120 देशों में 1200 से ज्यादा राजस्थानी गीतों की प्रस्तुती दे चुका है राजस्थान का धोद जिप्सी बैंड

संस्कृति संस्कारों से पीढिय़ों में पलती है और संगीत से संसारभर में बढ़ती है। फिर बात राजस्थान की हो तो यहां की तो संस्कृति ही लोकगीतों में बसती है।

By: Sachin

Published: 27 Jun 2021, 01:19 PM IST

सीकर. संस्कृति संस्कारों से पीढिय़ों में पलती है और संगीत से संसारभर में बढ़ती है। फिर बात राजस्थान की हो तो यहां की तो संस्कृति ही लोकगीतों में बसती है। जिसे सुनते ही तन-मन झंकृत हो जाते हैं। इन्हीं सुरीले गीतों से जिले का धोद जिप्सी बैंड पूरी दुनिया को राजस्थानी संस्कृति से सराबोर कर रहा है। राजस्थानी रजवाड़ों, तीज- त्योहारों, प्रकृति, सौंदर्य व संस्कृति से जुड़े लोकगीतों के अलावा खुद के बनाए संगीत की स्वर लहरियों को यह बैंड 120 देशों के 1200 से ज्यादा कार्यक्रमों में बिखेर चुका है। जिसके चलते बैंड राजस्थानी संस्कृति का ब्रांड एंबेसेडर तक कहा जाने लगा है। मूलरूप से धोद निवासी बैंड संस्थापक रहीस भारती का कहना है कि पीढ़ी व परंपरा से मिला राजस्थानी लोकगीत ही उनकी पहचान है। ऐसे में यह गीत ही उनकी प्रेरणा व प्राण और इसकी प्रतिष्ठा ही उनका प्रण बन चुका है।

ऐलिजाबेथ की डायमंड जुबली से पीएम मोदी के कार्यक्रम तक छाया बैंड
धोद जिप्सी बैंड राजस्थानी लोक संगीत की छाप कई बड़े अन्र्तराष्ट्रीय समारोह में छोड़ चुका है। बात चाहे ब्रिटेन की रानी ऐलिजाबेथ के डायमंड जुबली समारोह की हो या हॉलेंड व फ्रांस के राष्ट्रपति के जन्म दिवस व पीएम मोदी के विभिन्न देशों में स्वागत समारोह की। सबमें बैंड ने राजस्थानी लोकगीतों व लोकनृत्य की प्रस्तुती देकर समारोकी रोनक बढाई है। बैंड की ख्याति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि समारोह के लिए बैंड की बुकिंग दो साल पहले ही करनी होती है।


बैंड के साथ गाने व मन में भी गांव
रहीस भारती का लोकसंस्कृति के अलावा पुश्तैनी गांव धोद से भी खास लगाव है। इसी वजह से बैंड का नाम धोद रखने के साथ उनके एक प्रसिद्ध गाने आयो जी आयो धोद प्यारो.. में भी उन्होंने गांव का नाम शामिल किया है। यही नहीं अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रमों से फुर्सत मिलने पर भी वह धोद ही आते हैं। बैंड का 'बेगा घरां आओ बालम' सरीखे लोकगीत भी विदेशी धरती पर खूब धूम मचा चुके हैं।

सम्मानों के शहंशाह
धोद जिप्सी बैंड व रहीस भारती को कई राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय अवार्ड से नवाजा जा चुका है। इनमें 2015 में यूएसए में "सिलीकन वैली ग्लोबल ऑर्गनाइजेशन कम्यूनिटी अवॉर्ड", 2016 में पौलेंड में "पॉलिश ग्रेमी अवॉर्ड", 2018 में "प्राइड ऑफ राजस्थान गौरव अवॉर्ड", 2019 में जापान में "कल्चरल एम्बेसेडर ऑफ राजस्थान अवॉर्ड"तथा 2020 में "राजस्थान स्टेट अवॉर्ड" प्रमुख है। निदेशक रहीस भारती को कई देशों में सांस्कृतिक राष्ट्रदूतों की उपाधि से भी नवाजा जा चुका है।


परंपरा व संस्कृति के लिए बनाया बैंड, विदेशी कलाकार भी दे रहे प्रस्तुती
बैंड संस्थापक रहीस भारती ने बताया कि धोद के संगीत घरानों ने लोक गायन को शुरू से ही आगे बढ़ाया। उस्ताद कल्लन खां, उस्ताद रसूल खां, उस्ताद रमजान खान, घासी खान, पिता रफीक खां व चाचा गुलाम अली व सलीम खांन की गायन-वादन परंपरा व राजस्थानी संस्कृति को आगे बढ़ाने के लिए बैंड की स्थापना 20 साल पहले की थी। जो आज प्रदेश के 700 से ज्यादा कलाकारों को अन्र्तराष्ट्रीय मंच देने के साथ अमेरिका व यूरोप के नामचीन पॉप व रॉक स्टार्स के साथ राजस्थानी लोकगीतों की प्रस्तुती दे चुका है। बैंड में परिवार के अमृत हुसैन, संजय खान, टीपू खान, मोहम्मद जाफर, अनुराग हुसैन व अफरीदी भारती भी सहयोगी है।

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned