scriptContract workers will have separate posts in every department | अब प्रदेश में नियमित भर्ती की तरह संविदाकर्मियों के अलग से होंगे हर विभाग में पद | Patrika News

अब प्रदेश में नियमित भर्ती की तरह संविदाकर्मियों के अलग से होंगे हर विभाग में पद


पहली बार में पांच साल का नियुक्ति पत्र मिलेगा, सवा लाख संविदाकर्मियों के लिए सरकार ने जारी की अधिसूचना
सख्ती: विभागों की मनमर्जी पर लग सकेगी लगाम, अब मर्जी से नहीं कर सकेंगे संविदाकर्मियों की भर्ती
नियमित भर्तियों में कटौती से बेरोजगारों को होगा नुकसान
चार लाख कर्मचारियों की ओर से की जा रही है नियमित करने की मांग

सीकर

Published: January 16, 2022 11:09:56 pm


अजय शर्मा. सीकर.
प्रदेश में लगातार बढ़ती संविदा कर्मियों की फौज पर लगाम कसने के लिए अब सरकार ने थोड़ी सख्ती दिखाई है। इसके लिए सरकार ने संविदाकर्मियों की भर्ती के लिए कानूनी खाका लगभग तैयार किया है। संविदा कर्मचारियों के नियमित करने की मांग पर लगातार बढ़ते आंदोलन को देखते हुए सरकार ने यह कवायद की है। हालांकि संविदा कर्मचारी इस अधिसूचना से पूरी तरह संतुष्ट नहीं है। क्योंकि इसमें नियमित करने का कही भी जिक्र नहीं किया गया है। नई अधिसूचना के बाद कोई भी विभाग अपनी मर्जी से संविदा व ठेके पर कर्मचारियों की भर्ती नहीं कर सकेगा। इसके लिए विभागों को पहले कार्मिक व वित्त विभाग से अनुमति लेनी होगी। दरअसल, पिछले साल संविदाकर्मियों ने नियमित करने की मांग को लेकिन आंदोलन शुरू कर दिया था। इस पर मुख्यमंत्री ने जल्द संविदा कर्मचारियों की नियुक्ति व कैडर बनाने के लिए आदेश जारी किए थे। इसके बाद कार्मिक विभाग की ओर से अब विस्तृत अधिसूचना जारी की गई है। भविष्य में होने वाली भर्तियों के लिए सरकार की ओर से यह रोडमैप दिखाया गया है।
पिछले साल सरकार ने की थी कैडर बनाने की घोषणा
पिछले साल सरकार ने की थी कैडर बनाने की घोषणा
नई अधिसूचना को लेकर ए टू जेड...

