शिक्षा मंत्री डोटासरा ने कहा, ऑनलाइन पढ़ाई की पहले बतानी होगी फीस

सीकर. कोरोनाकाल में स्कूली विद्यार्थियों पर फीस का दबाव बनाने के मामले में राज्य सरकार ने अभिभावकों को राहत देने की पूरी तैयारी कर ली है।

By: Sachin

Published: 15 Nov 2020, 03:18 PM IST

सीकर. कोरोनाकाल में स्कूली विद्यार्थियों पर फीस का दबाव बनाने के मामले में राज्य सरकार ने अभिभावकों को राहत देने की पूरी तैयारी कर ली है। जिस कक्षा का जितना सिलेबस तय होगा उतनी ही फीस निजी स्कूल अब वसूल सकेंगे। राज्य सरकार ने बोर्ड कक्षाओं के अलावा अन्य कक्षाओं का सिलेबस भी तय करने की तैयारी कर ली है। सिलेबस में 10 से 40 फीसदी तक की कटौती किया जाना प्रस्तावित है। इसी कटौती के आधार पर ट्यूशन फीस में भी कटौती हो जाएगी। शुक्रवार को पत्रिका से खास बातचीत में शिक्षा राज्य मंत्री गोविन्द सिंह डोटासरा ने कहा कि निजी स्कूल ऑनलाइन फीस के नाम पर ट्यूशन फीस से ज्यादा शुल्क नहीं वसूल सकेंगे। यदि कोई स्कूल अब ट्यूशन फीस में बढ़ोतरी करता है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि निजी स्कूल संचालकों से वार्ता के लिए सरकार तैयार है। प्रमुख शासन सचिव के स्तर पर वार्ता हो चुकी है। लेकिन बच्चों की पढ़ाई के मामले में अभिभावकों को किसी भी तरह से परेशान नहीं होने दिया जाएगा। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कोरोना की वजह से लागू हुए लॉकडाउन के दौरान सबसे पहले फीस स्थगित करने के आदेश जारी करवाए। इसके अलावा बच्चों को रेडियो, टीवी व ऑनलाइन स्माइल प्रोजेक्ट के जरिए पढ़ाई कराने वाला राजस्थान पहला राज्य बना।


अभिभावकों की सहमति आवश्यक
कई अभिभावकों की बिना सहमति के ऑनलाइन कक्षाओं में बच्चों को शामिल करने के सवाल पर शिक्षा मंत्री डोटासरा ने कहा कि स्कूल प्रबंधन को पहले ऑनलाइन कक्षाओं की फीस बतानी होगी। इसमें पढ़ाई के घंटे सहित अन्य जानकारी भी अभिभावकों को देनी होगी। इसके बाद यदि सहमत होंगे तो वे बच्चे को ऑनलाइन पढ़ाई कराएंगे।

पत्रिका के सवाल और मंत्री के जवाब
पत्रिका: कोरोनाकाल में अभिभावकों पर फीस का दवाब बनाया जा रहा है, क्या यह अनुचित नहीं है?
शिक्षा मंत्री: कोरोनाकाल में सभी वर्गों को आर्थिक नुकसान हुआ है। राज्य सरकार अभिभावकों के साथ है। मुख्यमंत्री ने कोरोनाकाल शुरू होते ही फीस स्थगन का आदेश जारी किया है। बिना पढ़ाई के कोई फीस का दवाब बनाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

पत्रिका: कई निजी स्कूलों की ओर से पुराने मापदंडों के आधार पर फीस वसूली की तैयारी है।
शिक्षा मंत्री: पुराने पेरामीटर से कोई भी स्कूल फीस नहीं वसूल सकता है। जितना सिलेबस होगा उतनी ही फीस ले सकेंगे।

पत्रिका: कई बच्चों को फीस जमा नहीं कराने पर ऑनलाइन कक्षाओं से बाहर किया जा रहा है।
शिक्षामंत्री: यह बिल्कुल गलत है। शिकायत पर विभाग नियमानुसार कार्रवाई करेगा।

पत्रिका: राज्य सरकार ने कोरोना में राहत देते हुए बच्चों को प्रमोट कर दिया, लेकिन अब निजी स्कूलों की ओर से लॉकडाउन अवधि की भी फीस मांगी जा रही है।
शिक्षामंत्री: सरकार ने फीस निर्धारण कर दिया, लेकिन स्कूल संचालक मामले को न्यायालय में लेकर गए। इसके बाद भी सरकार वार्ता को तैयार है। सैकड़ों अभिभावक बेरोजगार हो गए। लॉकडाउन अवधि की फीस के लिए निजी स्कूलों को दबाव नहीं बनाना चाहिए।

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