हर तरफ मौत, हर कोई गमजदा...

सोशल मीडिया पर गमजदा सूचनाएं कर रही हैं आहत
बदला ट्रेंड: लगातार सोशल मीडिया पर दुखभरी खबरों की वजह से लोगों ने बनाई दूरी

By: Suresh

Updated: 08 May 2021, 06:25 PM IST

अजय शर्मा.सीकर. कोरोना की दूसरी लहर में देशभर में मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। ट्वीटर से लेकर वाट्सएप और एफबी पर इसका असर है। यहां हर तरफ अपनों के मौत की दर्दभरी कहानियां है। पीएम-सीएम से लेकर ज्यादातर ट्वीटर पर पिछले 15 दिनों में मौत की खबरें ज्यादा श्ेायर की है। इससे कई लोग बेहद गमजदा है।
सोशल मीडिया के ज्यादातर गु्रप में गमभरी खबरें रहने की वजह से हजारों लोगों ने सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी बना ली है। पिछले 10 दिनों में मानसिक तनाव बढऩे की वजह से मनोरोग विशेषज्ञों के पास भी लगातार फोन कॉल पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि कोरोना को लेकर तनाव नहीं पाले। यदि लक्षण नजर आते है तो जांच कराए लेकिन बेवजह भ्रम नहीं पाले।
खुशियां बांटे, गम नहीं
काउसंर प्रमिला सिंह का कहना है कि समाज को यह वक्त खुशियां बांटने का है। लेकिन कई लोगों ने सोशल मीडिया का गलत इस्तेमाल शुरू कर दिया है। जो लोग कोरोना महामारी से जंग लड़कर जीतकर घरों को लौटकर आ रहे हैं उनकी कहानियां ज्यादा से ज्यादा शेयर करनी होगी। लोगों को सबसे ज्यादा तनाव इसलिए भी है कि अस्पतालों में बेड और ऑक्सीजन नहीं है। इसलिए सरकार को प्रशासन ने अपनी जिम्मेदारी देते हुए संदेश पहुंचाना होगा कि सरकार के पास सभी संसाधन है आप सिर्फ कोरोना गाइडलाइन की पालना करते हुए घरों में रहे। भजन व संगीत के जरिए काफी हद तक तनाव को दूर किया जा सकता है।
अकेलेपन की वजह से भी बढ़ा तनाव
अकेलेपन की वजह से कई लोगों का तनाव बढ़ रहा है। मन में अजीब से घबराहट भी बड़ा कारण है। इसके अलावा विद्यार्थी भी अपने दोस्तों से नहीं मिलने की वजह से डिप्रेशन में है।
प्रदेश में तनाव बढऩे की दो दर्दभरी कहानी
केस-1: दादा-दादी ट्रेन के आगे कूद गए, कोरोना होने पर घबराए नहीं
कोटा इलाके में पिछले दिनों दादा-दादी टे्रन के आगे इसलिए कूद गए कि यह बीमारी उनके पोते-पोतियों को नहीं लग जाए। चिकित्सकों का कहना है कि कोरोना संक्रमित व्यक्तियों का समाज को हौसला बढ़ाना होगा कि आप बेहतर उपचार लेकर कोरोना को मात दें। ग्रामीण क्षेत्र में जागरुकता और बढ़ाने की आवश्यकता है।
केस-2: सदमे से उबारने की हो कोशिश
बाड़मेर जिले में पिता की मौत से आहत बेटी ने अपने पिता की चिता में छलाग लगा दी। बेटी पिता के बीमार होने के बाद से ही अवसाद में थी। चिकित्सकों का कहना है कि यदि समय रहते बेटी के अवसाद को परिवार के अन्य लोग समझते तो शायद यह हादसा नहीं होता। इसलिए समाज की ऐसे माहौल में जिम्मेदारी बनती है कि यदि कोई अपना गम में है तो उसके दर्द को समझकर सदमे से उबारने की कोशिश करें।
एक्सपर्ट व्यू: सकारात्मक सोच बेहद जरूरी
लॉकडाउन और बढ़ते कोरोना केस की वजह से मानसिक समस्याएं बढ़ी है। ऐसे में सकारात्मक सोचना होगा। यदि कोई व्यक्ति कोरोना की वजह से डिप्रेशन में है तो परिवार के सदस्य उसे सकारात्मक तरीके से समझाए। प्रतियोगी परीक्षा, भूख नहीं लगाना, बीमार होने पर उपचार एवं परिचितों की मौत की वजह से बहुत से लोग अवसाद में है। पूरी नींद और समय पर भोजन के साथ व्यायाम पर फोकस करें।
डॉ. शिवप्रसाद, एसोसिएट प्रोफेसर मनोरोग विभाग, लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज
कोरोना को सावधानी से हराया जा सकता है: विशेषज्ञ
कोरोना संक्रमण के बारे में किसी भी तरह के भय का माहौल नहीं पनपने दें। कोरोना संक्रमण को लेकर कई बार सोशल मीडिया पर अनर्गल बात होती है। केवल तथ्यात्मक बात ही करें। पॉजिटिव सोच रखें। जिज्ञासा हो तो किसी विशेषज्ञ से बात करें। । कोरोना को सावधानी से हराया जा सकता है। घबराएं नहीं।
डा केके वर्मा, मानसिक रोग विशेषज्ञ एवं प्रिंसीपल मेडिकल कॉलेज

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