जाने कैसे गेंहू दे रहा बच्चो को बीमारी, बच्चो में बढ़ रही गेहूं से एलर्जी

फैल रही सिलियक बीमारी

ताउम्र रहती है एलर्जी, कुपोषण और विकास रूक जाता है

सीकर. शरीर के पोषण में अहम गेंहू से एलर्जी।सीकर. शरीर के पोषण में अहम भागीदार गेहूं के खाने पर रोक। सुनने में ही अजीब सा लगता है लेकिन हकीकत है कि गेहूं से एलर्जी के कारण सिलियक रोग तेजी से बढ़ता जा रहा है। अस्पतालों में आने वाले पीडित बच्चों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। शिशु रोग विशेषज्ञों के पास रोजाना औसतन दस से ज्यादा मरीज एलर्जी के सामने आ रहे हैं। मीठे जहर की तरह फैलने वाली इस बीमारी के बढऩे की गति इतनी धीमी है कि सालों तक इस बीमारी का पता नहीं चल पाता है। सिलिएक बीमारी के कारण पीडि़त एनीमिया, रिकेट्स, ओस्टोपोरोसिस, कद का छोटा होना या शरीर का कमजोर होना है। इस रोग के लक्षणों के कारण अक्सर चिकित्सक भी आसानी से इसे नहीं पकड़ पाते हैं। गौरतलब है कि ओपीडी से जुटाए आंकड़ों के अनुसार वर्ष 28 दिसम्बर 2019 तक कल्याण अस्पताल और नेहरू पार्क स्थित जनाना अस्पताल में 156 बच्चे सीलिएक रोग से पीडित पहुंचे। जिले के सरकारी अस्पतालों में निशुल्क नहीं है। ऐसे में मजबूरी में परिजनों को निजी लैब में जाकर जांच करवानी पड़ती है।

सालों तक कारण नहीं पता चलता

चिकित्सकों के अनुसार गेहूं से एलर्जी की जांच खून और बॉयोप्सी से ही होती है। उल्टी दस्त जैसे सामान्य लक्षणों के कारण चिकित्सक शुरूआत में बॉयोप्सी जांच नहीं लिखते है। नतीजन बच्चे का विकास पूरी तरह रुक जाता है। ग्लूटेन की एलर्जी आंत को प्रभावित करती है और रोग के लंबे समय तक जारी रहने पर आंतों के कैंसर और लिंफ ोमा यानी प्रतिरोध प्रणाली के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।

यह है विकल्प

गेहूं में ग्लूटेन होने के कारण एलर्जी होती है और चिकित्सक मक्का, बाजरा, चावल, ज्वार, सभी प्रकार की दाल, दूध या दूध से बने पदार्थ की रोगी का भोजन बन जाते हैं। हालांकि बाजार में ग्लूटेन फ्री खाद्य उत्पाद भी आते हैं। चिकित्सकों ने बताया कि इस बीमारी का एकमात्र इलाज महज ग्लूटेन फ्री खाना ही है। कई आटा चक्कियों पर परिजन मिश्रित आटे को लेकर जाते हैं।

तेजी से बढ़ रहा रोग

पिछले एक साल में गेहूं से एलर्जी के कारण बच्चों में सिलिएक रोग तेजी से बढ़ रहा है। कल्याण अस्पताल और सरकारी जनाना अस्पताल के आउटडोर में इस प्रकार के मरीजों की संख्या बढ़ी है। ऐसे पीडि़त बच्चो को ताउम्र ही ग्लूटेन से रहित पदार्थ का सेवन करना पड़ता है।

मदन सिंह फगेडिय़ा, शिशु रोग विशेषज्ञ

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