घुटनों तक पानी में राम नाम सत्य है!

घुटनों तक पानी में राम नाम सत्य है!

Gaurav kanthal | Updated: 23 Jul 2019, 07:57:08 PM (IST) Sikar, Sikar, Rajasthan, India

अपनों को खोने के गम को दूर करने के बजाए यदि दुख को और भी बढ़ा दिया जाए तो दिए गए इस दुख की कोई इंतहा नहीं होगी। नगर परिषद आंखें मूंदे बैठी है... कान पर जूं नहीं रैंग रही है... इनका तो दिल भी नहीं पसीजता है। और भी तरह के आरोप स्थानीय निकाय पर अनवरत लग रहे हैं क्योंकि शिव धाम धर्माणा श्मशान घाट इलाके में बारिश के दौरान पानी की निकासी नहीं होने के कारण लोग बड़ी मुश्किल के साथ शवयात्रा को अंतिम मुकाम तक पहुंचा पाते हैं। घुटनों तक पानी में कंधे पर अर्थी लिए लोगों का नगर परिषद को कोसना लाजमी सा हो जाता है।

सीकर. शहर में नगर परिषद की लापरवाही का दंश मौत के बाद भी झेलना पड़ता है। यहां अंतिम सफर की राह भी कीचड़ से सनी है। जरा सी बरसात होने पर ही शव यात्रा को घुटनों तक भरे पानी से होकर ले जाना पड़ता है। यह स्थिति है रामलीला मैदान के पीछे स्थित शिव धाम धर्माणा श्मशान घाट जाने वाले रास्ते की। सोमवार को जरा सी बरसात होने के साथ रास्ते में पानी भर गया। लोगों को शव यात्रा ले जाने में भी परेशानी का सामना करना पड़ा। दाह संस्कार में आए लोगों ने नगर परिषद की ओर से बरती जा रही लापरवाही का विरोध जताया।
15 वर्ष से परेशानी भोग रहे हैं लोग
शिव धाम धर्माणा श्मशान घाट शहर का पुराना और प्रमुख श्मशान घाट है। श्मशान घाट की व्यवस्था वर्तमान में शिवधाम धर्माणा चैरिटेबिल ट्रस्ट संभाल रहा है। ट्रस्ट ने श्मशान घाट के अंदर की व्यवस्थओं में काफी सुधार कर लिया, लेकिन आम रास्ते पर भरने वाले बरसाती पानी और कीचड़ की समस्या करीब 15 वर्ष से लोग भोग रहे हैं। निकासी व्यवस्था ठीक नहीं होने के कारण जरा सी बरसात में ही घुटनों तक पानी भर जाता है।
प्रदर्शन के बाद भी नहीं बरती गंभीरता
श्मशान घाट के रास्ते से पानी की निकासी और सफाई व्यवस्था को सुचारू करने के लिए क्षेत्र के लोगों और व्यवस्था का जिम्मा संभालने वाले ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने कई बार प्रदर्शन किए। मुख्यमंत्री, जिला कलक्टर से लेकर नगर परिषद के अधिकारियों को कइ बार अवगत करवाया गया, लेकिन इस माामले में अभी तक गंभीरता नहीं बरती गई।
बिना लेवल के बना दी नालियां
नगर परिषद ने पिछले वर्ष इस क्षेत्र में पानी निकासी के लिए नालियों का निर्माण करवाया गया था। मोहल्ले के लोगों का कहना है कि नालियों का निर्माण बिना लेवल निकाले ही कर दिया गया। ऐसे में बरसात होने पर दूसरी कॉलोनी का पानी भी यहां आकर एकत्र हो जाता है। पिछले वर्ष बनी नालियां भी क्षतिग्रस्त हो गई है। जिससे समस्या ज्यादा गंभीर हो गई है।
छह माह पहले स्वीकृत हो गया था टेंडर
क्षेत्र के पार्षद अशोक सैनी का कहना है कि अंतिम सफर की राह की समस्या पिछले साढ़े चार वर्ष से नगर परिषद की बोर्ड बैठक में उठा रहा हूं, लेकिन सभापति और परिषद के अधिकारी इसके समाधान के लिए गंभीर नहीं है। छह माह पहले इस क्षेत्र में सीसी सडक़ निर्माण के लिए 49 लाख रुपए की राशि का टेंडर कर दिया गया, लेकिन अभी तक इसका वर्क ऑडर जारी नहीं किया गया है, जिससे शहर के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कोई नहीं सुन रहा हमारी...
ट्रस्ट के चेयरमैन कैलाश तिवाड़ी का कहना है कि समस्या के समाधान के लिए स्थानीय और राज्य सरकार के स्तर पर कई बार प्रयास कर लिए गए, लेकिन कहीं पर भी सुनवाई नहीं हो रही। यहां का प्रशासन आंदोलन की भाषा ही समझता है। जल्द समाधान नहीं किया गया तो वे शव साथ लेकर धरने पर बैठ जाएंगे। जिसकी जिम्मेदारी नगर परिषद की होगी। मोहल्ले के लोग भी इस समस्या से परेशान है।

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