शिक्षा अधिकारियों को काम नहीं सुंदरता चाहिए!

जिले में उत्कृष्ट विद्यालय के चयन को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। ज्यादा नामांकन, उपलब्धियों व सुविधाओं वाले स्कूल को छोड़कर शिक्षा विभाग ने कम साधन- संसाधन वाले स्कूल का चयन कर लिया है।

By: Sachin

Published: 26 Aug 2020, 02:44 PM IST

सीकर. जिले में उत्कृष्ट विद्यालय के चयन को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। ज्यादा नामांकन, उपलब्धियों व सुविधाओं वाले स्कूल को छोड़कर शिक्षा विभाग ने कम साधन- संसाधन वाले स्कूल का चयन कर लिया है। जिसके बाद विभाग संदेह व आरोपों से घिर गया है।


यूं समझें चयन की गफलत
खंडेला की राजकीय उच्च प्राथमिक स्कूल ढाणी मालियान चौकड़ी में 265 बच्चों का नामांकन है। नवोदय स्कूल में 14 तथा सात साल में ही एनएमएमएस (नेशनल मेरिट कम मीन्स स्कॉलरशिप) में सबसे ज्यादा 79 बच्चों का चयन करवाने वाला स्कूल बच्चों को वाहन सुविधा भी मुहैया करवा रहा है। लेकिन, शिक्षा विभाग ने इस स्कूल को उत्कृष्ट नहीं माना है। जबकि इससे आध्ेा नामांकन व कम सुविधाओं वाले राउप्रावि उदनसरी का चयन उत्कृष्ट विद्यालय के रूप में कर लिया गया है। जो विभाग की निष्पक्षता को कटघरे में खड़ा कर रहा है।


मामले में शिक्षा विभाग पर पक्षपात व गंभीरता से काम नहीं करने का आरोप लग रहा है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि उत्कृष्ट व आदर्श विद्यालयों के चयन का आधार उनके साधन- संसाधन व उपलब्धियों की बजाय आवेदन की फाइलें बन कर रह गई है। जिसकी सुंदरता पर ही स्कूल का चयन टिका हुआ है।

 

इनका कहना है:

झूठे दस्तावेजों के साथ अच्छी फाइल तैयार करना ही सम्मान का पैमाना है, अच्छा कार्य,नामांकन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं । सरकार की नीति और अधिकारियों की कार्यशैली ने अच्छा काम करने वाले शिक्षकों के मनोबल को कमजोर किया है। दुर्भाग्य है कि हमारे अधिकारी धरातल पर नहीं,कागजों पर काम करते हैं। इसीलिए योग्य लोग सम्मान के लिए आवेदन नहीं करते हैं
उपेंद्र शर्मा, प्रदेश महामंत्री राजस्थान शिक्षक संघ शेखावत


शिक्षक सम्मान की बात हो या उत्कृष्ट व आदर्श विद्यालयों के चयन की। शिक्षा विभाग पर हमेशा सवाल उठते रहे हैं। जरूरी है कि विभाग भौतिक निरीक्षण व वास्तविक कार्यों को देखते हुए इनका चयन करें।

मदन गढ़वाल, प्रदेश महामंत्री रेस्टा

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