज तक जमीन व राशि का आवंटन भी नहीं किया। ऐसे में सहायक कृषि अधिकारी कार्यालय का भवन नहीं होने से, उन्हें कृषि पर्यवेक्षक कार्यालय की शरण लेनी पड़ रही है। सहायक कृषि अधिकारी को कृषि पर्यवेक्षक भवन में बैठकर कामकाज संपादित करने पड़ रहे हैं। यहां जून 2015 में किसान सेवा केंद्र सह नॉलेज सेंटर बना था, लेकिन वो भी चार साल से उद्घाटन का इंतजार कर रहा है।
2011 से स्वीकृत सहायक कृषि अधिकारी का पद
मूंडरू में वर्ष 2011 में सहायक कृषि अधिकारी का पद स्वीकृत हुआ था। पद स्वीकृत होने के बाद यहां अधिकारियों की नियुक्ति भी हो गई थी। लेकिन उनके बैठने के लिए आज तक भवन नहीं बना। भवन के लिए ना ही तो आज तक जमीन का आवंटन हुआ और न ही किसी प्रकार की राशि स्वीकृत हुई। मूंडरू सहायक कृषि अधिकारी कार्यालय के अधीन मूंडरू, नांगल, फूटाला, नाथूसर, बागरियावास व आसपुरा सहित छह कृषि पर्यवेक्षक कार्यालय आते हैं। जिनका संपूर्ण कार्य सहायक कृषि अधिकारी की देखरेख में होता है। भवन के अभाव में रिकॉर्ड संधारण व संसाधन जुटाने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। मूंडरू सहायक कृषि अधिकारी को उद्घाटन के इंतजार में पड़े कृषि पर्यवेक्षक के भवन में बैठकर कामकाज करने पड़ते है। ऐसे में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
छह में से केवल एक जगह
मूंडरू ब्लॉक के अधीन छह कृषि पर्यवेक्षक क्षेत्र आते हैं। नियमानुसार प्रत्येक कृषि पर्यवेक्षक के बैठने के लिए एक किसान सेवा केंद्र सहविलेज नॉलेज सेंटर होना आवश्यक है। सरकार की उदासीनता के चलते नांगल, फूटाला, नाथूसर, बागरियावास व आसपुरा ग्राम पंचायतों में किसान सेवा केंद्र सह विलेज नॉलेज सेंटर नहीं बन सके। मूंडरू में जून 2015 में किसान सेवा केंद्र सहविलेज नॉलेज सेंटर का भवन तो बना, लेकिन आज तक उसका उद्घाटन नहीं हो सका । कृषि अधिकारियों का कहना है कि उनके पास भवन नहीं होने से किसानों को समय समय पर दिये जाने वाले प्रशिक्षण, कृषि से संबंधित नवाचारों की जानकारी, फव्वारा, पाइप लाइन की सब्सिडी फाइलें सेंक्शन करने, कृषि यंत्र रखने सहित खाद व बीजों के रखरखाव में परेशानी होती है।

Gaurav kanthal Desk
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