संविदा शिक्षकों को मिलेगा ये तौहफा, जाने क्या

प्रदेश की नई कांग्रेस सरकार उन्हें सरकारी सेवा में समायोजन का बड़ा तोहफा दे सकती है।

By: Vinod Chauhan

Published: 19 Jan 2019, 06:46 PM IST

सीकर.

सरकारी स्कूल और मदरसों में लोक जुम्बिश, शिक्षाकर्मी योजना, वक्फ बोर्ड, एसएसए और राज्य सरकार की योजनाओं में लंबे समय से लगे पैराटीचर्स के लिए खुश कर देने वाली बड़ी खबर है। प्रदेश की नई कांग्रेस सरकार उन्हें सरकारी सेवा में समायोजन का बड़ा तोहफा दे सकती है। सूत्रों की मानें तो इसके लिए सरकार ने कवायद भी शुरू कर दी है। जिसके तहत सभी जिलों से विभिन्न योजनाओं में नियुक्त पैराटीचर्स की सूचना इक_ा करना शुरू कर दिया गया है। यदि सब सही रहा तो योग्यता और अनुभव के आधार पर सरकार इन्हें जल्द स्थाई नियुक्ति दे सकती है। और यदि सरकार इच्छा शक्ति दिखाए तो प्रदेश के करीब 16 हजार पैराटीचर्स का सरकारी शिक्षक बनने का सपना पूरा हो सकेगा।
18 साल में दो बार समायोजन
पैराटीचर्स का 2000 के बाद दो बार सरकारी सेवा में समायोजन किया जा चुका है। पहले 2001 में कांग्रेस सरकार ने 1988 से 1993 के बीच नियुक्त पैराटीचर्स को सरकारी सेवा में लिया था। इसके बाद 2008 में पांच साल के अनुभव वाले प्रशिक्षित पैराटीचर्स को प्रबोधक के रूप में समायोजित किया गया।
16 हजार को फायदा
सरकारी सेवा में समायोजन के फैसले से प्रदेश के 16 हजार 304 पैराटीचर्स को फायदा होगा। एक आंकड़े के मुताबिक प्रदेश में इस समय 5 हजार 553 पैराटीचर्स, 6 हजार 720 मदरसा पैराटीचर्स और 4 हजार 31 वरिष्ठ और सामान्य शिक्षाकर्मी है। इसके अलावा २५० से अधिक लोक जुम्बिश परियोजना से जुड़े है।
एक चौथाई वेतन में गुजारा

वर्तमान में शिक्षा सहयोगी के रूप में लगे यह शिक्षक सरकारी शिक्षक के बराबर काम कर रहे हैं। स्कूल और मदरसों में बच्चों को पढ़ाने से लेकर मिड- डे-मील और रिकॉर्ड संधारण तक का काम इन्हें करना पड़ रहा है। लेकिन, इसके बावजूद उन्हें महज 7 हजार 202 रुपए का वेतन दिया जा रहा है। जो सरकारी शिक्षकों के मुकाबले करीब एक चौथाई है। वेतन वृद्धि के नाम पर भी कभी 200 तो कभी 500 रुपए वेतन बढऩे पर यह लंबे समय से खुद को ठगा महसूस कर रहे थे।
10 साल पहले बनाया था प्रबोधक
पैराटीचर्स को अंतिम बार 2008 में प्रबोधक के रूप में सरकारी सेवा में समायोजित किया गया था। तब सरकार ने प्रशिक्षित और पांच साल का अनुभव रखने वाले शिक्षा सहयोगी और गैर सरकारी स्कूल शिक्षकों को सरकारी स्कूलों में नया पद सृजित कर नियुक्त किया था। क्योंकि कोर्ट में पेश एक हलफनामे के तहत सरकार प्रवेश परीक्षा के जरिए ही शिक्षक भर्ती कर सकती थी। ऐसे में प्रबोधक के रूप में बीच का रास्ता अपनाया गया था।

Vinod Chauhan
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