ससुराल वाले कह रहे हमारी बहु ही नहीं, तहसीलदार बहु ने कहा 10 करोड़ की संपति के लिए रच रहे साजिश

राजस्थान के सीकर जिले की धोद नायब तहसीलदार रजनी यादव पर लगे फर्जी विधवा प्रमाण पत्र से नौकरी लेने के मामले में जिला प्रशासन भी मंगलवार को उलझा रहा है।

By: Sachin

Updated: 09 Jun 2021, 10:38 AM IST

सीकर. राजस्थान के सीकर जिले की धोद नायब तहसीलदार रजनी यादव पर लगे फर्जी विधवा प्रमाण पत्र से नौकरी लेने के मामले में जिला प्रशासन भी मंगलवार को उलझा रहा है। इस मामले में जिला प्रशासन की ओर से राजस्थान लोक सेवा आयोग को पत्र लिखा जा चुका है। जिला प्रशासन का तर्क है कि आरएएस भर्ती में दस्तावेज सत्यापन का जिम्मा सीधे तौर पर राजस्थान लोक सेवा आयोग व राजस्व मंडल अजमेर के पास होता है। ऐसे में दस्तावेजों से संबंधित जांच भी उनके स्तर पर होनी है। इधर, नायब तहसीलदार के ससुराल पक्ष का कहना है कि जल्द यदि जिला प्रशासन ने न्याय नहीं दिलाया तो पुलिस में एफआइआर दर्ज कराई जाएगी। आरोप है कि न्यायालय ने पत्नी होने के संबंध में शपथ पत्र मांगा था जो अभी तक प्रस्तुत नहीं किया गया है। वहीं नायब तहसीलदार रजनी यादव ने सभी आरोपों को सिरे से निराधार बताया है। उनका कहना है कि ससुराल पक्ष के पास लगभग दस करोड़ की सम्पत्ति है। इसके आधे हिस्से पर स्वभाविक तौर पर मेरा अधिकार है, इसलिए मुझे साजिश के तहत फंसाया जा रहा है। ससुराल पक्ष ने इन आरोपों को लेकर कहा कि यदि रजनी पत्नी होती तो सम्पत्ति के लिए दावा तो करती।

 

ससुराल पक्ष के दो बड़े आरोप:

1. पुलिस विभाग पत्नी मानता तो नौकरी क्यों नहीं:
ससुराल पक्ष का आरोप है कि लालचंद यादव राजस्थान पुलिस में कांस्टेबल के पद पर तैनात था। यदि रजनी यादव को पुलिस विभाग की ओर से मृतक की पत्नी माना जाता तो आश्रित कोटे में नियुक्ति मिलती लेकिन पुलिस विभाग ने नहीं दी। ससुराल पक्ष का आरोप है कि खुद राजस्थान लोक सेवा आयोग ने द्वितीय श्रेणी शिक्षक भर्ती में दस्तावेजों को सही नहीं माना। अब उसी आरपीएससी ने दस्तावेजों को कैसे सही मान लिया।


2. 20 साल में जयपुर में रहे, लेकिन कभी नहीं हुई बात

परिजनों ने संभागीय आयुक्त, जिला कलक्टर व लोक सेवा आयोग को दी शिकायत में मृतक लालचंद के मोबाइल नंबर भी दिए है। आरोप लगाया कि 20 वर्ष तक रजनी यादव जयपुर में रही, लेकिन उसके नंबर भी कभी भी बातचीत नहीं हुई है। उन्होंने अभी भी कॉल डिटेल निकालकर सच्चाई सामने लाने का दावा किया है।

नायब तहसीलदार के अपने तर्क:

1. पुलिस विभाग को चुनौती दी, मामला न्यायालय में:

नायब तहसीलदार का कहना है कि पुलिस विभाग के नौकरी नहीं देने के मामले में पुलिस विभाग को न्यायालय में चुनौती दी है। एक साल से कोरोना की वजह से सुनवाई नहीं हो सकी है। मैंने खुद लालचंद के खिलाफ शिकायत दी थी कि पहली पत्नी के जिन्दा होते हुए कैसे दूसरी शादी की जा सकती है।

2. संपत्ति व नौकरी की वजह से हो रही है शिकायत:

नायब तहसीलदार का आरोप है कि लगभग दस करोड़ की ससुराल पक्ष में सम्पत्ति है। उन्होंने दावा किया कि इस सम्पति पर मेरा भी हक है। लेकिन ससुराल पक्ष देना नहीं चाहता इसलिए झूठी शिकायत की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि ससुराल पक्ष के लोग दूसरे को नौकरी दिलाना चाहते है इसका विरोध किया तो शिकायत शुरू कर दी। उन्होंने कहा कि उस दौर में मोबाइल ही नहीं होते थे कैसे बातचीत का रेकार्ड सामने आएगा।

प्रशासन की रिपोर्ट में यह तथ्य
जिला प्रशासन ने सम्पर्क पोर्टल की शिकायत के जवाब में अपनी रिपोर्ट दी है। इसके अलावा राजस्थान लोक सेवा आयोग को भी पत्र लिखा है। इसमें बताया कि किसी भी कर्मचारी को किस कोटे में नौकरी दी गई है यह भर्ती एजेंसी या नियुक्ति एजेंसी के पास ही दस्तावेज के साथ प्रमाण उपलब्ध होते है। ऐसे में राजस्थान लोक सेवा आयोग या राजस्व मंडल स्तर जांच निष्पक्षता के साथ संभव है।

पिछले महीने पूरे प्रदेशभर में सुर्खियों में रही थी यादव
धोद की नायब तहसीलदार रजनी यादव ने पिछले महीने एक महिला का पीपीई किट पहनकर अंतिम संस्कार कराने के मामले में प्रदेशभर में सुखिर्यो में आई थी।

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