अधिकारियों ने पढ़ाई की फर्जी डिग्री लगाकर सहकारी बैंक को लगाई लाखों की चपत, अब होगी वसूली

अधिकारियों ने पढ़ाई की फर्जी डिग्री लगाकर सहकारी बैंक को लगाई लाखों की चपत, अब होगी वसूली

Naveen Parmuwal | Publish: Jun, 15 2019 05:34:30 PM (IST) Sikar, Sikar, Rajasthan, India

सीकर केन्द्रीय सहकारी बैंक में वेतन वृद्धि के लिए फर्जी डिग्री के मामले में जांच पूरी हो गई है।

सीकर.

सीकर केन्द्रीय सहकारी बैंक में वेतन वृद्धि के लिए फर्जी डिग्री के मामले में जांच पूरी हो गई है। रजिस्ट्रार नीरज के पवन ने जांच में पांच डिग्री को फर्जी माना और वसूली के आदेश दिए हैं। वसूली की प्रक्रिया के लिए सहकारी बैंक के एमडी को निर्देश दिए गए हैं। कम्प्यूटर प्रोग्रामर रविन्द्र गुप्ता की डिग्री को सही माना। जबकि बैंक के वरिष्ठ प्रबंधक मनोज बांगडवा, वरिष्ठ प्रबंधक राजीव लोचन शर्मा, वरिष्ठ प्रबंधक मुकेश निठारवाल, वरिष्ठ प्रबंधक महेश यादव, बैंकिंग सहायक नरेश माठ की डिग्री को फर्जी मानते हुए वसूली के आदेश दिए हैं। गौरतलब है कि सीकर केन्द्रीय सहकारी बैंक के छह अधिकारी और कर्मचारियों ने वेतन वृद्धि के लिए एमएससी-एमटेक की फर्जी डिग्री लगाकर पांच साल में 18 लाख रुपए उठाए हैं।


इसलिए माना फर्जी
अधिकारियों जिस यूनिवर्सिटी की डिग्री लगाई गई, वह एमएससी में इनफोरमेशन टेक्नॉलोजी की है। सभी ने एमएससी साल 2013 में करना बताया गया है। इन डिग्रियों को देखने पर पता चलता है कि इनमें सब्जेक्ट के नाम ही अलग-अलग जगह अलग-अलग लिखा गया है। बैंक ने जब यूजीसी से जानकारी ली तो पता चला कि इस यूनिवर्सिटी को दुरस्थ शिक्षा से यह डिग्री देने की अनुमति ही नहीं है। बैंक ने इन डिग्रियां को फर्जी माना है। हालांकि कम्प्यूटर प्रोग्रामर की डिग्री को यूनिवर्सिटी ने डिग्री को सही माना लेकिन बैंक ने इसलिए फर्जी माना कि नौकरी में रहते हुए कैसे रेग्यूलर डिग्री हासिल की जा सकती है।


इन्होंने लगाई फर्जी डिग्री
सीकर केंद्रीय सहकारी बैंक के चार बैंक अधिकारियों, एक बैंकिंग सहायक व एक कम्प्यूटर प्रोग्रामर ने वेतनवृद्धि के लिए फर्जी डिग्री पेश कर दी। बैंक के वरिष्ठ प्रबंधक मनोज बांगडवा, वरिष्ठ प्रबंधक राजीव लोचन शर्मा, वरिष्ठ प्रबंधक मुकेश निठारवाल, वरिष्ठ प्रबंधक महेश यादव ने पंजाब टेक्निकल यूनिवर्सिटी जालंधर से दूरस्थ शिक्षा में मास्टर ऑफ साइंस इंफॉर्मेशन एंड टेक्नोलॉजी (एमएससी) और बैंकिंग सहायक नरेश माठ ने कर्नाटक ऑपन स्टेट यूनिवर्सिटी मैसूर से दूरस्थ शिक्षा में मास्टर ऑफ साइंस इंफॉर्मेशन एंड टेक्नोलॉजी (एमएससी) की डिग्री लगाई। जबकि कम्प्यूटर प्रोग्रामर रविन्द्र गुप्ता ने जगन्नाथ यूनिवर्सिटी जयपुर की रेग्यूलर डिग्री लगाई थी।


फर्जी डिग्री प्रकरण में जांच रिपोर्ट रजिस्ट्रार को सौंप दी है। जहां से फिलहाल दिशा निर्देश नहीं मिले हैं। आदेश मिलने के बाद ही किसी प्रकार की कार्रवाई की जाएगी। -बीएल मीणा, एमडी सीकर केन्द्रीय सहकारी बैंक

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