1. नियमित भर्ती की तरह संविदा के पद अलग से
विभिन्न विभागों की अलग-अलग परियोजनाओं में संविदा के पदों का सृजन किया जाएगा। नियमित भर्ती की तर्ज पर संविदाकर्मियों की भर्ती के लिए अलग से आवेदन लिए जाएंगे। इसके बाद ही संविदा कर्मचारियों का चयन किया जा सकेगा। खास बात यह है कि इसमें सभी वर्गो को नियमानुसार आरक्षण का प्रावधान रखा गया है। इसमें आयु सीमा भी 21 से 40 वर्ष तय की गई है।
2. पहले पांच साल और फिर तीन-तीन साल के लिए बढ़ोतरी
भविष्य में होने वाले संविदा कर्मचारियों को नियमित कर्मचारियों की तरह अलग से नियुक्ति पत्र भी जारी किया जाएगा। इसमें बताया स्पष्ट बताया जाएगा कि संविदा कर्मचारी को कितने दिन के लिए रखा गया है। संविदा कर्मचारियों को पहले चरण में अधिकतम पांच साल के लिए रखा जाएगा। इसके बाद विभाग या योजना को संविदा कर्मचारी की आवश्यकता होने पर तीन-तीन साल और कार्यकाल बढ़ाया जाएगा। लेकिन अधिमतक कार्यकाल 60 वर्ष की आयु तक ही बढ़ाया जा सकता है।
3. वेतन-भत्ते: हर साल पांच फीसदी वेतन बढ़ेगा
संविदा कर्मचारियों के अलग-अलग पदों के हिसाब से वित्त विभाग की सहमति से प्रशासनिक विभाग की ओर से एकमुश्त वेतन का निर्धारण किया जाएगा। हर साल संबंधित विभाग की ओर पांच प्रतिशत वेतन में बढ़ोतरी करनी होगी। इसके अलावा 12 आकस्मिक अवकाश, मेडिक्लेम पॉलिसी, दुर्घटना बीमा व एनपीएस की कटौती का प्रावधान किया गया है। इसमें यात्रा भत्ते का भी प्रावधान किया गया है।
4. सेवा समाप्त होने पर मिलेगा पांच महीने तक का वेतन:
यदि किसी विभाग की ओर से संविदाकर्मी का पद समाप्त किया जाता है तो संविदाकर्मी को हटाया जा सकेगा। ऐसे में संबंधित विभाग की ओर से एक साल के अनुभव पर एक महीने और पांच साल के अनुभव पर अधिकतम पांच महीने का वेतन अग्रिम देना होगा।
बड़ा सवाल: अब प्रदेश में दो तरह से भर्ती, नुकसान सीधा बेरोजगारों को
सरकार की अधिसूचना में भविष्य में दो तरह से भर्ती करने की मंशा जताई गई है। नियमित भर्ती पहले की तरह होती रहेगी। लेकिन संविदा कर्मचारियों के लिए भी अलग से पद सृजित होंगे। ऐसे में यदि 25 फीसदी पद भी संविदा कर्मचारियों को दिए जाते है तो इसका सीधा नुकसान विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटे बेरोजगारों को होगा। दिल्ली व यूपी की तर्ज पर सरकारी कार्यालयों में भी निजीकरण को बढ़ावा मिलेगा।
पहले से लगे संविदाकर्मियों के लिए क्या

सरकार ने पहले से विभिन्न विभागों में अलग-अलग पदों पर कार्यरत संविदा कर्मियों को खुश करने के लिए यह फॉर्मूला निकाला है। इसके तहत पहले से कार्यरत संविदा कर्मियों को नियुक्ति पत्र जार कराए जा सकते हैं। इसमें पांच साल की अवधि तक सेवा का जिक्र रहेगा। नई भर्तियों में मौका मिलने के जरिए राहत का दावा किया गया है। लेकिन नियमित करने का कही जिक्र नहीं। पुराने संविदा कर्मचारियों को वेतन पहले की तरह मिलता रहेगा। हर साल मानदेय बढ़ोतरी के लिए आंदोलन नहीं करना होगा, क्योंकि पांच प्रतिशत राशि स्वत ही बढ़ाई जाएगी।
सरकार को फायदे

1. संविदा कर्मचारियों का अलग कैडर बनाने से नियमित भर्ती कम करनी पड़ेगी। इससे आर्थिक भार भी कम होगा।
2. संविदा कर्मचारियों के आंदोलन और नियमित करने जैसी मांगों से छुटकारा मिलेगा।
3. भर्तियों के अभाव में रिक्त पड़े पदों को भी संविदा के आधार पर भरा जा सकेगा, जिससे सरकारी कार्यालयों में कामकाज और रफ्तार पकड़ सकेगा।
सरकार ने कैडर बनाने के नाम दिखाई निजीकरण की मंशा
चुनाव के दौरान सरकार ने संविदाकर्मियों के वोट बंटोरने के लिए नियमित करने का सपना दिखाया था। तीन साल तक सरकार ने कुछ नहीं किया। अब संविदा कर्मचारियों ने आंदोलन का ऐलान किया तो गाइडलाइन बना दी गई। इस गाइडलाइन के जरिए सरकार की मंशा सभी तरह से स्पष्ट हो रही है। इस गाइडलाइन से निजीकरण को और ज्यादा बढ़ावा मिलेगा।
उपेन्द्र शर्मा, कर्मचारी नेता, सीकर

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