लापरवाही: किट में पैक महिला के शव को चुंदरी ओढ़ाकर लाए, सामान्य की तरह कर दिया अंतिम संस्कार

कोरोना संक्रमण को लेकर शादी-विवाह और चुनाव प्रचार के साथ अंतिम संस्कार में भी लापरवाही बरती जा रही है।

By: Sachin

Published: 27 Nov 2020, 01:49 PM IST

सीकर. कोरोना संक्रमण को लेकर शादी-विवाह और चुनाव प्रचार के साथ अंतिम संस्कार में भी लापरवाही बरती जा रही है। शहर के शिवधाम धर्माणा श्मशान घाट में गुरुवार को बिना सुरक्षा संसाधनों के ही सांवली कोविड सेंटर से किट में पैक होकर आए महिला के शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस दौरान श्मशान घाट में करीब चार सौ लोगों की भीड़ थी। किट में पैक शव का अंतिम संस्कार सामान्य शव की तरह करने की जानकारी मिलने पर वहां उपस्थित लोग एक बारगी दहशत में आ गए। श्मशान घाट के संचालकों ने इसकी सूचना जिम्मेदार अधिकारी को देने के लिए फोन किए, लेकिन वहां भी गंभीरता नहीं दिखाई दी। ऐसे में जाहिर है कि शादी-समारोह और अंतिम संस्कार के दौरान कोरोना गाइड लाइन की पालना करवाने का प्रशासन का दावा खोखला है। चिकित्सा विभाग ने भी महिला को कोरोना संदिग्ध माना है।

रात भर घर में रखा शव, सुबह निभाई परंपरा

शहर की निवासी महिला की बुधवार रात सांवली कोविड सेंटर में मौत हो गई थी। सूत्रों के अनुसार वहां पर कोरोना संदिग्ध मानते हुए शव को बॉडी किट में पैक कर परिजनों को सौंप दिया गया। परिजन रात को शव लेकर घर आ गए। गुरुवार को सुबह धार्मिक परंपराएं निभाई गई। अंतिम संस्कार की क्रियाएं करवाने के लिए वहां पंडित को बुलाया गया, लेकिन बॉडी को किट में पैक देखकर पंडित वहां से वापस आ गया। परिजन धार्मिक परंपराएं निभाने के बाद शव को एम्बूलेंस में श्मशान घाट ले गए। महज एम्बूलेंस चालक ने ही पीपीई किट पहन रखा था।

शव किट में पैक होने का नहीं चला पता
अंतिम संस्कार में परिवार और समाज के दर्जनों लोग एकत्र हुए, लेकिन किसी को भी शव के बॉडी किट में पैक होने का पता नहीं चला। बॉडी किट में पैक शव पर परिजनों ने कपड़े धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सुहागिन के कपड़े चुंदरी ओढ़ा दी थी। ऐसे में श्मशान घाट के संचालकों को भी इसकी जानकारी नहीं हुई। शिव धाम धर्माणा चेरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष कैलाश तिवाड़ी ने बताया कि किट सुहागिन के कपड़ों से अटा था। श्मशान घाट में इस तरह के कपड़े अलग रखे जाते हैं, लेकिन इस परिवार ने कपड़ों को हटाए बिना ही किट में पैक शव को परिजनों ने सामान्य शव की तरह अग्नि दे दी, जबकि इस तरह के शव के लिए शहर के दोनों बड़े श्मशान घाट में अलग से व्यवस्था कर रखी है। श्मशान घाट के कर्मचारी पीपीई किट पहन कर कोरोना पॉजीटिव के मामले में परिवार का सहयोग करते हैं।

 

लापरवाही के साथ टूटी सोशल डिस्टेंसिग
धर्माणा श्मशान घाट में इस दौरान अंतिम संस्कार में लापरवाही के साथ सोशल डिस्टेंसिग की भी धज्जियां उड़ी। उस दौरान दो अंतिम संस्कार व तीये के स्नान के लिए आए करीब चार सौ लोगों की भीड़ थी। हालांकि बॉडी में पैक किट के अंतिम संस्कार की जानकारी मिलने पर पर लोग वहां से चले गए। हालांकि अभी तक महिला के कोरोना पॉजीटिव होने की पुष्टी नहीं हुई है, लेकिन यह लापरवाही बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है।

 

अंतिम संस्कार में 20 की संख्या की नहीं हो रही पालना

धर्माणा श्मशान घाट की व्यवस्था संभालने वाले कैलाश तिवाड़ी का कहना है कि सरकार ने भले ही अंतिम संस्कार के लिए 20 लोगों की संख्या तय कर रखी हो, लेकिन इसका पालन नहीं हो पा रहा है। शहर के इस श्मशान घाट में इस माह करीब 45 अंतिम संस्कार हो चुके हैं। प्रत्येक अंतिम संस्कार में 20 से अधिक लोग शामिल हुए हैं। नगर परिषद और प्रशासनिक अधिकारियों ने इसे रोकने का कभी कोई प्रयास नहीं किया। अंतिम संस्कार के दौरान उपखंड अधिकारी को फोन किया गया था, लेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हो पाया। बाद में शाम को फोन पर उन्हें इससे अवगत करवा दिया गया।

इनका कहना है...
चिकित्सा विभाग की जिम्मेदारी व्यक्ति के जिंदा रहने तक उपचार की होती है। कोरोना संक्रमित की मौत होने पर गाइड लाइन के अनुसार किट में पैक कर शव परिजनों को सौंप दिया जाता है। साथ ही उन्हें सावधानी बरतने के लिए आवश्यक जानकारियां दे दी जाती है। अंतिम संस्कार के दौरान गाइड लाइन की पालना नगर निकाय और प्रशासन करवाता है।
डॉ. अजय चौधरी, सीएमएचओ सीकर

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