रोटी के साथ पेट पर संकट लाया कोरोना

दुनिया में खौफ फैलाने वाले कोरोना वायरस ने शेखावाटी में रोटी के जुगाड़ के साथ पेट पर भी संकट ला दिया है। इससे यहां से लेकर खाड़ी देशों तक अनिश्चितता का माहौल है।

By: Devendra

Published: 19 Mar 2020, 05:58 PM IST


- सीकर. दुनिया में खौफ फैलाने वाले कोरोना वायरस ने शेखावाटी में रोटी के जुगाड़ के साथ पेट पर भी संकट ला दिया है। इससे यहां से लेकर खाड़ी देशों तक अनिश्चितता का माहौल है। दो जून की रोटी के जुगाड़ में घर से दूर खाड़ी देशों में गए अपनों की सलमती को लेकर उनके परिजन चिंतित है। वहीं खाड़ी के कामगार भी अपने भविष्य को लेकर संकट में हैं। उन्हें संकट इस बात का है कि वे इस गंभीर वायरस का शिकार हो गए तो कहां जाएंगे। वजह है कि सऊदी अरब से लेकर कई देशों की प्लाइट बंद होने से अब आवागमन भी बंद हो गया है। इससे शेखावाटी अंचल के सीकर, झुंझुनूं और चूरू जिले के करीब तीन से चार लाख लोग खाड़ी में फंसे हैं। इसके अलावा अकेले सीकर में दस हजार से अधिक ऐसे लोग फंस गए है, जो छुट्टी पर घर आए थे और फ्लाइट बंद होने से यहीं रह गए। इनके सामने वीजा अवधि खत्म होने का संकट है।

खाड़ी की विपत्ति का हमारा दिल से नाता
खाड़ी देशों में जब भी विपत्ति की बादल मंडराए हैं। उसका असर शेखावाटी के ताने-बाने पर नजर आया है। खाड़ी युद्ध की बात हो या अफगानिस्तान पर हमले की। शेखावाटी अंचल की बात करें तो यहां के लोगों का खाड़ी से देश की आजादी से भी पुराना नाता है। यह नाता समय के साथ मजबूत हुआ है। खाड़ी के सऊदी अरब, दुबई, कुवैत, कत्तर, बहरीन में यहां के करीब पांच लाख लोग रोजगार के लिए हैं। सबसे ज्याद संख्या सऊदी अरब और दुबई में हैं। के.के.इंटरनेशनल, फतेहपुर के गुलाम मोहम्मद बेसवा का कहना है कि शेखावाटी से जयपुर, दिल्ली और मुंबई की उड़ान की स्थिति देखे तो पांच सौ से एक हजार यात्री प्रतिदिन खाड़ी देशों की यात्रा करते हैं।
खाड़ी पर टिकी है ग्रामीण अर्थव्यवस्था
शेखावाटी अंचल के ग्रामीण क्षेत्रों की अर्थ व्यवस्था खाड़ी देशों पर टिकी है। यहां प्रत्येक गांव और ढाणी में किसी ना किसी परिवार का कोई सदस्य खाड़ी देश में हैं। वहां की प्रत्येक गतिविधि का यहां के ताने-बाने पर असर पड़ेगा। खाड़ी में रहने वाले लोगों के परिवारों से बातचीत गई तो साफ नजर आया कि कोरोना का असर यहां की अर्थ व्यवस्था को प्रभावित करेगा। यहां के मोहल्ला बिसायतियान निवासी एडवोकेट अताउल्लाह खान का परिवार अपनों की सलामती को लेकर चिह्नित है। बकौल अताउल्ला खान उनके भाई शमी उल्लाह, सिंकदर सहित परिवार के पांच सदस्य वहां फंसे हुए हैं। इनके पत्नी बच्चे तो कोरोना का भय होने पर यहां आ गए, लेकिन इन्हें फ्लाइट की टिकट नहीं मिल पाई। छोटा भाई जहिर खान तो ऐसी जगह फंसा हुआ है, जहां पर उपचार तो दूर खाने की व्यवस्था भी नहीं हो पा रही है। कंपनी के मालिक भी कोरोना के डर से कंपनी बंद कर चले गए हैं।
सैकड़ों की भीड़ समूह में करती है चिंता
शहर के शेखपुरा मोहल्ले में खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों के परिवारों की स्थिति जानने के लिए पत्रिका टीम सोमवार शाम मौके पर पहुंची तो सैकड़ों लोगों की भीड़ एकत्र हो गई। लोगों के चेहरे पर चिंता के भाव साफ नजर आ रहे थे। इस क्षेत्र के दो हजार से अधिक लोग सऊदी अरब में रहते हैं। कुछ लोग छुट्टी आए हुए हैं तो करीब आठ सौ लोग वहां फंसे हुए हैं। छुट्टी आए हुए लोग अपने भविष्य को लेकर चिंतित है। उन्हें चिंता इस बात की है कि कोरोना का भय खत्म होने के बाद उन्हें नौकरी मिलेगी की नहीं।

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