भामाशाहों ने अदा किया मातृभूमि का कर्ज, देखें किस तरह

करोड़ों खर्च कर बदल रहे हैं सरकारी स्कूलों की तस्वीर

By: Vinod Chauhan

Published: 02 Mar 2019, 05:57 PM IST

रामगढ़ शेखावाटी. मन चंगा तो कठौती में गंगा.. । इसी सोच को लेकर इलाके के भामाशाह शिक्षा पर करोड़ों रुपए खर्च कर रहे है। हम बात कर रहे है रोलसाहबसर इलाके के गांव ढांढ़ण की जहां दानादाता ने शिक्षा पर करोड़ों खर्च कर सरकारी स्कूल की तस्वीर बदल दी है। यहां के दानादाताओं के सहयोग से ही पिछले वर्ष इस गांव में राष्ट्रीय वॉलीबाल प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। इस गांव के दानदाताओं ने रोलसाहबसर में भी सरकारी स्कूल में अपना सहयोग दिया है।
दो करोड़ की लागत से बनाया मिडिल स्कूल
मुबंई प्रवासी उद्योगपति ने जब अपने गांव ढांढण की मिडिल स्कूल को जीर्ण अवस्था में देखकर गांव में आधुनिक सुविद्याओं से युक्त सरकारी स्कूल बनाने का निर्णय लिया। करीब दो करोड़ की लागत से तारादेवी रामेश्वरलाल बजाज ट्रस्ट के सहयोग से गांव के बस स्टैंण्ड के नजदीक आधुनिक मॉडल स्कूल तर्ज पर विद्यालय भवन बना दिया। स्कूल का भवन देखकर देखकर आम आदमी की सरकारी स्कूल के प्रति बनी सोच ही बदल जाती है। भवन के साथ ही स्कूल प्रागण में बच्चों के खेलने के लिए झूले भी लगाए गए है।
तीन करोड़ की लागत से बन रहा है छात्रावास
सात वर्षो तक लगातार शत प्रतिशत परिणाम देने वाले इस सरकारी स्कूल में ग्रीष्मअवकाश में कक्षाएं लगने के कारण प्रदेश के दूर दराज के जिलों से भी यहां विद्यार्थी अध्ययन के लिए आते है। इसी को मध्यनजर रखते हुए गांव ढांढ़ण वेलफेयर सोसायटी ने स्कूल के पुराने हो चुके छात्रावास को नया बनाने का संकल्प लिया है। पुराने छात्रावास के पास ही करीब तीन करोड़ की लागत से तीन मंजिला आधुनिक छात्रावास का निर्माण किया जा रहा है। पूर्व में केवल छात्रों के लिए ही छात्रावास की सुविद्या थी लेकिन अब यहां छात्राओं के लिए भी दो मंजिला छात्रावास का निर्माण किया जा रहा है।
मिसाल बन चुका है ढांढ़ण का सरकारी स्कूल
ढांढ़ण का सरकारी स्कूल शिक्षा विभाग के लिए रोल मॉडल बन चुका है। इलाके में निजी स्कूलों का मात देने वाला यह सरकारी स्कूल रात्रि कालीन एवं ग्रीष्मकालीन अवकाश में अध्ययन कराने के कारण प्रदेश में चर्चित रह चुका है। सरकारी स्कूल में छात्रावास की सुविधा देने वाला एकमात्र विद्यालय है। लगातार 100 प्रतिशत परिणाम देने के कारण यहां के ग्रामीणों ने प्रिंसीपल को कार भेंट की थी। यहां के ग्रामीण शिक्षकों की कमी होने पर गांव के सहयोग से भी शिक्षक लगा लेते है।
कई जिलों के छात्र पढऩे आते हैं
इस सरकारी स्कूल में प्रदेश में अच्छा परिणाम देने वाले इस सरकारी स्कूल में छात्रावास की व्यवस्था होने के कारण दूर-दराज के जिलों से भी छात्र यहां पढने के लिए आते है। इस स्कूल में सीकर के अलावा चुरु, झुंझुनू, अलवर, बीकानेर, जयपुर तक के छात्र पढऩे के लिए यहां आते है। छात्रावास पुराना हो जाने के कारण ही उसी स्थान पर आध्ुानिक सुविद्याओं से युक्त नवीन तीन मंजिला छात्रावास का निर्माण किया जा रहा है।

Vinod Chauhan
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