संदेह और विवादों से घिर गई शिक्षा विभाग की डीपीसी और काउंसलिंग की प्रक्रिया

चूरू मंडल में शामिल सीकर, चूरू व झुंझुनूं जिले के द्वितीय श्रेणी शिक्षकों की काउसंलिंग 25 से 27 मई तक चूरू में हुई थी।

By: vishwanath saini

Published: 07 Jun 2018, 10:57 AM IST

सीकर. प्रधानाचार्यों की काउंसलिंग में अपने ही नियमों की बखियां उधेडकऱ भारी गड़बड़ी करने वाले शिक्षा विभाग में घोर अंधेरगर्दी की पोल भी उधड़ गई है। हालिया चूरू मंडल में हुई द्वितीय श्रेणी शिक्षकों की काउसलिंग में ऐसे शिक्षकों के नाम भी शामिल मिले हैं, जो 15 साल पहले ही दूसरे जिले में तबादला पा चुकें है। उन शिक्षकों तक का पदस्थापन कर दिया गया है, जो नई भर्ती में चयन पर बरसों पहले ही वो पद छोड़ चुके हैं। ऐसे में शिक्षा विभाग की डीपीसी (पदोन्नति) और काउंसलिंग की प्रक्रिया पूरी तरह सवाल, संदेह और विवादों से घिर गई है।


ऐसे समझें मामला
चूरू मंडल में शामिल सीकर, चूरू व झुंझुनूं जिले के द्वितीय श्रेणी शिक्षकों की काउसंलिंग 25 से 27 मई तक चूरू में हुई थी। काउंसलिंग में उन द्वितीय श्रेणी शिक्षकों को स्कूल आवंटित हुए हैं, जो तृतीय से द्वितीय श्रेणी में पदोन्नत हुए हैं। लेकिन, काउंसलिंग के बाद जो पदस्थापन आदेश जारी हुए उसमें ऐसे शिक्षकों को भी पदोन्नत कर काउंसलिंग में शामिल करना सामने आया है जो जिले में ही नहीं है। तो 2014 की द्वितीय श्रेणी शिक्षक भर्ती में पहले ही चयनित हो चुके शिक्षकों को भी उसमें जगह दी गई है। यानी साफ है कि शिक्षा विभाग में शिक्षकों की जानकारी या तो छुपाई जा रही है या उसे अपडेट नहीं किया जा रहा। जिसका असर डीपीसी से लेकर काउंसलिंग तक में गड़बड़ी के रूप में दिख रहा है।


केस01
सामाजिक विज्ञान की पदस्थापन सूची में पिपराली की राउप्रावि मलकेड़ा स्कूल की वरिष्ठ शिक्षक विभा प्रकाश शर्मा को काउंसलिंग के बाद राउप्रावि किकरालिया में पदस्थापित करना दिखाया है। जबकि हकीकत में विभा प्रकाश का तबादला करीब 15 साल पहले ही जयपुर मंडल में हो चुका है। यानी जिले में नहीं होने के बावजूद पहले डीपीसी हुई और फिर काउंसलिंग में शामिल कर नया पदस्थापन हुआ।


केस02
2005 की तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती परीक्षा में चयनित शिक्षक राम निवास की नियुक्ति धोद की खरसाडू मिडिल स्कूल में हुई थी। 2014 में राम निवास का चयन द्वितीय श्रेणी शिक्षक भर्ती परीक्षा में हो गया। लेकिन, शिक्षा विभाग ने रामनिवास को भी पदोन्नत कर काउंसलिंग में शामिल कर लिया। अनुपस्थित रहा तो अपने स्तर पर चूरू में पदस्थापित कर दिया।


शाला दर्पण पर सवाल
द्वितीय श्रेणी शिक्षकों की पदस्थापन सूची के बाद सवाल अब शाला दर्शन और शाला दर्पण सरीखे वेब पोर्टल पर भी उठ गए हैं। जिसमें प्रदेश की सभी सरकारी स्कूलों की सारी और सही जानकारी ऑनलाइन अपडेट किए जाने का दावा सरकार और विभाग करता रहा है। लेकिन, ऐसे मामलों के बाद साफ हो गया है कि पोर्टल पर भी सबकुछ ठीक नहीं है।


काउंसलिंग पर भी उठ चुके हैं सवाल
बतादें कि इससे पहले शिक्षा विभाग की काउंसलिंग प्रक्रिया पर भी कई बार सवाल उठ चुके हैं। चहेतों को लाभ देने के लिए विभाग द्वारा पद छुपाने के मामले कई बार उजागर हो चुके हैं। हालिया प्रिंसिपल की काउंसलिंग में खुद निदेशालय ने शेखावाटी के तीनों जिलों समेत सात जिलों के पद छुपा लिए थे। जिसके चलते इन जिलों के संभागियों को मजबूरन दूसरे जिलों में जाना पड़ा। मामले में संभागियों ने अब कोर्ट की शरण तकी है।

 

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vishwanath saini Desk
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