scriptEducation department's lateness is at stake, the future of children | शिक्षा विभाग की लेटलतीफी दांव पर लगा बच्चों का भविष्य | Patrika News

शिक्षा विभाग की लेटलतीफी दांव पर लगा बच्चों का भविष्य

प्रदेश के सरकारी स्कूलों में लगातार दो डीपीसी ड्यू होने से रिक्त पदों के चलते कई स्कूलों में ताला लगने की नौबत आ चुकी हैं।

सीकर

Published: July 06, 2022 11:45:45 am

पत्रिका न्यूज़ नेटवर्क
rajasthanpatrika.com
प्रदेश के सरकारी स्कूलों में लगातार दो डीपीसी ड्यू होने से रिक्त पदों के चलते कई स्कूलों में ताला लगने की नौबत आ चुकी हैं। प्रदेश के 40 फीसदी राजकीय सीनियर सैंकड़री स्कूलों में संस्था प्रधान के पद खाली है। स्कूलों में नया सत्र शुरू होने के साथ ही अभिभावक अपने बच्चों के लिए स्कूल चयन की दौड़ में लग जाते है। स्कूल के परिवेश, शैक्षिक गुणवत्ता, स्टाफ की उपलब्धता एवं ट्रांसपोर्ट की सुविधा के आधार पर अभिभावक स्कूलों का चयन करते है। ऐसे में स्कूलों का नामांकन बढ़ाना शिक्षकों के लिए चुनौती बन चुका है। अगर समय पर दोनों डीपीसी और क्रमोन्नत स्कूलों में रिक्त पदों की वित्तीय स्वीकृ त्ति जारी हो तो शिक्षा विभाग को एक बढ़ी राहत मिल सकती है।

शिक्षा विभाग की लेटलतीफी दांव पर लगा बच्चों का भविष्य
शिक्षा विभाग की लेटलतीफी दांव पर लगा बच्चों का भविष्य

सात हजार सी. सैं. स्कूलों में नहीं प्रधानाचार्य
प्रदेश की 15 हजार 739 सीनियर सैंकडरी स्कूलों में से 7 हजार स्कूलें बिना प्रधानाचार्य के संचालित है। जिनमें 3828 स्कूलें पिछले सत्र में क्रमोन्नत हुई। उनमें अभी तक पद ही स्वीकृत नहीं किए गए हैं। 31 मार्च से पहले ही सत्र 2021-22 की डीपीसी होनी चाहिए थी। लेकिन शिक्षकों के सभी संवर्गों की डीपीसी बकाया चल रही है। एक अप्रैल के बाद सत्र 2022-23 की डीपीसी भी अभी तक नहीं हुई है। प्रधानाचार्य के 100 प्रतिशत पद पदोन्नति से भरे जाते है। वहीं पिछले बजट में सरकार ने सभी सीनियर सैंकडरी स्कूलों में उप प्रधानाचार्य के पद सृजित करने की घोषणा की। लेकिन उन पदों की अभी तक वित्तीय स्वीकृति जारी नहीं की गई है। इन पदों को भी डीपीसी से भरना है।

व्याख्याता पदों की वित्तीय स्वीकृति बकाया
सरकार ने प्रदेश की 3828 सैकंडरी स्कूलों को सीनियर सैंकडरी में क्रमोन्नति के आदेश पिछले सत्र में जारी किए गए। इन स्कूलों में कला संकाय शुरू करने के आदेश भी जारी कर दिए गए। ऐच्छिक विषयों की स्वीकृति भी 3810 स्कूलों में जारी हो चुकी है। लेकिन इन स्कूलों में व्याख्याता के 114430 पदों की वित्तीय स्वीकृत्ति जारी नहीं की गई। नया सत्र शुरू हो गया है, लेकिन इन 3810 स्कूलों में एक भी व्याख्याता नहीं हैं। इधर, सत्र 2020-21 व 2021-22 में क्रमोन्नत स्कूलों में अभी तक व्याख्याता का केवल एक ही पद स्वीकृत किया गया है। शेष पदों की वित्तीय स्वीकृति मिलना शेष है।

पदोन्नति से भरना एक अच्छा विकल्प
व्याख्याता के 54 हजार 666 स्वीकृत पदों में से 10057पद रिक्त है। 13 हजार पदों की वित्तीय स्वीकृति का इंतजार है। 23 हजार पद ऐसे है, जो वर्तमान में रिक्त है। सैंकड़ ग्रेड शिक्षकों के 96 हजार 483 स्वीकृत पदों में से 23 हजार 287 पद रिक्त है। नई भर्ती से इस पूरे सत्र में शिक्षक मिलने की उम्मीद कम है। इसलिए व्याख्याता तक के पदों को 50 प्रतिशत पदोन्नति से भरना ही विकल्प है। उप प्रधानाचार्य तथा प्रधानाचार्य के पदों को 100 प्रतिशत पदोन्नति से भरे जा सकते है। इन दोनों संवर्गों के 23143पदों को पदोन्नति से भरा जा सकता है। व्याख्याता और सैंकड़ ग्रेड के कुल रिक्त पदों में से 50 प्रतिशत पद 23 हजार 143 पदों को पदोन्नति से भर कर छात्रों को राहत प्रदान की जा सकती हैं।

पद स्वीकृत स्वीकृति का इंतजार कुल रिक्त पद डीपीसी के योग्य पद
प्रधानाचार्य 11655 3828 7000 7000
उपप्रधानाचार्य 00 15739 15739 15739
व्याख्याता 54666 13000 23000 11500
सैकंड ग्रेड 96483 900 23287 11643
कुल 162804 33467 69026 45882

कब खत्म होगा इंतजार
दो साल से शिक्षक पदोन्नति का बेरोज़गार नौकरी तथा विद्यार्थी और अभिभावक स्कूलों में शिक्षकों का इंतज़ार कर रहे हैं। इधर, अधिकारी, मंत्री की हरी झंडी का इंतजार कर रहे हैं। ये इंतजार कब खत्म होगा और इसका खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ेगा या सरकार को, यह भविष्य के गर्भ में है। अतिशीघ्र त्वरित कार्यवाही में ही सब का हित है। अन्यथा सरकार और सार्वजनिक शिक्षा दोनों पर संकट होगा।
उपेन्द्र शर्मा, प्रदेश महामंत्री, राजस्थान शिक्षक संघ (शेखावत)

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