scriptDivyang Vishal topped with 98 percent marks with both hands | Success Story: दोनों हाथ से दिव्यांग, घर में कमाने वाला कोई नहीं, फिर भी 98 फीसदी अंक के साथ अव्वल आया विशाल | Patrika News

Success Story: दोनों हाथ से दिव्यांग, घर में कमाने वाला कोई नहीं, फिर भी 98 फीसदी अंक के साथ अव्वल आया विशाल

मन मजबूत है तो धन की कमी व तन की कमजोरी भी मुकाम तक पहुंचने से नहीं रोक सकती। यह साबित कर दिखाया है राजस्थान के सीकर जिले के दांतारामगढ़ के नजदीकी घाटवा गंाव के विशाल सिंह शेखावत ने

सीकर

Published: June 02, 2022 03:54:16 pm

सीकर/दांतारामगढ़. मन मजबूत है तो धन की कमी व तन की कमजोरी भी मुकाम तक पहुंचने से नहीं रोक सकती। यह साबित कर दिखाया है राजस्थान के सीकर जिले के दांतारामगढ़ के नजदीकी घाटवा गंाव के विशाल सिंह शेखावत ने। जिसने दोनों हाथों से विकलांग होने पर भी सामान्य बच्चों के साथ स्कूल में पढ़कर राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की 12वीं विज्ञान की परीक्षा में 97.60 फीसदी अंक हासिल किए हैं। वो भी तब जब पिता की मौत की वजह से परिवार खराब माली हालत के दौर से गुजर रहा है। ऐसे में सरस्वती शिक्षा निकेतन संस्थान का ये होनहार पूरे प्रदेश में जज्बे से जीत की मिसाल बन गया है।

दोनों हाथ से दिव्यांग, घर में कमाने वाला कोई नहीं, फिर भी 98 फीसदी अंक के साथ अव्वल आया विशाल
दोनों हाथ से दिव्यांग, घर में कमाने वाला कोई नहीं, फिर भी 98 फीसदी अंक के साथ अव्वल आया विशाल

13 साल पहले पिता को खोया, मां व बहनें संभालती है परिवार

विशाल के परिवार की माली हालत बेहद खराब है। करीब 13 साल पहले पिता गिरधारीलाल की मौत के बाद से मां के साथ तीन बड़ी बहनें ही खेती कर अपने इस इकलौते भाई की परवरिश कर रही है। उसकी पढ़ाई में किसी तरह की कोई कमी ना रहे वह इसका पूरा ध्यान रखती है।

दसवीं बोर्ड में भी रहा अव्वल
विशाल सिंह शुरू से पढ़ाई में अव्वल रहा है। सरस्वती स्कूल के निदेशक पूरणमल शर्मा ने बताया कि दसवीं बोर्ड परीक्षा में भी 96 फीसदी अंकों के साथ विशाल स्कूल के टॉपर्स में शामिल रहा था। इससे पहले भी हर क्लास उसने बेहतरीन अंकों से पास की है। उन्होंने बताया कि पिछले 14 साल से वह उन्हीं की स्कूल में पढ़ रहा है। जिससे परिवार की माली हालत व उसका पढ़ाई के प्रति समर्पण देखते हुए किसी प्रकार का कोई शुल्क भी नहीं लिया जाता।

प्रशासनिक सेवा का सपना
विशाल सिंह भविष्य में देश सेवा करना चाहता है। इसके लिए वह प्रशासनि सेवा में जाने का इच्छुक है। बकौल विशाल वह प्रशासनिक सेवा में जाकर निशक्त व कमजोर वर्ग के लोगों के उत्थान के लिए काम करना चाहता है।

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