डॉक्टर मिलते नहीं, इलाज तो दूर की बात

फतेहपुर के राजकीय धानुका अस्पताल को 'कार्रवाई' के बूस्टर डोज की जरूरत
सुबह साढ़े नौ बजे तक अस्पताल में चिकित्सक नहीं
कतार में लगे रहे मरीज, डीडीसी कांउटर भी नहीं खुला

By: Suresh

Published: 17 Feb 2021, 05:31 PM IST

फतेहपुर. एक दिन पहले यानी सोमवार को हुई जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक कलक्टर की मौजूदगी में हुई जिसमें ये स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि काम में कोई लापवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। लेकिन मंगलवार को कस्बे के धानुका सीएचसी में इन निर्देशों की धज्जियां उड़ती दिखी। धानुका अस्पताल में ओपीडी टाइम सुबह नौ बजे का है, लेकिन साढ़े नौ बजे तक डॉक्टरों के कमरों में ताला पड़ा रहा। सुबह साढ़े आठ बजे से मरीज आना शुरू हो जाते हैं। मंगलवार सुबह राजस्थान पत्रिका ने अस्पताल की व्यवस्थाओं का जायजा लिया तो अस्पताल के प्रबंधन की पोल खुल गई। सुबह साढ़े नौ बजे तक सिर्फ एक ही डॉक्टर कमरे में था। अन्य सभी डॉक्टरों के कमरो के ताले थे। लापरवाही का आलम यह भी है साढ़े नौ बजे तक दवा एक नंबर काउंटर नहीं खुला था। अस्पताल के एक मात्र जनरल फिजिशियन चिकित्सक 9.35 बजे पर अपने कक्ष में पहुंचे। दर्जनों मरीज आधे घंटे से भी ज्यादा समय से इंतजार कर रहे थे। सिर्फ ट्रोमा सेंटर में ड्यूटी पर डॉक्टर मौजूद था।
कोविड की जांच के लिए नियुक्त कक्ष में एक चिकित्सक व कुछ स्टाफ जरूर था, लेकिन मरीजों को देखने के लिए कोई भी डॉक्टर नहीं था। साढ़े नौ बजे तक अस्पताल प्रभारी का भी कमरा भी नहीं खुला था। इसके अलावा फिजिशियन डॉ मुकेश पालीवाल सहित लगभग सभी डॉक्टर के चैम्बर बंद पड़े थे। अस्पताल में बना डीडीसी कांउटर नंबर 1 के भी ताले लगे हुए थे। इस सब के बीच बड़ी बात यह थी कि किस डॉक्टर की ड्यूटी है, कौन डॉक्टर छुट्टी पर है, यह किसी को भी नहीं पता था। ना ही तो इसकी सूचना बोर्ड पर लगी थी और ना ही इसकी सूचना किसी स्टाफ के पास थी। सभी से पूछने पर एक ही जवाब मिला कि इस बारे में अस्पताल इंजार्च डॉ एसएन सबल को ही पता है। डॉ एसएन सबल सुबह 9.15 पर पहुंचे और पहले अस्पताल की व्यवस्थाएं देखी फिर 9.25 पर मरीजों को देखना शुरू किया।
राजकीय धानुका अस्पताल को कार्रवाई के डोज की जरूरत है। अस्पताल में आए दिन अव्यवस्थाएं सामने आती रहती हैं। लेकिन कार्रवाई नहीं होने से व्यवस्थाएं नहीं सुधर रही। अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सक होने के बाद भी आमजन को सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
ना ड्यूटी चार्ट, ना ही कोई बताने वाला
किस चिकित्सक की ड्यूटी है यह कहीं लिखा हुआ नहीं था। अस्पताल में जिस जगह लिखा जाता है वहां पर सोमवार का ही ड्यूटी चार्ट लिखा था। मंगलवार को किसकी ड्यूटी थी यह बताने वाला कोई नहीं था।
स्वास्थ्य समिति की बैठक में ये कहा गया
सीकर में जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में कहा गया कि मरीजों को मुख्यमंत्री निशुल्क दवा और जांच योजना का फायदा नहीं मिल रहा है और सरकारी चिकित्सको की ओर से मरीजों को ब्रांडेड दवा और जांच के लिए निजी लैब में भेजना जिले की चिकित्सा व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा रहा है। सरकारी चिकित्सकों की ओर से मरीजो के उपचार को लेकर बरती जाने वाली इस प्रकार की कोताही पर कार्रवाई की जाएगी। बैठक में कहा गया कि सरकारी अस्पताल में आने वालों को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सकीय सेवाएं व सुविधाएं उपलब्ध करवाना सभी का कर्तव्य है।
अब जिला कलक्टर से आस
अस्पताल में अव्यवस्थाओं को लेकर कई बार उपखण्ड स्तर के अधिकारियों से लेकर जिलास्तर तक के अधिकारियों ने अस्पताल का निरीक्षण किया। लेकिन आज तक स्थिति जस की तस है। अधिकारी आने से पहले अस्पताल को भनक लग जाती है। ऐसे में अब कलक्टर से आस है कि कोई कार्रवाई हो तो अस्पताल की व्यवस्थाएं सुधर सके।
लेट के लिए डॉक्टरों को कई बार टोका जा चुका है
डॉक्टरों को लेट आने की कई बार जानकारी मिली है। कई बार इसको लेकर टोका भी है। अस्पताल निरीक्षण का अधिकार सीएमएचओ के पास है। उनके कहने पर कई बार निरीक्षण किया है, हिदायत दी है। डॉक्टरों को समय पर अस्पताल आना चाहिए।
डॉ दलीप कुल्हरी, बीसीएमओ, फतेहपुर

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