पत्रिका एक्सक्लूसिव : कोरोना से गहरी नशें की जड़े, दुश्मनों के दांत खटटे करने वाले चपेट में आए युवा, जानें कैसे चला ऑपरेशन क्लीन

सीकर. शिक्षा नगरी में नशे की गहरी जड़ों ने पैर पसार लिए है। देश की सीमा पर दुश्मनों के दांत खट्टे करने वाले शेखावाटी के युवाओं को नशे की लत खोखला कर रही है। छोटी-छोटी पुडिय़ा में स्मैक 15 से अधिक जगहों पर छिपकर बेचा जा रहा है।

सीकर. शिक्षा नगरी में नशे की गहरी जड़ों ने पैर पसार लिए है। देश की सीमा पर दुश्मनों के दांत खट्टे करने वाले शेखावाटी के युवाओं को नशे की लत खोखला कर रही है। छोटी-छोटी पुडिय़ा में स्मैक 15 से अधिक जगहों पर छिपकर बेचा जा रहा है। आलम यह हो गया है कि युवा शाम होते ही नशे की दुकानों पर मंडराने लगते है। पिछले काफी समय से शहर में नशे के सफेद कारोबार पनप रहा है। राजस्थान पत्रिका को युवाओं के गलत दिशा में भटकने का पता लगा। पत्रिका टीम ने शहर में बिक रहे नशे के कारोबार के मामले की पड़ताल की तो काफी चौंकाने वाली बातें सामने आई। पत्रिका टीम ने पूरे मामले के खुलासे के लिए 20 दिनों तक स्टिंग ऑपरेशन चलाया। चौंकाने वाली सामने आई कि दौ सौ रुपए से लेकर तीन सौ रुपए तक स्मैक की पुडिया बेची जा रही है। शहर में 15-20 जगहों पर नशे का कारोबार फल-फूल रहा है। पत्रिका टीम ने पुलिस विभाग को भी ऑपरेशन में शामिल किया। इसके बाद पत्रिका और पुलिस टीम ने ऑपरेशन क्लीन शुरू किया।

शाम पांच बजे से शुरू होता कारोबार
नशे के सौदागर पैदल ही घूमते रहते है। ग्राहकों की पहचान बना रखी है। ग्राहक सामने दिखने पर चुपचाप ही पुडिय़ा निकाल कर दे देते है। कारोबार शाम पांच से ही शुरू होता है। शाम को पांच बजते ही नशे में लिप्त युवाओं की लाइनें लग जाती है। दुकान के बाहर खड़े युवा पुडिय़ा मिलने का इंतजार करते रहते है। शाम को पांच बजे से लेकर रात को नौ बजे तक ही पुडिया दी जाती है। इसके अलावा केवल पुराने ग्राहकों को ही पुडिया दी जाती है। अगर कोई नया युवक स्मैक की पुडिया लेने जाता है तो उसे देने से मना कर देते है। पहले से ही परिचित किसी ग्राहक के कहने पर ही पुडिय़ा दी जाती है। साथ ही गारंटी भी ली जाती है।

रानी, छाछ नामों से बेची जा रही स्मैक
इतना ही नहीं नशे के कारोबार कोड वर्ड में स्मैक बेच रहे है। दुकानों पर स्मैक रानी और छाछ के नाम से बेची जा रही है। इन दो नामों के बताने पर ही पुराने ग्राहक की पहचान हो जाती है। पुडिय़ा अलग-अलग रेट की बनाई गई है। रानी के रूप में स्मैक दौ सौ से तीन सौ रुपए और गांजे के रूप में छाछ के नाम से 60 रुपए से 120 रुपए में बेची जा रही है। इसके बाद उसे तुरंत रेट पूछ कर पुडिय़ा थमा दी जाती है।

बसों में बैठकर कोटा से लेकर आते है माल
पड़ताल में सामने आया है कि नशे के सौदागरों के संपर्क कोटा से जुड़े हुए है। कोटा में स्मैक के बड़े तस्कर माल लाकर बेचते है। सीकर के छोटे सौदागर बसों में बैठकर कोटा जाते है। इसके बाद कोटा से इक_ा माल लेकर आते है। बसों में किसी प्रकार की चेकिंग भी नहीं होती है जिससे वह आराम से सीकर में माल लेकर आ जाते है। यहां पर छोटी-छोटी पुडिया बनाकर स्मैक बेची जाती है। माल बिकने से पहले ही दोबारा से लेकर आ जाते है। शिक्षा नगरी में धीरे-धीरे नशे के कारोबार का जाल बिछाया जा रहा है। शहर में नवलगढ़ रोड, पिपराली रोड पर बड़े शिक्षण संस्थान है। ऐसे में कोचिंग संस्थानों में पढऩे वाले छात्र भी नशे की लत में शामिल हो रहे है।

एक नंबर का माल है, कितना भी ले लो दें देंगे, नशे के सौदागरों से बातचीत
ग्राहक : कितनी लाइन की है?
सौदागर : एक पुडिय़ा में 10-11 लाइन जुड़ जाएगी।
ग्राहक : 18 लाइन की चाहिए।
सौदागर : मेरे पास तो यही है। दौ सौ रुपए की मिलेगी।
ग्राहक : एक ही साइज है। दो सौ की है।
सौदागर : तुझे कितनी लेनी है। ग्राहक : ला दे दें, कितनी है।
सौदागर : तंबाकू के पैकेट से पांच पुडिय़ा निकाल कर देता है। फिर दो देता है।
ग्राहक : हमें ज्यादा माल चाहिए।
सौदागर : कितना चाहिए।
ग्राहक : 50 ग्राम चाहिए, हमारा स्कूल कॉलेज में काम है।
सौदागर : अभी यही है, सुबह आठ बजे फोन करना, जितना चाहे दे देंगे।

सौदागर से बाद में कई बार फोन पर अधिक माल लेने के लिए भी बात हुई। सौदागर ने कोटा से अधिक माल दिलाने को कहा।

शहर में दूसरे सौदागर से हुई बात...
ग्राहक : पुडिय़ा दे दें।
सौदागर : एक पुडिया देता है।
ग्राहक : कितने की है।
सौदागर : दौ सौ रुपए दे दे।
ग्राहक : कितने लाइन की है।
सौदागर : मेरे पास 6 लाइन की है।
सौदागर : भाई, मैं तुझे जानता नहीं हूं, कोई दिक्कत मत कर देना।
ग्राहक : मेरा नंबर यहीं है। लिख लें, इसी से फोन कंरूगा।
मोबाइल की ओर देखने पर कुछ शक हुआ, हाथ में फोन लेकर बोला-कौन सा फोन है कितने का है।
ग्राहक : वीवो है। 23 हजार में लिया है।
पत्रिका के पास स्टिंग ऑपरेशन से जुड़े सभी वीडिय़ों मौजूद है।

Vikram Reporting
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