दो साल से डायलिसिस के भरोसे थी जेठानी की जान, तो देवरानी ने अपनी किडनी देकर दिया जीवन दान

देवर जेठानी के अनबन के किस्से तो आपने खूब सुने होंगे। लेकिन, राजस्थान के सीकर जिले के मदनी गांव से देवर जेठानी का ऐसा मामला सामने आया है, जिसने इस रिश्ते की मिठास बढ़ाने के साथ अनूठी मिसाल पेश कर दी है।

By: Sachin

Updated: 30 Jun 2020, 02:42 PM IST

सीकर/खाटूश्यामजी. देवर जेठानी के अनबन के किस्से तो आपने खूब सुने होंगे। लेकिन, राजस्थान के सीकर जिले के मदनी गांव से देवर जेठानी का ऐसा मामला सामने आया है, जिसने इस रिश्ते की मिठास बढ़ाने के साथ अनूठी मिसाल पेश कर दी है। दरअसल इस गांव में एक जेठानी पिछले दो साल से किडनी की बीमारी से परेशान थी। जिसकी जिंदगी डायलिसिस पर चल रही थी। नई किडनी ही उसे जीवन दान दे सकती थी। ऐसे में जब हर तरफ से निराशा हाथ लगी तो देवरानी ने अपनी किडनी जेठानी को देने का फैसला कर लिया। जिसके बाद सोमवार को सफल ऑपरेशन के बाद देवरानी की किडनी जेठानी को ट्रांसप्लांट भी कर दी गई। यह वाकया अब नजीर बन गया है।

 

पूर्व पंचायत समिति सदस्य है देवरानी


ग्राम पंचायत मदनी की जिस देवरानी कमलेश सुंडा ने जेठानी को किडनी दी है वह पंचायत समिति की पूर्व सदस्य है। इनकी सास भगवानी देवी अब भी गांव की सरपंच है। तारा देवी जब डायलिसिस पर चल रही थी, तब से परिजन उसकी किडनी ट्रांसप्लांट पर विचार कर रहे थे। लेकिन, व्यवस्था कर पाना मुश्किल हो रहा था। ऐेसे में जेठानी तारा को बड़ी बहन समझ देवरानी कमलेश सुंडा ने ही अपनी किडनी देना तय कर लिया। इसके बाद दोनों को जयपुर के महात्मा गांधी अस्पताल में भर्ती करवाया गया। जहां सोमवार को किडनी ट्रांसप्लांट का सफल ऑपरेशन हुआ।

अब हम उम्र बच्चों के साथ खेल पाएगी होद गांव की प्रीति

सीकर. खंडेला के होद गांव की प्रीति अब अपने हमउम्र बच्चों के साथ खेल पाएगी। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत सीकर जिले ह्दय के गंभीर रोग से ग्रसित 13 वर्षीय प्रीति का जयपुर के निजी अस्पताल में निशुल्क ऑपरेशन हुआ है। फिलहाल अस्पताल में भर्ती प्रीति घर लौटने के बाद अब अन्य बच्चों की तरह खिलखिलाएगी। साथ ही परिजनों को भी प्रीति के आगे पढऩे की चिंता नहीं सताएगी। नोडल अधिकारी डा निर्मल सिंह ने बताया कि जून माह में कार्यक्रम के तहत ह्दय के पांच ऑपरेशन हुए हैं। जिससे इन बच्चों को नया जीवन दान मिला है। गंभीर हृदय रोग से ग्रसित होने के कारण प्रीति थोड़ी सी भागदौड़ करने पर थक जाती थी। जन्म की इस बीमारी के कारण माता पिता भी उसके भविष्य को लेकर खासे परेशान थे। स्क्रीनिंग के बाद प्रीति का जयपुर के निजी अस्पताल मे ंहृदय का निशुल्क ऑपरेशन हुआ है। आमतौर पर इस प्रकार के ऑपरेशन में करीब तीन से चार लाख रुपए का खर्चा आता है।

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