राजस्थान में यहां कोरोना की डेथ रेट कम, रिकवरी रेट राष्ट्रीय औसत से ज्यादा

कोरोना के लगातार बढ़ते मरीजों के बीच सीकरवासियों के लिए थोड़ी राहतभरी खबर है। जिले में कोरोना पीडि़तों की संख्या भले ही 2900 तक पहुंच गई हो लेकिन हमारी रिकवरी रेट राष्ट्रीय व राज्य की औसत से ज्यादा है।

By: Sachin

Updated: 30 Aug 2020, 04:16 PM IST

सीकर. कोरोना के लगातार बढ़ते मरीजों के बीच सीकरवासियों के लिए थोड़ी राहतभरी खबर है। जिले में कोरोना पीडि़तों की संख्या भले ही 2900 तक पहुंच गई हो लेकिन हमारी रिकवरी रेट राष्ट्रीय व राज्य की औसत से ज्यादा है। बारिश के सीजन की वजह से सीकर सहित प्रदेश के कई जिलों में नए पॉजिटिव सामने आ रहे हैं। ऐसे में अब सोशल डिस्टेंस के साथ मास्क और सेनेटाइज की ज्यादा आवश्यकता है। एसएमएस मेडिकल कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ योगेश यादव ने बताया कि वायरस के अलग-अलग स्ट्रेन इसके लिए रिकवरी रेट, डेथ रेट सहित अन्य कारणों के लिए जिम्मेदार होते हैं। इसके कारण से डेथ रेट और रिकवरी डेट में अंतर आता है। सामान्यता दो स्ट्रेन एल और एस प्रमुख होते हैं जिसमें एल ज्यादा घातक होता है और एस कम घातक। जो वायरस इटली में था वह ज्यादा खतरनाक था इसलिए वहां डेट रेट 14 फीसदी तक पहुंच गई थी। उन्होंने बताया कि सीकर के लोगों की खानपान की आदत की वजह से इम्युनिटी पावर काफी अच्छी है, इस वजह से हम कोरोना को मात दे पाने में सफल हो रहे हैं।

फैक्ट फाइल
देश में कोरोना पॉजिटिव: 3453335
राजस्थान में कोरोना पॉजिटिव: 77370
सीकर में कोरोना पॉजिटिव: 2879
देश की रिकवरी रेट: 76 फीसदी
राजस्थान की रिकवरी रेट: 80 फीसदी
सीकर की रिकवरी रेट: 79 फीसदी
कोरोना से राष्ट्रीय मृत्युदर: 1.8
राजस्थान की: 1.3
सीकर की: 1.0 फीसदी

सीकर में फैल रहा है कोरोना लेकिन सुधर रही रिकवरी रेट
सीकर में मई-जून महीने तक कोरोना के इतने केस सामने नहीं आए थे। लेकिन जुलाई व अगस्त में पॉजिटिव का आंकड़ा लगातार बढ़ता गया। यहां कोरोनावायरस के ज्यादातर केस एसिंप्टोमेटिक (जिनमें लक्षण नजर नहीं आते) है। मृत्यु दर पहले 1.15 फीसदी तक पहुंच गई थी, जो अब घटकर 1 फीसदी तक आ गई है। इलाज में नए-नए तरीके काम में लिए जा रहे हैं। संक्रमण का स्तर हमें कोरोनावायरस की जांच से वायरल लोड का पता चल सकता है जिनका वायरल लोड ज्यादा है उन्हीं मरीजों के सीरियस होने के चांस ज्यादा होते हैं। कम वायरल लोड वाले मरीज या तो कोई लक्षण नहीं नहीं दिखाते या फिर जल्दी ठीक हो जाते हैं।

90 फीसदी में कोई लक्षण नहीं
एसिंप्टोमेटिक या कोई लक्षण नहीं होने वाले मरीज ज्यादा शेखावाटी में सामने आ रहे हैं। 90 फीसदी इस तरह की की श्रेणी के है। इनमें हल्की जुकाम, केवल सिर दर्द या हल्का गले में दर्द होना शामिल है। इसमें मरीज को और कोई लक्षण नजर नहीं आते है। इसमें जुकाम खांसी होती है लेकिन बुखार नहीं होता है। प्रदेश के कई मरीजों में दिमागी बुखार, निमोनिया या सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द, सूंघने की क्षमता कमजोर पडऩे, सांस लेने में तकलीफ होने के तथ्य भी सामने आए है। मल्टी ऑर्गन फैलियर फॉर किडनी फैलियर होना और शरीर के अन्य अंगों में रक्त के थक्के जमना यह सबसे खतरनाक स्थति होती है और इसमें गुर्दे और अन्य अंग काम करना कम कर देते हैं। वहीं छोटे-छोटे थक्के जम जाते हैं जिसका जिस कारण से रोगी की मृत्यु तक हो जाती है

सही समय पर सही इलाज जरूरी
संक्रमण के पांचवे दिन से ही लक्षणों की गंभीरता समझा इसमें बहुत जरूरी होता है। संक्रमितों के खून में ऑक्सीजन के स्तर पर नजर रखते हुए आकलन कर उपचार शुरू हो तो मरीज की स्थिति को गंभीर होने से बचाया जा सकता है।

पल्स ऑक्सीमीटर से मिलेगी मदद
संक्रमितों में ऑक्सीजन का स्तर क्या है, इसे मापने के लिए एक पोर्टेबल मशीन आती है पल्स ऑक्सीमीटर। ऐसे मरीज अगर घर में भी रहें और पल्स ऑक्सीमीटर से अपना ऑक्सीजन लेवल मापते रहें तो सही समय पर इलाज करवा सकते हैं।

और ऐसे समझें पूरा गणित
पांच जून तक
शहरी इलाके में मरीज: 48
ग्रामीण इलाके में मरीज: 197

30 अप्रेल तक
शहरी इलाके में: 2
ग्रामीण इलाके में: 4

लॉकडाउन—वार सैंपल
1. लॉकडाउन: 117
2. लॉकडाउन: 647
3. लॉकडाउन: 3435

लॉकडाउन—वार स्क्रीनिंग
1. लॉकडाउन: 1028908
2. लॉकडाउन: 2124088
3. लॉकडाउन: 2710193

लॉकडाउन—वार कोरोना पॉजिटिव केस
1. लॉकडाउन: 1
2. लॉकडाउन: 2
3. लॉकडाउन: 27

लॉकडाउन—वार पॉजिटिव से नेगेटिव केस
1. लॉकडाउन: 0
2. लॉकडाउन: 2
3. लॉकडाउन: 5

लॉकडाउन—वार कोरोना से हुई मौतें
1. लॉकडाउन: 0
2. लॉकडाउन: 0
3. लॉकडाउन: 2

लॉकडाउन—वार मरीज रिकवर हुए
1. लॉकडाउन: 0
2. लॉकडाउन: 0
3. लॉकडाउन: 5

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