scriptExemption to government, decree to be recovered from private and madra | सरकारी को छूट, निजी और मदरसों से वसूलने का फरमान, आरटीई भूला विभाग | Patrika News

सरकारी को छूट, निजी और मदरसों से वसूलने का फरमान, आरटीई भूला विभाग

प्रदेश में शिक्षा विभाग की चूक ने आरटीई के नियमों को मजाक बना दिया है। दरअसल, आरटीई अधिनियम के तहत कक्षा एक से आठवीं तक के विद्यार्थियों से किसी तरह का परीक्षा शुल्क नहीं वसूला जा सकता है।

सीकर

Updated: April 11, 2022 02:54:46 pm

सीकर. प्रदेश में शिक्षा विभाग की चूक ने आरटीई के नियमों को मजाक बना दिया है। दरअसल, आरटीई अधिनियम के तहत कक्षा एक से आठवीं तक के विद्यार्थियों से किसी तरह का परीक्षा शुल्क नहीं वसूला जा सकता है। लेकिन पिछले दिनों शिक्षा विभाग ने सरकारी विद्यालयों को छूट देते हुए निजी स्कूल व मदरसों को लेकर आदेश जारी कर दिया। इसके तहत निजी स्कूल संचालक व मदरसों से प्रति विद्यार्थी 40 रुपए की मांग की गई है। शिक्षा विभाग ने आरटीई अधिनियम से बचने के लिए तर्क दिया कि यह फीस विद्यार्थियों से नहीं लेनी है। इस आदेश का प्रदेश के सभी जिलों में निजी शिक्षण संस्थाओं की ओर से विरोध किया जा रहा है। पहले निजी स्कूल व मदरसा प्रबंधन को यह फीस दस अप्रेल तक जमा करानी थी। लेकिन अब समय बढ़ाकर 15 अप्रेल कर दिया है। लेकिन प्रदेश के 80 फीसदी से अधिक निजी स्कूल संचालकों ने राशि जमा नहीं कराई है। इस मामले में निजी स्कूल संचालकों ने मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन भी भिजवाए है।

सरकारी को छूट, निजी और मदरसों से वसूलने का फरमान, आरटीई भूला विभाग
सरकारी को छूट, निजी और मदरसों से वसूलने का फरमान, आरटीई भूला विभाग

बच्चों से फीस के अलावा कोई फंड नहीं

इस मामले में निजी स्कूल संचालकों का कहना है कि स्कूलों के पास विद्यार्थियों की फीस के अलावा आय का कोई विकल्प नहीं होता है। इस तरह की फीस जमा कराने के लिए कोई फंड नहीं है। इधर, शिक्षा निदेशालय ने आदेश जारी कर कहा कि निजी स्कूल व मदरसा प्रबंधन किसी भी सूरत में ब'चों से यह फीस नहीं ले सकेगा।


इधर, प्रवेश पत्र अपलोड, परिणाम भी नहीं रोक सकेंगे
इस मामले में पत्रिका टीम ने शिक्षा विभाग के सेवानिवृत्त अधिकारी व निजी स्कूलों के प्रतिनिधियों से भी बातचीत की। आरटीई अधिनियम की वजह से शिक्षा विभाग ने कक्षा पांचवी के विद्यार्थियों के प्रवेश पत्र भी अपलोड कर दिए है। एक्सपर्ट का कहना है कि विभाग की ओर से निजी स्कूलों की ओर से फीस जमा नहीं कराने पर भी विद्यार्थियों का परिणाम नहीं रोका जा सकेगा।


5 करोड़ की वसूली का खेल

प्रदेश में 50 हजार से अधिक निजी स्कूल पंजीकृत है। इस साल पांचवी की परीक्षा में प्रदेशभर के 13 लाख से अधिक विद्यार्थी शामिल होंगे। इस हिसाब से निजी स्कूल व मदरसों का गणित निकाला जाए तो लगभग पांच करोड़ रुपए शिक्षा विभाग की ओर से वसूलने की तैयारी है।

आरटीई अधिनियम के तहत नहीं ले सकते फीस
आरटीई अधिनियम के तहत राज्य सरकार की ओर से किसी तरह की फीस आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों से नहीं वसूली जा सकती है। निजी स्कूल व मदरसों से पांचवी के विद्यार्थियों की परीक्षा शुल्क के तौर पर 40 रुपए वसूलने का फरमान पूरी तरह गलत है।

अनिल शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष, स्कूल शिक्षा परिवार

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