22 बच्चों के सिर से उठा माता- पिता का साया

कोरोना संक्रमण का कहर अब भले ही कम हो रहा हो, लेकिन उसका दर्द गांव-गुवाड़ की गलियों में पसरा है। कहीं भविष्य के सपने तो कहीं अपनों को कोरोना ने छीन लिया।

By: Sachin

Published: 23 Jun 2021, 06:53 PM IST

सीकर. कोरोना संक्रमण का कहर अब भले ही कम हो रहा हो, लेकिन उसका दर्द गांव-गुवाड़ की गलियों में पसरा है। कहीं भविष्य के सपने तो कहीं अपनों को कोरोना ने छीन लिया। जिले के 22 बच्चों को काल बने कोरोना ने ऐसा दर्द दिया है कि मां के आंचल के साथ उनके सर से पिता का साया भी छूट गया। माता या पिता में से एक को खोने वाले बच्चों की संख्या का आंकड़ा सौ से अधिक हो सकता है। सरकारी तंत्र के साथ बाल कल्याण समिति कोरोना के दंश की स्थिति जानने के लिए उतरी तो यह चौकाने वाली जानकारी सामने आई। अब तक के सर्वे में समिति को जिले में 22 ऐसे बच्चे मिल चुके हैं, जिनके माता-पिता दोनों की मौत हो गई।

 

गंभीर है स्थिति...छह विद्यालयों में मिले 23 बच्चे

कोरोना ने कितना दर्द दिया है, इसका अंदाजा समिति को समिति को मिली महज छह विद्यालयों की रिपोर्ट से लगाया जा सकता है। रींगस, आभवास, फतेहपुर, बागरियावास, श्रीमाधोपुर और दीवराला में ही ऐसे 23 बच्चों की सूचना प्राप्त हुई है। जिनके माता या पिता में से एक की मौत हो चुकी है। समिति अब इन बच्चों के परिवारों से सम्पर्क करेगी और सरकार की ओर से दी जाने वाली सहायता की जानकारी दी जाएगी।


सरकार से पहले परिवार बना सहारा

कोरोना में माता-पिता को खोने वाले जिले के 22 बच्चों की जिम्मेदारी सरकार से पहले परिवार ने संभाल ली है। इन परिवारों की स्थिति पर नजर डाली जाए तो सामने आता है कि महज एक बच्चें के पिता सरकारी सेवा में थे। उसकी मां भी स्नातक तक पढी लिखी थी। इसके अलावा अन्य बच्चे सामान्य परिवार के ही है। समिति ने जब इन परिवारों से सम्पर्क किया तो सभी ने बच्चों को अपने पास ही रखने की इच्छा जाहिर की। हालांकि सभी ने सरकारी सहायता से जोडऩे का आग्रह किया। फतेहपुर के एक परिवार में चार दिन में पति-पत्नी दोनों का निधन हो गया। उनकी दो बालिकाएं है। इन परिवारों ने भी बालिकाओं को अपने संरक्षण में ही रखने की बात कहीं। हालांकि बच्चियों के भविष्य के लिए सरकारी सहायता दिलवाने का आग्रह किया।


पिता संरक्षक, कैसे मिले पालन हार का लाभ
फतेहपुर के एक परिवार की स्थिति बेहद गंभीर है। यहां छह बालिकाओं की मां की कोरोना से मौत हो गई। लेकिन पिता संरक्षक होने के कारण इन परिवारों को सरकार की पालन हार योजना का भी लाभ नहीं मिल पा रहा है। जबकि इस परिवार को सरकारी सहायता की आवश्यकता है।


जिले भर में चल रहा है सर्वे का काम

कोरोना के कारण माता या पिता को खोकर दंश झेल रहे बच्चों की जानकारी एकत्र कर उन्हें सरकारी सहायता से जोडऩे का कार्य जिले भर में चल रहा है। इसके लिए जिला परिषद, महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ शिक्षा विभाग की भी जानकारी एकत्र करा है।

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