बिजली व नेटवर्क से शिक्षा विभाग के नवाचार हो रहे गुल

सीकर. शिक्षा विभाग (rajasthan education department ) की ओर से लॉकडाउन (lock down) में विद्यार्थियों की पढ़ाई जारी रखने को लेकर प्रदेश में कई तरह के नवाचार किए गए लेकिन सरकारी स्कूलों के बच्चे पूरी तरह नहीं जुड़ पा रहे हैं।

By: Sachin

Published: 03 Jun 2020, 08:53 AM IST

सीकर. शिक्षा विभाग (rajasthan education department ) की ओर से लॉकडाउन (lock down) में विद्यार्थियों की पढ़ाई जारी रखने को लेकर प्रदेश में कई तरह के नवाचार किए गए लेकिन सरकारी स्कूलों के बच्चे पूरी तरह नहीं जुड़ पा रहे हैं। सीकर, चूरू व झुंझुनूं जिले में सबसे बड़ी दिक्कत मोबाइल नेटवर्क की है। स्माइल प्रोजेक्ट की राह में नेट की लो स्पीड बाधा बनी हुई है। अभिभावकों का कहना है कि स्माइल, टीवी व रेडियो के जरिए जो कंटेंट आ रहा है, वह हिन्दी भाषा में है। लेकिन विद्यार्थियों का जुड़ाव स्थानीय भाषा के हिसाब से होता है। इसलिए सरकार को कंटेंट स्थानीय भाषा में भी उपलब्ध कराना होगा।

किसमें क्या दिक्कत


स्माइल प्रोजेक्ट

स्माइल एप के जरिए शिक्षा विभाग की ओर से पढ़ाई कराई जा रही है। कई घरों में स्मार्टफोन नहीं होने की वजह से बच्चे पढ़ाई नहीं कर पा रहे। कई घरों में बच्चों के अलग-अलग क्लास में होने और स्मार्टफोन एक होने की वजह से भी परेशानी आ रही है।
दिक्कत

- नेट की स्पीड कम

- विभाग की ओर से कंटेंट केवल हिंदी भाषा में
- घर में बच्चों के हिसाब से मोबाइल की कमी

- शिक्षक से संवाद नहीं हो पाना


रेडियो के जरिए पढ़ाई

अब बहुत कम घरों में रेडियो है। ऐसे में शेखावाटी के 35 से 40 फीसदी बच्चे ही रेडियो के जरिए क्लास ले पा रहे हैं।
दिक्कत

- 60 फीसदी घरों में रेडियो नहीं
- कमजोर फ्रीक्वेंसी

- कक्षा जैसी एकाग्रता नहीं
- हर बच्चे का स्तर व पढऩे का तरीका अलग


टीवी बेहतर विकल्प

शिक्षा विभाग ने टीवी के जरिए भी सोमवार से पढ़ाई शुरू करा दी है। टीवी के जरिए कई बच्चे एक साथ बैठकर पढ़ाई कर सकते हैं। जिन गरीब परिवारों के पास टीवी नहीं है उनके लिए अभी भी कोरोनाकाल में पढ़ाई चुनौती है।
दिक्कत

- इस योजना का प्रचार-प्रसार कम
- कुछ गरीब परिवारों के घरों में टीवी नहीं
- टीवी के लिए बिजली की समस्या

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